अयोध्या। अयोध्या में भव्य राम मंदिर के संचालन और प्रशासन को लेकर एक अहम कदम आगे बढ़ा है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पहले पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के चयन की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। CEO के चयन के लिए बनाई गई तीन सदस्यीय सर्च कमेटी ने अपनी रिपोर्ट ट्रस्ट को सौंप दी है। कमेटी ने लंबी चयन प्रक्रिया के बाद तीन योग्य उम्मीदवारों के नाम का पैनल तैयार किया है।
अब इन तीन नामों में से किसे राम मंदिर का पहला पूर्णकालिक CEO बनाया जाएगा, इसका निर्णय ट्रस्ट करेगा। इसके लिए 2 सितंबर को होने वाली महत्वपूर्ण बैठक पर सभी की नजरें टिकी हैं।
5585 आवेदनों से शुरू हुई थी चयन प्रक्रिया
राम मंदिर के बढ़ते प्रशासनिक दायरे को देखते हुए पूर्णकालिक CEO की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की गई थी। इस पद के लिए बड़ी संख्या में लोगों ने आवेदन किया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार कुल 5,585 आवेदन प्राप्त हुए थे।
इतनी बड़ी संख्या में आए आवेदनों की छंटनी के लिए पात्रता, अनुभव और अन्य जरूरी मानकों को शामिल करते हुए मूल्यांकन प्रक्रिया तैयार की गई। आवेदन करने वाले उम्मीदवारों में से 3,577 लोगों ने निर्धारित मूल्यांकन प्रक्रिया में हिस्सा लिया।
इसके बाद प्राप्त अंकों के आधार पर उम्मीदवारों को अगले चरण के लिए चुना गया। 470 या उससे अधिक अंक पाने वाले 108 उम्मीदवारों को आगे की प्रक्रिया में शामिल किया गया। इन उम्मीदवारों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बातचीत की गई।
16 उम्मीदवारों का हुआ आमने-सामने इंटरव्यू
ऑनलाइन चरण के बाद चयन प्रक्रिया और आगे बढ़ी। कुल 17 उम्मीदवारों को अंतिम दौर के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया और उन्हें अयोध्या बुलाया गया। इनमें से एक उम्मीदवार व्यक्तिगत कारणों के चलते शामिल नहीं हो सका।
इसके बाद 16 उम्मीदवारों का दो दिनों तक आमने-सामने इंटरव्यू किया गया। चयन समिति ने उम्मीदवारों के अनुभव, कार्यक्षमता, भविष्य की सोच और संबंधित विषयों की समझ सहित कई पहलुओं का मूल्यांकन किया।
इसी विस्तृत प्रक्रिया के बाद समिति ने तीन उम्मीदवारों को सबसे उपयुक्त मानते हुए उनका पैनल तैयार किया। यह पैनल अब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सामने है।
तीन सदस्यीय कमेटी ने तैयार की रिपोर्ट
CEO चयन के लिए गठित सर्च कमेटी में सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली अध्यक्ष हैं। उनके साथ सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल विष्णु कांत चतुर्वेदी और पूर्व वैज्ञानिक सुरेश हावड़े समिति के सदस्य हैं।
कमेटी ने अपनी जिम्मेदारी पूरी करते हुए मंगलवार को अंतिम रिपोर्ट ट्रस्ट को सौंप दी। राम मंदिर परिसर में हुई बैठक के बाद कमेटी के अध्यक्ष ने ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देवगिरी महाराज को रिपोर्ट सौंपी।
अंतिम फैसला अब ट्रस्ट के हाथ में
सर्च कमेटी का काम उम्मीदवारों की पहचान और मूल्यांकन करके योग्य नामों की सिफारिश करना था। अब अंतिम निर्णय श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के न्यास मंडल को करना है।
2 सितंबर को प्रस्तावित बैठक में सर्च कमेटी की रिपोर्ट पर चर्चा होने की संभावना है। ट्रस्ट के सदस्यों की सहमति बनने पर इसी बैठक में राम मंदिर के पहले पूर्णकालिक CEO के नाम की घोषणा भी हो सकती है। हालांकि अंतिम घोषणा ट्रस्ट के निर्णय पर निर्भर करेगी।
क्यों जरूरी है राम मंदिर के लिए पूर्णकालिक CEO?
