उत्तर प्रदेश के मेरठ स्थित शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट का विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। बाजार के ध्वस्तीकरण के विरोध में हुए मेरठ बंद के बाद आंदोलन के लिए जुटाए गए चंदे को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। एक पक्ष की ओर से अधिवक्ता की फीस के नाम पर करीब 1.80 करोड़ रुपये चंदा एकत्र करने और इसके गलत इस्तेमाल का आरोप लगाया गया है। वहीं, संयुक्त मेरठ बचाओ संघर्ष समिति ने इन आरोपों को खारिज करते हुए चंदा जुटाने की प्रक्रिया को पारदर्शी बताया है।
इस मामले ने सोशल मीडिया पर भी तूल पकड़ लिया है। व्यापारी और आंदोलन से जुड़े लोग एक-दूसरे के दावों पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं। विवाद के बीच अब लोगों की नजर आगामी 21 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर भी टिकी है।
1.80 करोड़ रुपये के चंदे का दावा
मेरठ बंद के अगले दिन चंदे की रकम को लेकर सवाल उठाए गए। रिपोर्ट के मुताबिक, नीमा के पूर्व अध्यक्ष और सर्वोदय नर्सिंग होम के मालिक डॉ. नगेंद्र ने दावा किया कि अधिवक्ता की फीस के लिए अब तक करीब 1.80 करोड़ रुपये एकत्र किए जा चुके हैं।
उन्होंने चंदे के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठाए और इसे लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू हो गई। हालांकि, 1.80 करोड़ रुपये के इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि रिपोर्ट में नहीं की गई है।
नर्सिंग होम एसोसिएशन ने 10 लाख रुपये देने की बात कही
डॉ. नगेंद्र के मुताबिक, नर्सिंग होम एसोसिएशन की ओर से करीब 10 लाख रुपये एकत्र कर दिए गए थे। इसके बाद चंदे के हिसाब-किताब को लेकर व्यापारियों और आंदोलन से जुड़े लोगों के बीच बहस तेज हो गई।
मामले ने तब और तूल पकड़ा जब सोशल मीडिया पर अलग-अलग पक्षों की ओर से दावे और जवाब सामने आने लगे।
संघर्ष समिति ने कहा- हिसाब देखने के लिए तैयार
चंदे को लेकर उठे सवालों पर संयुक्त मेरठ बचाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष रविंद्र गुर्जर ने सफाई दी। उनका कहना है कि चंदा एकत्र करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता बरती जा रही है।
उन्होंने आरोप लगाने वाले व्यापारियों से व्यक्तिगत रूप से मिलने और पूरे हिसाब-किताब को देखने का आग्रह किया है। समिति का पक्ष है कि चंदे के संबंध में किसी तरह की गोपनीयता नहीं रखी गई है।
नर्सिंग होम एसोसिएशन ने आरोपों पर किया पलटवार
नर्सिंग होम एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. अंबेश पंवार ने डॉ. नगेंद्र के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्होंने चंदा नहीं दिया है, इसलिए उन्हें रकम का हिसाब मांगने का अधिकार नहीं है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि अधिवक्ता की फीस अभी तक भुगतान नहीं की गई है और संबंधित धनराशि एसोसिएशन के पास ही मौजूद है।
सोशल मीडिया पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर
मेरठ सेंट्रल मार्केट का मामला पहले से ही व्यापारियों और प्रशासन के बीच बड़ा विवाद बना हुआ है। अब चंदे को लेकर उठे सवालों ने आंदोलन के भीतर भी मतभेद सामने ला दिए हैं।
सोशल मीडिया पर एक-दूसरे के खिलाफ बयान और प्रतिक्रियाएं सामने आने के बाद मामला और चर्चा में आ गया है। फिलहाल दोनों पक्षों के दावों के बीच वास्तविक वित्तीय स्थिति का स्पष्ट निष्कर्ष आधिकारिक हिसाब-किताब सामने आने के बाद ही निकाला जा सकेगा।
वायरल वीडियो को लेकर भी बढ़ा विवाद
सेंट्रल मार्केट प्रकरण को लेकर गुरुद्वारा रोड पर हुए प्रदर्शन के दौरान मंच से की गई कथित टिप्पणियों का एक वीडियो भी चर्चा में है।
आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना ने दावा किया है कि वायरल वीडियो में उनके खिलाफ धमकी जैसी टिप्पणी की गई। उन्होंने कहा कि ऐसी बात पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में सार्वजनिक मंच से कही गई।
खुराना ने मामले को अदालत में ले जाने की बात कही है।
21 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
सेंट्रल मार्केट विवाद में अगली महत्वपूर्ण तारीख 21 सितंबर बताई जा रही है। लोकेश खुराना के अनुसार, वह कथित धमकी के मुद्दे को भी सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई के दौरान उठाएंगे।
वहीं, आंदोलन से जुड़े लोगों की चिंता यह है कि अदालत में अगली सुनवाई से
पहले प्रशासनिक स्तर पर कोई ऐसी कार्रवाई न हो जिससे प्रभावित दुकानदारों की परेशानी बढ़े।
EWS और LIG भवन स्वामियों से भी हुई बैठक
इसी बीच आवास एवं विकास परिषद के अधिकारियों ने EWS और LIG भवन स्वामियों के साथ बैठक की।
बैठक में पुनर्वास को लेकर प्रभावित लोगों के विचार जानने की कोशिश की गई।
अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए सेटबैक से
संबंधित नियमों का पालन करने की बात कही। दूसरी ओर आंदोलन से जुड़े लोगों ने
21 सितंबर की सुनवाई तक प्रभावित आवंटियों को राहत देने की मांग की है।
क्या है मेरठ सेंट्रल मार्केट विवाद?
