प्रयागराज। नोएडा-ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में अप्रैल 2026 में हुए श्रमिक आंदोलन से जुड़े मामले में दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा और सामाजिक कार्यकर्ता आकृति चौधरी को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने उनके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत की गई निरुद्धि की कार्रवाई को रद्द कर दिया है। साथ ही कोर्ट ने उन्हें 5 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। यह राशि गौतमबुद्ध नगर के जिलाधिकारी से वसूल किए जाने का निर्देश दिया गया है।
हाईकोर्ट ने NSA की कार्रवाई क्यों रद्द की?
आकृति चौधरी के खिलाफ नोएडा में हुए श्रमिक आंदोलन के दौरान मजदूरों को कथित तौर पर भड़काने के आरोप लगाए गए थे। पुलिस का दावा था कि 13 अप्रैल को श्रमिक आंदोलन के दौरान उनके कथित हस्तक्षेप के बाद हिंसा और आगजनी की घटनाएं हुईं और सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित हुई।
इसके बाद उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमे दर्ज किए गए और राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत भी निरुद्धि की कार्रवाई की गई। आकृति ने इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल की थी।
कोर्ट ने मांगे थे वीडियो और व्हाट्सएप चैट से जुड़े साक्ष्य
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने सरकार से यह जानना चाहा था कि आकृति चौधरी के खिलाफ कार्रवाई से पहले शांतिभंग की आशंका को लेकर कोई नोटिस जारी किया गया था या नहीं।
अदालत ने उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों से संबंधित वीडियो और व्हाट्सएप चैट समेत अन्य सामग्री भी देखी। बुधवार को उपलब्ध दस्तावेजों और साक्ष्यों की समीक्षा के बाद अदालत ने पाया कि NSA के तहत निरुद्धि को सही ठहराने के लिए पर्याप्त ठोस आधार प्रस्तुत नहीं किया जा सका। इसके बाद कोर्ट ने डिटेंशन ऑर्डर निरस्त कर दिया।
पांच लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केवल NSA की कार्रवाई रद्द करने तक मामला सीमित नहीं रखा, बल्कि आकृति चौधरी को 5 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश दिया है। अदालत के निर्देश के अनुसार यह राशि गौतमबुद्ध नगर के जिलाधिकारी से वसूल की जाएगी।
अन्य रिपोर्टों के मुताबिक, अदालत ने निरुद्धि के लिए प्रस्तुत सामग्री और आकृति की कथित भूमिका के बीच पर्याप्त आधार को लेकर सवाल उठाए थे। कोर्ट ने उनकी रिहाई का निर्देश भी दिया है, बशर्ते किसी अन्य मामले में उनकी हिरासत आवश्यक न हो।
क्या था नोएडा श्रमिक आंदोलन का मामला?
नोएडा और ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में अप्रैल 2026 में श्रमिकों से जुड़ा आंदोलन हुआ था। आंदोलन के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी और हिंसा तथा आगजनी के मामले सामने आए थे। इसी घटनाक्रम की जांच के दौरान कई लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए।
आकृति चौधरी पर पुलिस की ओर से आंदोलन के दौरान मजदूरों को कथित रूप से उकसाने का आरोप लगाया गया था। हालांकि, उन्होंने इन आरोपों का विरोध किया और हाईकोर्ट में अपनी निरुद्धि को चुनौती दी।
हाईकोर्ट के फैसले से क्या संदेश?
इस फैसले ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून जैसे कठोर कानून के इस्तेमाल और उसके लिए
आवश्यक कानूनी आधार को लेकर महत्वपूर्ण सवाल सामने रखे हैं।
अदालत ने उपलब्ध सामग्री की जांच के बाद यह माना कि आकृति चौधरी की
NSA निरुद्धि को बनाए रखने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद नहीं था।
फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश के बाद आकृति चौधरी को इस मामले में बड़ी कानूनी राहत मिली है।
हालांकि, यदि किसी अन्य मामले में
उनकी हिरासत आवश्यक हो तो उस संबंध में स्थिति अलग हो सकती है।
FAQ: नोएडा श्रमिक आंदोलन और आकृति चौधरी मामले से जुड़े सवाल
1. आकृति चौधरी कौन हैं?
आकृति चौधरी दिल्ली विश्वविद्यालय से जुड़ी छात्रा और सामाजिक कार्यकर्ता हैं।
नोएडा श्रमिक आंदोलन से जुड़े मामले में उनके खिलाफ NSA के तहत कार्रवाई की गई थी।
2. आकृति चौधरी के खिलाफ NSA की कार्रवाई क्यों की गई थी?
पुलिस का आरोप था कि 13 अप्रैल को नोएडा में हुए श्रमिक आंदोलन के दौरान उन्होंने मजदूरों को
भड़काने का प्रयास किया, जिसके बाद हिंसा और आगजनी हुई तथा सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित हुई।
3. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने क्या फैसला सुनाया?
हाईकोर्ट ने आकृति चौधरी के खिलाफ NSA के तहत की गई निरुद्धि की कार्रवाई को रद्द कर दिया।
4. आकृति चौधरी को कितना मुआवजा मिलेगा?
अदालत ने उन्हें 5 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है।
यह राशि गौतमबुद्ध नगर के जिलाधिकारी से वसूल करने का निर्देश दिया गया है।
5. क्या कोर्ट ने आकृति चौधरी को रिहा करने का आदेश दिया?
उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, कोर्ट ने उनकी रिहाई का निर्देश दिया है,
हालांकि किसी अन्य मामले में उनकी हिरासत आवश्यक होने पर स्थिति अलग हो सकती है।
6. हाईकोर्ट ने NSA की कार्रवाई क्यों रद्द की?
सुनवाई के दौरान उपलब्ध सामग्री की जांच के बाद अदालत के सामने NSA के तहत
निरुद्धि को उचित ठहराने के लिए पर्याप्त ठोस आधार प्रस्तुत नहीं किया जा सका।
इसी के बाद डिटेंशन ऑर्डर निरस्त किया गया।
7. क्या श्रमिक आंदोलन के दौरान हिंसा हुई थी?
रिपोर्ट के अनुसार, 13 अप्रैल के श्रमिक आंदोलन के दौरान हिंसा और आगजनी की घटनाएं हुई थीं।
इसी घटनाक्रम से जुड़े मामलों में कई लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी।
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