राकेश शर्मा की रिपोर्ट
घाघरा नदी में तलाशते रहे गोताखोर, CCTV में सुराग खोजती रही पुलिस; शाम को पंचायत भवन में सुरक्षित मिली आरुषि निषाद
गोरखपुर। घाघरा नदी में किशोरी के डूबने की आशंका के बाद करीब एक दिन तक चले सर्च ऑपरेशन का अंत उस वक्त चौंकाने वाले तरीके से हुआ, जब लापता हुई 15 वर्षीय आरुषि निषाद उसी गांव के पंचायत भवन में सकुशल मिल गई। जिस किशोरी को लेकर परिवार और ग्रामीण किसी अनहोनी की आशंका में परेशान थे, उसके सुरक्षित मिलने से पूरे गांव में राहत की लहर दौड़ गई।
हालांकि, अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आरुषि आखिर पंचायत भवन तक कैसे पहुंची और करीब 26 घंटे तक वहां उसके मौजूद रहने की जानकारी किसी को क्यों नहीं हो सकी।

9 सितंबर की दोपहर अचानक गायब हुई थी किशोरी
मामला बेलघाट थाना क्षेत्र के कटया गांव का है। गांव निवासी धर्मेंद्र निषाद की 15 वर्षीय बेटी आरुषि निषाद 9 सितंबर को दोपहर करीब 2 बजे अचानक घर से लापता हो गई। काफी देर तक उसके वापस नहीं लौटने पर परिवार ने आसपास के इलाकों में तलाश शुरू की।
तलाश के दौरान कुछ ग्रामीणों ने कथित तौर पर उसे घाघरा नदी की तरफ जाते हुए देखने की बात कही। इसके बाद आशंका जताई गई कि कहीं वह नदी में न चली गई हो। देखते ही देखते मामला गंभीर हो गया और परिजनों के साथ ग्रामीण भी नदी की ओर पहुंच गए।
घाघरा नदी में शुरू हुआ सर्च ऑपरेशन
किशोरी के नदी की ओर जाने की सूचना मिलने के बाद पुलिस और ग्रामीणों ने संभावित स्थानों पर खोजबीन शुरू की। नदी में किसी अनहोनी की आशंका को देखते हुए गोताखोरों की मदद ली गई। पानी में संभावित स्थानों पर काफी देर तक तलाश की गई, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली।
दूसरी ओर पुलिस ने आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज भी खंगालनी शुरू कर दी। जांच टीम यह पता लगाने का प्रयास करती रही कि किशोरी आखिरी बार कहां और किस दिशा में जाती दिखाई दी थी।
रात से लेकर अगले दिन दोपहर तक बढ़ती रही बेचैनी
समय बीतने के साथ परिवार की चिंता बढ़ती गई। गांव में भी तरह-तरह की आशंकाएं सामने आने लगीं। नदी में गोताखोर लगातार तलाश करते रहे, जबकि पुलिस उपलब्ध CCTV फुटेज के जरिए घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में जुटी रही।
10 सितंबर को दोपहर तक नदी में तलाश जारी रही, लेकिन किशोरी का कोई पता नहीं चला। परिवार के लिए हर गुजरता घंटा बेहद भारी साबित हो रहा था। गांव में भी चिंता और सन्नाटे का माहौल बना हुआ था।
पंचायत भवन में मिली आरुषि तो बदल गया पूरा माहौल
लगभग 26 घंटे बाद 10 सितंबर की शाम करीब 4 बजे अचानक ऐसी खबर सामने आई, जिसने पूरे घटनाक्रम को ही बदल दिया। आरुषि गांव के पंचायत भवन में सकुशल मिल गई।
जिस बच्ची को लेकर नदी में डूबने की आशंका जताई जा रही थी, वह सुरक्षित हालत में पंचायत भवन के भीतर मिली। सूचना मिलते ही परिजन वहां पहुंचे और बेटी को सकुशल देखकर उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। ग्रामीणों ने भी राहत की सांस ली।
नदी में तलाश जारी थी, पंचायत भवन में थी किशोरी
इस पूरे मामले का सबसे हैरान करने वाला पहलू यही है कि एक तरफ घाघरा नदी में गोताखोर
किशोरी की तलाश कर रहे थे और दूसरी तरफ वह उसी गांव के पंचायत भवन में मौजूद थी। पुलिस और
ग्रामीणों की ओर से आसपास के संभावित स्थानों पर खोजबीन किए जाने के
बावजूद उसकी मौजूदगी का पता करीब एक दिन तक नहीं चल सका।
अब इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आरुषि पंचायत भवन तक कब पहुंची? वह वहां क्यों गई? क्या वह पूरे समय वहीं थी या बाद में वहां पहुंची? उसने परिवार से संपर्क क्यों नहीं किया? क्या किसी ने उसे वहां देखा था? इन सवालों के जवाब सामने आना अभी बाकी है।
पुलिस जांच के बाद साफ होगी पूरी तस्वीर
फिलहाल आरुषि के सुरक्षित मिलने से परिवार को सबसे बड़ी राहत मिली है।
वह स्वस्थ बताई जा रही है और अपने परिजनों के साथ है। हालांकि,
उसके लापता होने से लेकर पंचायत भवन में मिलने तक की पूरी कड़ी अभी रहस्य बनी हुई है।
पुलिस की जांच में CCTV फुटेज, किशोरी के बयान और घटनाक्रम से जुड़े अन्य तथ्यों के
आधार पर यह स्पष्ट हो सकता है कि वह घर से निकलने के बाद
किन रास्तों से होकर पंचायत भवन तक पहुंची और
इतने लंबे समय तक वहां उसकी जानकारी क्यों नहीं मिल सकी।
एक दिन की तलाश, कई सवाल अनसुलझे
आरुषि के सुरक्षित मिलने के बाद भले ही परिवार और गांव ने राहत की सांस ली हो,
लेकिन करीब 26 घंटे तक चले घटनाक्रम ने कई सवाल छोड़ दिए हैं। घाघरा नदी में डूबने की
आशंका से शुरू हुई तलाश का अंत पंचायत भवन में सकुशल मिलने के साथ हुआ।
अब लोगों की नजर इस बात पर है कि किशोरी खुद इस पूरे घटनाक्रम के
बारे में क्या बताती है और पुलिस की जांच में कौन-सी नई जानकारी सामने आती है।
26 घंटे की तलाश के बाद बदली पूरी कहानी
गोरखपुर में 15 वर्षीय किशोरी के लापता होने के बाद घाघरा नदी में डूबने की
आशंका से हड़कंप मच गया। गोताखोर नदी में तलाश करते रहे और पुलिस CCTV फुटेज खंगालती रही,
लेकिन करीब 26 घंटे बाद किशोरी गांव के पंचायत भवन में सकुशल मिल गई।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि वह वहां कैसे पहुंची और
इतने समय तक उसकी मौजूदगी का पता क्यों नहीं चला?
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