शास्त्रीनगर का सेंट्रल मार्केट लंबे समय से कानूनी और प्रशासनिक विवाद में रहा है।
बाजार के निर्माण और नियमों से जुड़े मामले में व्यापारियों की ओर से लगातार राहत की मांग की जाती रही है।
इससे पहले भी व्यापारियों ने बाजार को लेकर कार्रवाई और अधिकारियों की
भूमिका पर सवाल उठाए हैं। अब सुप्रीम कोर्ट में मामला
लंबित होने के साथ आंदोलन और प्रशासन के बीच टकराव जारी है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल चंदे को लेकर सामने आए आरोपों का केंद्र 1.80 करोड़ रुपये की
कथित वसूली और उसके इस्तेमाल पर है। एक पक्ष पारदर्शिता की मांग कर रहा है,
जबकि समिति का कहना है कि पूरा हिसाब देखने के लिए उपलब्ध है।
ऐसे में आगे की स्थिति चंदे के वास्तविक रिकॉर्ड, संबंधित पक्षों की सफाई और
21 सितंबर को होने वाली सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से स्पष्ट हो सकती है।
निष्कर्ष
मेरठ सेंट्रल मार्केट का विवाद अब सिर्फ ध्वस्तीकरण और पुनर्वास तक सीमित नहीं रहा है।
चंदे के हिसाब को लेकर 1.80 करोड़ रुपये के आरोप, समिति की सफाई और कथित
धमकी वाले वायरल वीडियो ने मामले को नया मोड़ दे दिया है। फिलहाल आरोपों की
स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और दोनों पक्ष अपने-अपने दावे कर रहे हैं। आने वाले दिनों में सुप्रीम
कोर्ट की सुनवाई और संबंधित रिकॉर्ड इस पूरे विवाद की दिशा तय करने में अहम हो सकते हैं।
FAQ: Meerut Central Market News
1. मेरठ सेंट्रल मार्केट में नया विवाद किस बात को लेकर है?
मेरठ बंद के बाद आंदोलन के लिए जुटाए गए चंदे के हिसाब-किताब को लेकर विवाद सामने आया है।
2. कितने रुपये चंदा जुटाने का आरोप लगाया गया है?
डॉ. नगेंद्र की ओर से करीब 1.80 करोड़ रुपये चंदा जुटाने का दावा किया गया है।
इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि रिपोर्ट में नहीं की गई है।
3. चंदे को लेकर समिति का क्या कहना है?
संयुक्त मेरठ बचाओ संघर्ष समिति ने चंदा जुटाने की प्रक्रिया को
पारदर्शी बताया है और पूरा हिसाब देखने के लिए आमंत्रित किया है।
4. नर्सिंग होम एसोसिएशन ने कितनी राशि देने की बात कही?
डॉ. नगेंद्र के अनुसार नर्सिंग होम एसोसिएशन की ओर से 10 लाख रुपये एकत्र कर दिए गए थे।
5. सुप्रीम कोर्ट में मेरठ सेंट्रल मार्केट मामले की सुनवाई कब है?
रिपोर्ट के मुताबिक अगली सुनवाई 21 सितंबर 2026 को होनी है।
6. क्या चंदे की रकम के गलत इस्तेमाल की पुष्टि हुई है?
नहीं। फिलहाल यह आरोप-प्रत्यारोप का विषय है। समिति ने
प्रक्रिया को पारदर्शी बताया है और हिसाब देखने की पेशकश की है।
Fisherman World News के बेल आइकन को दबाएं और “All/सभी” नोटिफिकेशन चुनें,
ताकि मेरठ, उत्तर प्रदेश और देश-दुनिया की हर बड़ी खबर सबसे पहले आप तक पहुंच सके।
read this post :Mohan Bhagwat New York: मोहन भागवत के कार्यक्रम में पहुंचने पर धार्मिक नेताओं ने जताया अफसोस, बोले- हमें पूरी जानकारी नहीं दी गई