69000 Teacher Recruitment: आरक्षण के मुद्दे पर फिर भड़का आंदोलन, शिक्षा मंत्री के आवास के बाहर भूख हड़ताल पर बैठे अभ्यर्थी

उत्तर प्रदेश में 69,000 शिक्षक भर्ती का विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। आरक्षण से जुड़े मामले को लेकर लंबे समय से आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों ने शनिवार को राजधानी लखनऊ में फिर मोर्चा खोल दिया। बड़ी संख्या में अभ्यर्थी बेसिक शिक्षा मंत्री के आवास के सामने पहुंचे और अपनी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू किया। कुछ अभ्यर्थी भूख हड़ताल पर भी बैठ गए हैं।

अभ्यर्थियों का कहना है कि 69,000 शिक्षक भर्ती मामले में उनका संघर्ष कई वर्षों से जारी है। उनका आरोप है कि जिन अभ्यर्थियों के लिए चार साल पहले चयन सूची जारी की गई थी, उनकी नियुक्ति का मामला अब तक लंबित है। आंदोलनकारियों ने सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप करने और उन्हें न्याय दिलाने की मांग की है।

आरक्षण को लेकर फिर शुरू हुआ आंदोलन

69,000 शिक्षक भर्ती में आरक्षण से जुड़ा विवाद नया नहीं है। इस मामले को लेकर अभ्यर्थी पहले भी कई बार प्रदर्शन कर चुके हैं। शनिवार को आंदोलन दोबारा शुरू करते हुए प्रदर्शनकारियों ने ‘आरक्षण दो, न्याय दो’ जैसे नारों के साथ अपनी मांगें उठाईं।

अभ्यर्थियों का कहना है कि उनकी समस्या केवल नौकरी मिलने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आरक्षण और चयन प्रक्रिया में कथित विसंगतियों से भी जुड़ी हुई है। उनका कहना है कि कई वर्षों से मामला लंबित होने के कारण अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हो रहा है।

सुप्रीम कोर्ट में 8 सितंबर को सुनवाई

आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों के मुताबिक 69,000 शिक्षक भर्ती से संबंधित मामले की अगली सुनवाई 8 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में होनी है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार की ओर से उन अभ्यर्थियों का पक्ष पर्याप्त तरीके से नहीं रखा जा रहा, जिनके लिए चयन सूची पहले ही जारी की जा चुकी है।

अभ्यर्थियों का कहना है कि सुनवाई की तारीख नजदीक होने के कारण उन्होंने सरकार पर दबाव बनाने के लिए आंदोलन फिर शुरू किया है। उनका उद्देश्य यह है कि संबंधित विभाग अदालत के समक्ष उनके पक्ष और नियुक्ति से जुड़े तथ्यों को मजबूती से रखे।

6800 अभ्यर्थियों की नियुक्ति का मुद्दा

आंदोलन का सबसे प्रमुख मुद्दा करीब 6,800 ओबीसी और दलित अभ्यर्थियों की नियुक्ति से जुड़ा है। प्रदर्शनकारियों के अनुसार इन अभ्यर्थियों के लिए चयन सूची पहले ही जारी की जा चुकी थी, लेकिन नियुक्ति पत्र नहीं मिल सके हैं।

अयोध्या से आंदोलन में शामिल हुईं अभ्यर्थी अर्चना शर्मा के अनुसार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर अभ्यर्थियों ने अपनी समस्या रखी थी। इसके बाद 5 जनवरी 2022 को 6,800 अभ्यर्थियों की सूची जारी की गई, लेकिन इसके बावजूद नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।

अभ्यर्थियों का कहना है कि सूची जारी होने के बाद भी वर्षों तक नियुक्ति नहीं मिलने से उनके सामने आर्थिक और मानसिक परेशानियां बढ़ती गई हैं।

‘चार साल से जारी सूची पर नहीं हो रही पैरवी’

आंदोलन में शामिल अभ्यर्थी आशुतोष पटेल ने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान उनकी उस सूची को लेकर बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से पर्याप्त पैरवी नहीं की जा रही, जो करीब चार साल पहले जारी हुई थी। उनका कहना है कि इस स्थिति के कारण अभ्यर्थियों का भविष्य अनिश्चित हो गया है।

अभ्यर्थियों का तर्क है कि जब चयन सूची जारी की जा चुकी है तो नियुक्ति का रास्ता साफ करने के लिए सरकार को प्रभावी कदम उठाने चाहिए। इसी मांग को लेकर वे शिक्षा विभाग और सरकार के सामने अपनी बात रख रहे हैं।

शिक्षा मंत्री के आवास के बाहर भूख हड़ताल

प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर बेसिक शिक्षा मंत्री के आवास के सामने धरना शुरू किया।

आंदोलन के दौरान कुछ अभ्यर्थी भूख हड़ताल पर बैठ गए।

अभ्यर्थियों ने संकेत दिया है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सुनवाई नहीं हुई तो

आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। आंदोलनकारी चाहते हैं कि सरकार उनके प्रतिनिधिमंडल की

मुख्यमंत्री से मुलाकात कराए और नियुक्ति से जुड़े मामले पर स्पष्ट कार्रवाई करे।

मुख्यमंत्री से मुलाकात की मांग

आंदोलन में शामिल यशवंत ने कहा कि शनिवार से शुरू हुआ आंदोलन लगातार जारी रहेगा।

अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि मुख्यमंत्री से

मुलाकात नहीं कराई जाती है तो वे सामूहिक भूख हड़ताल का रास्ता अपना सकते हैं।

इस घोषणा के बाद प्रशासन और सरकार के सामने आंदोलन को लेकर चुनौती बढ़ सकती है।

खासकर इसलिए क्योंकि मामला लंबे समय से न्यायिक

प्रक्रिया में भी चल रहा है और अब अगली सुनवाई की तारीख सामने है।

वर्षों से लंबित है विवाद

69,000 शिक्षक भर्ती का मामला उत्तर प्रदेश की सबसे चर्चित

शिक्षक भर्ती विवादों में शामिल रहा है। आरक्षण, चयन सूची और नियुक्ति को लेकर

अलग-अलग पक्षों की ओर से लंबे समय से दावे और आपत्तियां सामने आती रही हैं।

अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा विवाद जितना लंबा खिंच रहा है,

उतना ही उनका व्यक्तिगत और पारिवारिक जीवन प्रभावित हो रहा है। कई अभ्यर्थी

उम्र और दूसरी सरकारी नौकरियों के अवसरों को लेकर भी चिंता जता चुके हैं।

आंदोलनकारियों की मुख्य मांगें क्या हैं?

प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगों को इस प्रकार समझा जा सकता है—

  • 6,800 अभ्यर्थियों की नियुक्ति के मामले में सरकार प्रभावी पैरवी करे।
  • सुप्रीम कोर्ट में आगामी सुनवाई के दौरान अभ्यर्थियों का पक्ष मजबूती से रखा जाए।
  • आरक्षण से जुड़े विवाद का न्यायपूर्ण समाधान किया जाए।
  • चयन सूची में शामिल अभ्यर्थियों की नियुक्ति को लेकर स्पष्ट निर्णय लिया जाए।
  • मुख्यमंत्री से अभ्यर्थियों के प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात कराई जाए।

इन मांगों को लेकर आंदोलनकारी सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं।

आगे क्या होगा?

अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट में होने वाली 8 सितंबर की सुनवाई पर है। अभ्यर्थियों का दावा है कि इस सुनवाई से उनके भविष्य को लेकर महत्वपूर्ण दिशा सामने आ सकती है।

वहीं आंदोलनकारियों ने साफ किया है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक वे अपना आंदोलन जारी रखने के पक्ष में हैं। यदि सरकार और अभ्यर्थियों के बीच बातचीत नहीं होती है तो आने वाले दिनों में प्रदर्शन और तेज होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

सरकार के रुख पर नजर

इस पूरे मामले में आंदोलनकारियों के आरोपों के साथ सरकार और बेसिक शिक्षा विभाग का आधिकारिक पक्ष भी महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल उपलब्ध रिपोर्ट में सरकार की ओर से इन आरोपों पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया दर्ज नहीं है।

चूंकि मामला न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए अंतिम स्थिति अदालत की

कार्यवाही और संबंधित आदेशों से भी प्रभावित होगी। ऐसे में अभ्यर्थियों की मांगों और

सरकार की कार्रवाई के साथ-साथ न्यायिक प्रक्रिया पर भी नजर बनी रहेगी।

निष्कर्ष

उत्तर प्रदेश में 69,000 शिक्षक भर्ती को लेकर एक बार फिर आंदोलन तेज हो गया है।

लखनऊ में अभ्यर्थी बेसिक शिक्षा मंत्री के आवास के बाहर

भूख हड़ताल पर बैठे हैं और ‘आरक्षण दो, न्याय दो’ की मांग उठा रहे हैं।

आंदोलनकारियों का मुख्य जोर 6,800 ओबीसी और दलित अभ्यर्थियों की नियुक्ति पर है,

जिनकी सूची जनवरी 2022 में जारी होने के बावजूद नियुक्ति अब तक नहीं हुई है।

अभ्यर्थियों का कहना है कि 8 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली

सुनवाई से पहले सरकार को उनका पक्ष मजबूती से रखना चाहिए।

अब देखना होगा कि सरकार आंदोलनकारियों से बातचीत करती है या नहीं और

सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई के दौरान इस मामले में

क्या रुख सामने आता है। फिलहाल 69,000 शिक्षक भर्ती का मुद्दा एक बार फिर

उत्तर प्रदेश की शिक्षा और रोजगार व्यवस्था में चर्चा का केंद्र बन गया है।

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