मॉनसून की विदाई से पहले बदलेगा मौसम, 12 से 21 सितंबर तक कई राज्यों में तेज बारिश के संकेत

नई दिल्ली। सितंबर का महीना आगे बढ़ने के साथ देश में दक्षिण-पश्चिमी मॉनसून की सक्रियता धीरे-धीरे कम होने लगी है। हालांकि, विदाई से पहले मौसम एक बार फिर करवट ले सकता है। विभिन्न वेदर मॉडल के संकेतों के अनुसार 12 सितंबर से 21 सितंबर के बीच देश के मध्य, दक्षिण, पूर्व और पश्चिमी हिस्सों में बारिश का एक सक्रिय दौर देखने को मिल सकता है।

इस अवधि में कई स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा के साथ कुछ क्षेत्रों में तेज बौछारें पड़ने की संभावना बन सकती है। गरज-चमक, आंधी जैसी परिस्थितियां और तेज हवाएं भी कुछ इलाकों में परेशानी बढ़ा सकती हैं। हालांकि, किसी खास जिले में कितनी वर्षा होगी, इसका सटीक अनुमान स्थानीय मौसम तंत्र और आने वाले दिनों के पूर्वानुमान पर निर्भर करेगा।

12 सितंबर से बदल सकता है मौसम का मिजाज

मौसम संबंधी संकेत बताते हैं कि सितंबर के दूसरे हिस्से में वातावरण में नमी बढ़ने और मौसमी प्रणालियों के प्रभाव से कई क्षेत्रों में वर्षा गतिविधियां दोबारा जोर पकड़ सकती हैं। 12 सितंबर के आसपास इसका असर कुछ इलाकों में दिखाई देना शुरू हो सकता है।

इसके बाद 12 से 21 सितंबर के बीच मध्य भारत से लेकर दक्षिणी और पूर्वी हिस्सों तक अलग-अलग स्थानों पर बारिश का दौर देखने को मिल सकता है। पश्चिमी भारत के भी कुछ क्षेत्रों में बादल सक्रिय रहने और वर्षा होने के आसार बन सकते हैं।

मध्य भारत में बढ़ सकती है बारिश की गतिविधि

मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में इस दौरान बादलों की आवाजाही बढ़ सकती है। स्थानीय मौसम परिस्थितियां अनुकूल रहने पर कुछ जिलों में तेज बौछारें देखने को मिल सकती हैं।

किसानों के लिए इस अवधि में मौसम विभाग के स्थानीय पूर्वानुमान पर नजर रखना जरूरी होगा, खासकर उन क्षेत्रों में जहां खरीफ फसलों की कटाई या अन्य कृषि गतिविधियां चल रही हैं।

दक्षिणी राज्यों में भी बन सकते हैं बारिश के हालात

दक्षिण भारत के कई हिस्सों में सितंबर के दूसरे पखवाड़े के दौरान नमी और मौसमी सिस्टम के कारण वर्षा गतिविधियों में वृद्धि संभव है। तटीय क्षेत्रों तथा आसपास के इलाकों में कहीं-कहीं भारी बौछारें भी देखने को मिल सकती हैं।

बारिश के साथ तेज हवाएं और बिजली चमकने की घटनाएं भी कुछ स्थानों पर हो सकती हैं। ऐसे में खुले इलाकों में रहने वाले लोगों को मौसम संबंधी चेतावनियों पर ध्यान देने की सलाह दी जाती है।

पूर्वी और पश्चिमी भारत में भी असर की संभावना

पूर्वी भारत के कुछ राज्यों में भी बादल छाए रहने के साथ रुक-रुककर वर्षा होने की संभावना बन सकती है। बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी और स्थानीय मौसमी परिस्थितियां इसमें भूमिका निभा सकती हैं।

वहीं, पश्चिमी भारत के कुछ हिस्सों में भी सितंबर के मध्य के बाद वर्षा गतिविधियां बढ़ सकती हैं।

हालांकि, क्षेत्रवार स्थिति अलग-अलग रह सकती है और

किसी स्थान पर अधिक तो दूसरे इलाके में सामान्य बारिश देखने को मिल सकती है।

गरज-चमक और तेज हवाएं बढ़ा सकती हैं परेशानी

इस संभावित सक्रिय दौर के दौरान सिर्फ पानी ही नहीं, बल्कि गरज-चमक और तेज

हवाओं का प्रभाव भी देखने को मिल सकता है। दोपहर के बाद बनने वाले

संवहनीय बादलों के कारण कुछ इलाकों में अचानक तेज बौछारें पड़ सकती हैं।

बिजली चमकने के दौरान लोगों को खुले मैदान, पेड़ के नीचे और

बिजली के खंभों के आसपास खड़े होने से बचना चाहिए।

मॉनसून की विदाई से पहले क्यों महत्वपूर्ण है यह दौर?

सितंबर के मध्य के बाद देश के कई हिस्सों में मौसमी गतिविधियां

धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगती हैं। ऐसे समय में बारिश का दोबारा सक्रिय होना

स्थानीय तापमान, उमस और कृषि गतिविधियों पर असर डाल सकता है।

हालांकि, मॉनसून की विदाई की आधिकारिक घोषणा और किसी क्षेत्र से इसकी वापसी

अलग-अलग मौसम परिस्थितियों पर निर्भर करती है।

इसलिए 12 से 21 सितंबर के बीच संभावित वर्षा को सीधे तौर पर पूरे

देश से मॉनसून की विदाई रुकने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

आगे के दिनों में तस्वीर होगी और साफ

फिलहाल 12 से 21 सितंबर के बीच वर्षा गतिविधियों में बढ़ोतरी के संकेत वेदर मॉडल में दिखाई दे रहे हैं।

लेकिन मौसम प्रणालियां लगातार बदलती रहती हैं,

इसलिए अगले कुछ दिनों में पूर्वानुमान में बदलाव संभव है।

ऐसे में लोगों को अपने क्षेत्र के लिए जारी होने वाले ताजा स्थानीय पूर्वानुमान और

चेतावनियों पर नजर रखनी चाहिए। खासकर तेज बारिश,

आकाशीय बिजली और हवाओं की स्थिति में सावधानी बरतना जरूरी होगा।

read this post :BRICS Summit 2026: शी जिनपिंग की भारत यात्रा से बदलेगा माहौल? मोदी से मुलाकात पर दुनिया की नजर, दिल्ली में हाई अलर्ट