राम मंदिर के निर्माण और विस्तार के साथ यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या भी महत्वपूर्ण स्तर पर पहुंच चुकी है। ऐसे में मंदिर का प्रबंधन केवल धार्मिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है।
श्रद्धालुओं की सुविधाएं, सुरक्षा व्यवस्था, परिसर का संचालन, निर्माण एवं विस्तार से जुड़े कार्य, वित्तीय प्रबंधन और रोजमर्रा की प्रशासनिक गतिविधियों को व्यवस्थित तरीके से संचालित करने के लिए पेशेवर प्रबंधन की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
पूर्णकालिक CEO इन व्यवस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। ट्रस्ट की ओर से भी मंदिर के बेहतर और व्यवस्थित संचालन के लिए सक्षम CEO की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
ट्रस्ट की बैठक में कई अहम फैसले संभव
2 सितंबर की बैठक केवल CEO चयन के लिहाज से ही महत्वपूर्ण नहीं मानी जा रही है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार ट्रस्ट में अन्य पदों से जुड़े फैसले भी इस बैठक के दौरान हो सकते हैं। इसलिए अयोध्या में होने वाली इस बैठक को ट्रस्ट की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
CEO पद को लेकर लंबे समय से चल रही चयन प्रक्रिया अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है।
हजारों आवेदनों से शुरू हुई यह प्रक्रिया कई चरणों से गुजरने के बाद तीन नामों तक पहुंची है।
अब इन तीन उम्मीदवारों में से किसी एक के नाम पर ट्रस्ट की मुहर लगना बाकी है।
जुलाई से सितंबर तक चला चयन का पूरा सफर
CEO चयन प्रक्रिया को कई चरणों में पूरा किया गया। 6 जुलाई 2026 को चयन समिति का गठन हुआ।
इसके बाद 11 जुलाई को समिति की
पहली बैठक में पात्रता और चयन प्रक्रिया से जुड़े मानक तय किए गए।
14 जुलाई को समिति के सचिव की नियुक्ति की गई और 18 जुलाई को आवेदन प्रक्रिया बंद हुई।
इसके बाद आवेदनों की स्क्रीनिंग और मूल्यांकन किया गया।
3 से 6 अगस्त के बीच ऑनलाइन संवाद की प्रक्रिया हुई। इसके बाद 11 और
12 अगस्त को अंतिम चरण के लिए चुने गए उम्मीदवारों से अयोध्या में आमने-सामने बातचीत की गई।
आखिरकार 1 सितंबर को सर्च कमेटी ने तीन नामों का अंतिम पैनल ट्रस्ट को सौंप दिया।
अब सभी की नजर 2 सितंबर की बैठक पर
राम मंदिर के पहले पूर्णकालिक CEO की नियुक्ति को लेकर अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि
तीन नामों में से ट्रस्ट किस उम्मीदवार को जिम्मेदारी सौंपता है।
चयन समिति ने अपनी भूमिका पूरी कर दी है और अब निर्णय की जिम्मेदारी न्यास मंडल की है।
अगर बैठक में सहमति बनती है तो राम मंदिर प्रशासन को उसका पहला पूर्णकालिक
CEO मिल सकता है। इससे मंदिर के प्रशासनिक ढांचे को और
अधिक व्यवस्थित एवं पेशेवर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जाएगा।
राम मंदिर CEO चयन की मुख्य बातें
- CEO पद के लिए 5,585 आवेदन प्राप्त हुए।
- 3,577 उम्मीदवारों ने मूल्यांकन प्रक्रिया में हिस्सा लिया।
- 108 उम्मीदवार अगले चरण के लिए चुने गए।
- बाद में 17 उम्मीदवारों को अंतिम दौर के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया।
- 16 उम्मीदवारों का अयोध्या में आमने-सामने इंटरव्यू हुआ।
- चयन समिति ने तीन उम्मीदवारों का अंतिम पैनल तैयार किया।
- 1 सितंबर को रिपोर्ट ट्रस्ट को सौंप दी गई।
- 2 सितंबर की बैठक में अंतिम निर्णय होने की संभावना है।
- अंतिम फैसला श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट करेगा।
FAQ: राम मंदिर के पहले CEO से जुड़े सवाल
1. राम मंदिर के CEO चयन की प्रक्रिया कहां तक पहुंची है?
CEO के चयन की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। सर्च कमेटी ने तीन उम्मीदवारों का पैनल ट्रस्ट को सौंप दिया है।
2. CEO पद के लिए कितने आवेदन आए थे?
इस पद के लिए कुल 5,585 आवेदन प्राप्त हुए थे।
3. कितने उम्मीदवार अंतिम इंटरव्यू तक पहुंचे?
अंतिम चरण में 17 उम्मीदवार शॉर्टलिस्ट हुए थे, जिनमें से 16 उम्मीदवारों का अयोध्या में प्रत्यक्ष इंटरव्यू हुआ।
4. राम मंदिर CEO के नाम का अंतिम फैसला कौन करेगा?
सर्च कमेटी ने तीन नामों की सिफारिश की है, लेकिन अंतिम फैसला
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का न्यास मंडल करेगा।
5. CEO के नाम की घोषणा कब हो सकती है?
2 सितंबर को प्रस्तावित ट्रस्ट की बैठक में अंतिम नाम पर फैसला होने की संभावना है।
हालांकि आधिकारिक घोषणा ट्रस्ट के निर्णय के बाद ही मानी जाएगी।
6. CEO पद इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
राम मंदिर में बढ़ती श्रद्धालु संख्या, सुरक्षा, सुविधाओं, वित्तीय व्यवस्था, निर्माण और रोजमर्रा के
प्रशासन को बेहतर ढंग से संचालित करने के लिए पूर्णकालिक CEO महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
7. CEO चयन कमेटी में कौन-कौन शामिल थे?
सर्च कमेटी की अध्यक्षता सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली ने की।
उनके साथ रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल विष्णु कांत चतुर्वेदी और पूर्व वैज्ञानिक सुरेश हावड़े शामिल थे।
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