प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार, 9 सितंबर 2026 को हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक में रेलवे नेटवर्क को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। सरकार ने देश के प्रमुख हाई डेंसिटी रेल कॉरिडोर को चार-ट्रैक क्षमता वाला बनाने से जुड़े सात महत्वपूर्ण प्रोजेक्टों को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य व्यस्त रेल मार्गों पर ट्रेनों की बढ़ती संख्या को संभालना, यातायात की क्षमता बढ़ाना और यात्रियों के साथ-साथ माल परिवहन को अधिक सुचारु बनाना है।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि सरकार लंबे समय से रेलवे के ऐसे रूटों को मजबूत करने पर काम कर रही है, जहां यात्री और मालगाड़ियों का दबाव काफी अधिक है। सात हाई डेंसिटी कॉरिडोर को चार-ट्रैक क्षमता से जोड़ने का फैसला इसी व्यापक आधुनिकीकरण योजना का हिस्सा है।
किन प्रमुख रेल रूटों को मिलेगा फायदा?
कैबिनेट के फैसले में देश के कई बेहद महत्वपूर्ण रेल कॉरिडोर शामिल हैं। इनमें कोलकाता-दिल्ली, चेन्नई-कोलकाता, दिल्ली-मुंबई, मुंबई-चेन्नई और बिलासपुर-कटनी जैसे प्रमुख मार्ग शामिल हैं। इसके अलावा मुंबई-हावड़ा हाई डेंसिटी नेटवर्क के खड़गपुर-झारसुगुड़ा हिस्से में चौथी रेल लाइन और अरक्कोनम-रेनिगुंटा सेक्शन में तीसरी और चौथी लाइन से जुड़े काम को भी मंजूरी दी गई है।
इन परियोजनाओं के जरिए ऐसे रेल मार्गों की क्षमता बढ़ाने पर जोर है, जहां पहले से ही ट्रेनों का परिचालन काफी व्यस्त है। अतिरिक्त ट्रैक उपलब्ध होने से भविष्य में नई ट्रेन सेवाएं शुरू करने और मौजूदा सेवाओं की संख्या बढ़ाने की गुंजाइश भी बन सकती है।
बिलासपुर-कटनी रेल रूट पर भी बड़ा काम
कैबिनेट के फैसले का छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के लिहाज से भी विशेष महत्व है। बिलासपुर-कटनी रेल सेक्शन को चार-ट्रैक क्षमता से जोड़ने की योजना बनाई गई है।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के मुताबिक, इस क्षेत्र के कुछ हिस्सों में पहले से ही तीन रेल लाइनें हैं, जबकि कुछ स्थानों पर दोहरी लाइन मौजूद है। ऐसे में पूरे बिलासपुर-कटनी सेक्शन को चार लाइन की क्षमता से जोड़ने की दिशा में काम किया जाएगा। इससे इस महत्वपूर्ण रेल मार्ग पर ट्रेनों के संचालन की क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
यह इलाका खनिज और ऊर्जा संसाधनों की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। इसलिए इस रेल कॉरिडोर की क्षमता बढ़ने से यात्री ट्रेनों के अलावा माल परिवहन को भी लाभ मिलने की संभावना है।
खड़गपुर-झारसुगुड़ा के बीच चौथी लाइन को मंजूरी
मुंबई-हावड़ा हाई डेंसिटी नेटवर्क के अंतर्गत खड़गपुर से झारसुगुड़ा के बीच चौथी रेल लाइन बिछाने की परियोजना को भी मंजूरी मिली है। इसकी लंबाई करीब 367 किलोमीटर बताई गई है और परियोजना पर लगभग 6,528 करोड़ रुपये खर्च होने की जानकारी सामने आई है।
यह सेक्शन पूर्वी भारत के महत्वपूर्ण औद्योगिक और माल परिवहन नेटवर्क का हिस्सा है। अतिरिक्त रेल लाइन बनने से इस रूट पर ट्रेनों को संचालित करने के लिए अधिक क्षमता उपलब्ध होगी।
अरक्कोनम-रेनिगुंटा सेक्शन भी होगा मजबूत
दक्षिण भारत में भी रेलवे क्षमता बढ़ाने का काम किया जाएगा। अरक्कोनम से रेनिगुंटा के बीच तीसरी और चौथी रेल लाइन से जुड़ी परियोजना को मंजूरी दी गई है।
इस सेक्शन की लंबाई करीब 77 किलोमीटर बताई गई है, जबकि इस पर लगभग 1,936 करोड़ रुपये खर्च किए जाने की जानकारी सामने आई है।
यह रूट दक्षिण भारत के प्रमुख रेल नेटवर्क का हिस्सा है। अतिरिक्त ट्रैक उपलब्ध होने से इस मार्ग पर रेल यातायात को अधिक व्यवस्थित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
चार ट्रैक क्यों जरूरी हैं?
