मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर परिसीमन पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है। कांग्रेस अध्यक्ष ने लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों की संख्या और राज्यों के बीच सीटों के आवंटन को अगले 25 वर्षों तक फ्रीज रखने का आग्रह किया है। खड़गे ने राजनीतिक दलों और राज्य सरकारों को परिसीमन प्रस्तावों का अध्ययन करने के लिए पर्याप्त समय देने तथा 2029 से महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण देने की मांग भी की है। परिसीमन को लेकर केंद्र और विपक्ष के बीच यह मुद्दा आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस का बड़ा केंद्र बन सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा सीटों के परिसीमन को लेकर सियासी बहस के बीच कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर बड़ा आग्रह किया है। खड़गे ने मौजूदा 543 लोकसभा सीटों की संख्या को अगले 25 वर्षों तक यथावत रखने की मांग की है। साथ ही उन्होंने परिसीमन से जुड़े सरकार के प्रस्तावों पर चर्चा के लिए सभी राजनीतिक दलों की बैठक बुलाने की अपील की है।
परिसीमन पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग
मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपने पत्र में कहा कि परिसीमन एक बेहद महत्वपूर्ण मुद्दा है, जिसका देश की राजनीतिक और संघीय व्यवस्था पर व्यापक असर पड़ सकता है। ऐसे में सरकार को परिसीमन से संबंधित प्रस्ताव सभी राजनीतिक दलों के सामने रखने चाहिए और इस पर सर्वदलीय बैठक आयोजित करनी चाहिए।
खड़गे ने यह भी मांग की है कि राजनीतिक दलों और राज्य सरकारों को परिसीमन प्रस्तावों का अध्ययन करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाए। कांग्रेस का कहना है कि इतने महत्वपूर्ण विषय पर व्यापक विचार-विमर्श और राजनीतिक सहमति के बाद ही आगे बढ़ना उचित होगा।
543 लोकसभा सीटों को 25 साल तक रखने की मांग
कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री से मौजूदा लोकसभा की 543 सीटों की संख्या को अगले 25 वर्षों तक फ्रीज करने का आग्रह किया है। इसके साथ ही उन्होंने राज्यों के बीच लोकसभा सीटों के मौजूदा आवंटन को भी 25 वर्षों तक बनाए रखने की मांग रखी है।
यह मांग ऐसे समय सामने आई है जब परिसीमन के बाद लोकसभा सीटों के पुनर्वितरण को लेकर राजनीतिक दलों के बीच चर्चा तेज है। विपक्षी दलों की ओर से यह चिंता जताई जाती रही है कि आबादी के आधार पर सीटों के पुनर्विन्यास से कुछ राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व के संतुलन पर असर पड़ सकता है।
2029 से महिला आरक्षण लागू करने की मांग
खड़गे ने अपने पत्र में 2029 के लोकसभा चुनाव से महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण लागू करने की मांग भी दोहराई है। कांग्रेस का रुख है कि महिला आरक्षण को लागू करने की प्रक्रिया में देरी नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने सरकार से परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों को पहले सभी दलों के सामने रखने और उसके बाद विस्तृत चर्चा करने का आग्रह किया है। इससे संकेत मिलता है कि कांग्रेस परिसीमन के मुद्दे पर व्यापक राजनीतिक सहमति बनाने की कोशिश कर रही है।
परिसीमन क्यों बना बड़ा राजनीतिक मुद्दा?
परिसीमन का अर्थ लोकसभा और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं तथा उनके प्रतिनिधित्व का पुनर्निर्धारण है। लोकसभा सीटों के पुनर्विन्यास का सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे अलग-अलग राज्यों के संसदीय प्रतिनिधित्व में बदलाव हो सकता है।
वर्तमान बहस में खास तौर पर यह सवाल उठ रहा है कि जनसंख्या के आधार पर सीटों का पुनर्निर्धारण होने पर उन राज्यों की स्थिति क्या होगी, जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन किया है। इसी वजह से परिसीमन का मुद्दा केवल चुनावी सीमाओं तक सीमित न रहकर संघीय ढांचे और राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व से भी जुड़ गया है।
कांग्रेस की रणनीति क्या है?
खड़गे की मांग से कांग्रेस का रुख स्पष्ट होता है कि पार्टी परिसीमन पर जल्दबाजी में निर्णय लेने के बजाय सभी दलों और राज्यों के साथ व्यापक चर्चा चाहती है। कांग्रेस ने मौजूदा 543 सीटों और राज्यवार सीट आवंटन को 25 वर्षों तक स्थिर रखने का प्रस्ताव सामने रखा है।
अब निगाहें केंद्र सरकार के रुख पर हैं कि वह कांग्रेस की सर्वदलीय बैठक की मांग और 543 लोकसभा सीटों को 25 वर्षों तक फ्रीज करने के प्रस्ताव पर क्या प्रतिक्रिया देती