राकेश शर्मा की रिपोर्ट
गोरखपुर। बेलघाट-सिकरीगंज मुख्य मार्ग पर बारिश के बाद सड़क के किनारे हुए रेनकट (भू-कटाव) अब राहगीरों और वाहन चालकों के लिए गंभीर खतरा बन गए हैं। मजगांवा से पिपरी तक सड़क की दोनों पटरियों पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं। इन गड्ढों के आसपास घास-फूस और झाड़ियां इतनी अधिक बढ़ गई हैं कि सड़क के किनारे मौजूद खतरे आसानी से दिखाई नहीं देते। ऐसे में दो वाहनों के क्रॉसिंग के दौरान यदि किसी वाहन को साइड लेने के लिए सड़क के किनारे जाना पड़े तो अचानक गड्ढे में पहिया जाने से वाहन अनियंत्रित होकर पलट सकता है।
सोपाई घाट पुल के पास सबसे ज्यादा खतरा
बेलघाट-सिकरीगंज मुख्य मार्ग पर सोपाई घाट पुल के पास सड़क के दोनों किनारों पर रेनकट के बड़े गड्ढे राहगीरों के लिए परेशानी का कारण बने हुए हैं। पुल के आसपास सड़क की पटरी क्षतिग्रस्त होने के साथ ही कई स्थानों पर मिट्टी कटकर गहरी हो गई है। सड़क के किनारे उगी झाड़ियों के कारण ये गड्ढे दूर से नजर नहीं आते।स्थानीय लोगों के मुताबिक इस मार्ग पर दिन-रात बड़ी संख्या में बाइक, ऑटो, बस और ट्रक आते-जाते हैं। ऐसे में सड़क के किनारे बने गड्ढों की वजह से किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है।
मजगांवा से पिपरी तक पटरी पर झाड़ियों का कब्जा
मुख्य मार्ग के मजगांवा से पिपरी तक दोनों तरफ की पटरियों पर घास-फूस और झाड़ियां उग आई हैं। कई जगह इनका फैलाव पिच सड़क तक हो गया है। इससे सड़क की चौड़ाई भी कम महसूस होती है और वाहन चालकों को क्रॉसिंग के दौरान पर्याप्त जगह नहीं मिलती।
सबसे बड़ी समस्या यह है कि झाड़ियों के बीच छिपे रेनकट के गड्ढे वाहन चालकों को दिखाई नहीं देते। दिन में नियमित रूप से इस मार्ग से गुजरने वाले चालक किसी तरह स्थिति को समझकर निकल जाते हैं, लेकिन नए वाहन चालकों और राहगीरों के लिए यह खतरा अधिक गंभीर है।
रात के समय बढ़ जाता है दुर्घटना का खतरा
रात में सड़क किनारे प्रकाश की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण समस्या और गंभीर हो जाती है। अंधेरे में झाड़ियों के बीच छिपे गड्ढे दिखाई नहीं देने से वाहन चालक अचानक उनके सामने पहुंच सकते हैं। गड्ढे से बचने के प्रयास में वाहन चालक अचानक ब्रेक लगाने या वाहन को दूसरी दिशा में मोड़ने के लिए मजबूर हो सकता है।
ऐसी स्थिति में पीछे से आने वाले वाहन से टक्कर, आमने-सामने भिड़ंत या वाहन के पलटने जैसी दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
हर बारिश के बाद सामने आती है समस्या
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के दौरान सड़क से बहने वाला पानी किनारों की मिट्टी को काट देता है। इससे हर साल सड़क के किनारे रेनकट बन जाते हैं। ग्रामीणों के मुताबिक समस्या सामने आने के बाद कई बार सिर्फ मिट्टी डालकर गड्ढों को भरने की औपचारिकता पूरी कर दी जाती है, लेकिन बारिश होने पर मिट्टी दोबारा बह जाती है और गड्ढे पहले की तरह दिखाई देने लगते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि समस्या का स्थायी समाधान तभी संभव है जब सड़क किनारे जल निकासी की उचित व्यवस्था के साथ रेनकट वाले स्थानों पर मजबूत तरीके से निर्माण कराया जाए।
बोल्डर और गिट्टी डालकर तत्काल मरम्मत की मांग
स्थानीय ग्रामीणों और राहगीरों ने जिलाधिकारी गोरखपुर और लोक निर्माण विभाग (PWD) से मामले में तत्काल कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि सोपाई पुल के पास सहित पूरे बेलघाट-सिकरीगंज मार्ग पर जहां-जहां रेनकट के बड़े गड्ढे बने हैं, उनकी पहचान कर तत्काल बोल्डर और गिट्टी डालकर मरम्मत कराई जाए।
इसके साथ ही सड़क की दोनों पटरियों से झाड़ियों और घास-फूस की सफाई कराने तथा बारिश के पानी की निकासी के लिए प्रभावी व्यवस्था करने की मांग की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते सड़क की मरम्मत और सुरक्षा व्यवस्था नहीं की गई तो किसी बड़ी दुर्घटना के बाद प्रशासन के सामने समस्या और गंभीर रूप में आ सकती है।
प्रशासन से कार्रवाई की उम्मीद
बेलघाट-सिकरीगंज मुख्य मार्ग क्षेत्र के कई गांवों को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग है। इस पर रोजाना बड़ी संख्या में लोग आवागमन करते हैं। ऐसे में सड़क के किनारे बने रेनकट और झाड़ियों में छिपे गड्ढों को नजरअंदाज करना वाहन चालकों की सुरक्षा के लिए जोखिम भरा हो सकता है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि सोपाई घाट पुल के पास बने खतरनाक गड्ढों को प्राथमिकता के आधार पर भरा जाए और पूरे मार्ग का निरीक्षण कर क्षतिग्रस्त पटरियों की मरम्मत कराई जाए, ताकि बारिश के मौसम में संभावित दुर्घटनाओं को रोका जा सके।