भारत में रेल यात्रियों की संख्या के साथ माल परिवहन की मांग भी लगातार बढ़ रही है। ऐसे में कुछ प्रमुख रेल मार्गों पर मौजूदा ट्रैक क्षमता पर दबाव बढ़ता है। जब एक ही रेल कॉरिडोर पर यात्री ट्रेन, एक्सप्रेस, सुपरफास्ट और मालगाड़ियां चलती हैं, तो ट्रेनों के संचालन के बीच समय और ट्रैक क्षमता का संतुलन बनाए रखना जरूरी होता है।
अतिरिक्त ट्रैक बनने से अलग-अलग प्रकार की ट्रेनों को संचालित करने के लिए ज्यादा विकल्प उपलब्ध होते हैं। इससे रेलवे को भविष्य में नई सेवाओं की योजना बनाने और
मालगाड़ियों की आवाजाही को अधिक प्रभावी ढंग से व्यवस्थित करने में मदद मिल सकती है।
यात्रियों को क्या फायदा होगा?
रेलवे के हाई डेंसिटी कॉरिडोर को मजबूत करने का सीधा असर यात्रियों पर भी पड़ सकता है।
क्षमता बढ़ने के बाद व्यस्त रूटों पर ट्रेन संचालन को अधिक व्यवस्थित करने की संभावना बढ़ेगी।
भविष्य में मांग के अनुसार अतिरिक्त ट्रेन सेवाओं की योजना बनाई जा सकती है।
इसके अलावा किसी एक ट्रेन के कारण दूसरे ट्रेनों को लंबे समय तक रोकने जैसी परिचालन संबंधी
समस्याओं को कम करने में भी अतिरिक्त ट्रैक मददगार हो सकते हैं।
हालांकि, नई ट्रेन सेवाएं शुरू होना या यात्रा का समय कम होना
परियोजनाओं के पूरा होने और रेलवे के परिचालन फैसलों पर निर्भर करेगा।
मालगाड़ियों के लिए भी महत्वपूर्ण फैसला
रेलवे के इन प्रोजेक्टों का एक बड़ा उद्देश्य फ्रेट मूवमेंट को बेहतर बनाना भी है।
भारत के औद्योगिक और खनिज क्षेत्रों को देश के बड़े
बाजारों और बंदरगाहों से जोड़ने में रेल नेटवर्क की महत्वपूर्ण भूमिका है।
अधिक ट्रैक उपलब्ध होने से मालगाड़ियों के लिए परिचालन क्षमता बढ़ सकती है।
इससे कोयला, लौह अयस्क, सीमेंट, खाद्यान्न और अन्य औद्योगिक
सामान की आवाजाही को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलने की संभावना है।
सरकार का जोर ऐसे रेल कॉरिडोर पर क्षमता बढ़ाने का है,
जहां आने वाले वर्षों में यातायात और माल ढुलाई का दबाव और बढ़ने की उम्मीद है।
रेलवे आधुनिकीकरण की बड़ी योजना का हिस्सा
केंद्र सरकार पिछले कुछ वर्षों से रेलवे के बुनियादी ढांचे में बड़े स्तर पर निवेश कर रही है।
मल्टी-ट्रैकिंग, विद्युतीकरण, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और
हाई-स्पीड रेल जैसी परियोजनाओं के जरिए नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
हाल ही में देश का 2,843 किलोमीटर लंबा डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर नेटवर्क पूरी
तरह परिचालन में आने की जानकारी भी सामने आई है।
इसके बाद माल परिवहन के लिए रेलवे की क्षमता में महत्वपूर्ण विस्तार हुआ है।
ऐसे में सात हाई डेंसिटी रेल कॉरिडोर को चार-ट्रैक क्षमता से जोड़ने का
फैसला इसी बड़े रेलवे आधुनिकीकरण अभियान की अगली कड़ी माना जा सकता है।
कई राज्यों को मिलेगा फायदा
इन परियोजनाओं का असर देश के अलग-अलग हिस्सों पर पड़ेगा। बिलासपुर-कटनी जैसे रूट से छत्तीसगढ़ और
मध्य प्रदेश को लाभ मिलने की संभावना है, जबकि खड़गपुर-झारसुगुड़ा परियोजना से पश्चिम बंगाल,
ओडिशा और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों की कनेक्टिविटी मजबूत होगी।
दक्षिण भारत में अरक्कोनम-रेनिगुंटा सेक्शन के विस्तार से तमिलनाडु और
आंध्र प्रदेश के रेल नेटवर्क को फायदा मिलेगा। वहीं दिल्ली-मुंबई, मुंबई-चेन्नई, चेन्नई-कोलकाता और
कोलकाता-दिल्ली जैसे बड़े कॉरिडोर देश के प्रमुख आर्थिक केंद्रों को जोड़ते हैं।
निष्कर्ष
मोदी सरकार की कैबिनेट ने रेलवे के सात हाई डेंसिटी कॉरिडोर को चार-ट्रैक क्षमता से
मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। कोलकाता-दिल्ली, चेन्नई-कोलकाता, दिल्ली-मुंबई,
मुंबई-चेन्नई और बिलासपुर-कटनी जैसे व्यस्त रेल मार्ग इस योजना से जुड़े हैं।
खड़गपुर-झारसुगुड़ा के बीच चौथी लाइन और अरक्कोनम-रेनिगुंटा के बीच तीसरी-चौथी लाइन की मंजूरी भी
इस फैसले का अहम हिस्सा है। आने वाले वर्षों में इन परियोजनाओं के पूरा होने से रेलवे की
क्षमता बढ़ने, यात्री ट्रेनों के संचालन को बेहतर बनाने और माल ढुलाई को गति देने में मदद मिल सकती है।
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