राकेश शर्मा की रिपोर्ट
गोरखपुर। भारतीय जनता पार्टी में करीब 22 वर्षों तक सक्रिय राजनीति करने वाली पूर्व भाजपा नेत्री एवं महिला मोर्चा की प्रदेश उपाध्यक्ष रहीं अस्मिता चंद ने भाजपा नेतृत्व पर उपेक्षा और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर वादा खिलाफी का आरोप लगाते हुए पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के साथ राजनीतिक पारी शुरू करने की घोषणा की है। अस्मिता चंद ने कहा कि चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ना उनका वर्षों पुराना लक्ष्य रहा है और अब उन्होंने इसी दिशा में आगे बढ़ने का फैसला किया है।
गोला में आयोजित प्रेसवार्ता में अस्मिता चंद ने कहा कि उन्होंने वर्ष 2005 से ही चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र में चुनाव की तैयारी शुरू कर दी थी। वर्ष 2007 में भाजपा के संभावित प्रत्याशी के तौर पर उनका नाम चर्चा में आया था, लेकिन पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया। इसके बावजूद उन्होंने भाजपा का साथ नहीं छोड़ा और संगठन के प्रति अपनी निष्ठा बनाए रखी।
उन्होंने दावा किया कि भाजपा में लंबे समय तक काम करने के दौरान उन्हें संगठन में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलीं। उन्होंने क्षेत्रीय उपाध्यक्ष से लेकर प्रदेश उपाध्यक्ष तक के पद पर काम किया। पार्टी ने जहां भी जिम्मेदारी दी, वहां उन्होंने पूरी निष्ठा के साथ संगठन के लिए काम किया।

22 वर्षों की राजनीतिक यात्रा के बाद भाजपा से दूरी
अस्मिता चंद ने कहा कि भाजपा में उन्होंने लंबे समय तक एक समर्पित कार्यकर्ता के रूप में काम किया। उनका कहना है कि संगठन में छोटे पद से लेकर प्रदेश स्तर की जिम्मेदारी तक उन्होंने पार्टी की विचारधारा और संगठन को मजबूत करने के लिए काम किया।
उन्होंने कहा कि बूथ अध्यक्ष से लेकर राष्ट्रीय अध्यक्ष तक हर कार्यकर्ता पार्टी संगठन का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। कार्यकर्ताओं की मेहनत और समर्पण से ही राजनीतिक संगठन मजबूत बनता है। ऐसे में यदि लंबे समय तक काम करने वाले कार्यकर्ताओं को ही उपेक्षित महसूस कराया जाए तो स्वाभाविक रूप से उनके मन में निराशा पैदा होती है।
अस्मिता चंद के मुताबिक, उन्हें लगातार यह महसूस होने लगा था कि भाजपा नेतृत्व अब उन्हें राजनीतिक रूप से आगे नहीं बढ़ाना चाहता। इसी कारण उन्होंने पार्टी छोड़ने का फैसला लिया।

योगी आदित्यनाथ पर लगाया वादा खिलाफी का आरोप
प्रेसवार्ता के दौरान अस्मिता चंद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भी गंभीर राजनीतिक आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री ने उन्हें बुलाकर चिल्लूपार विधानसभा सीट से राजेश त्रिपाठी के टिकट की जानकारी दी थी और पार्टी प्रत्याशी की मदद करने के लिए कहा था।
अस्मिता चंद का कहना है कि उन्होंने मुख्यमंत्री के निर्देश का सम्मान किया और पार्टी प्रत्याशी के समर्थन में पूरी निष्ठा के साथ काम किया।उन्होंने यह भी कहा कि उस समय वर्तमान विधायक राजेश त्रिपाठी की ओर से कई मंचों पर यह बात कही गई थी कि वह उनका आखिरी विधानसभा चुनाव होगा और इसके बाद वह चुनाव नहीं लड़ेंगे।
अस्मिता चंद ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि वह चुनाव उनका आखिरी चुनाव था तो आज भी पार्टी के कार्यक्रमों में उनकी सक्रियता क्यों दिखाई दे रही है। उन्होंने इसी मुद्दे को अपने राजनीतिक असंतोष का एक महत्वपूर्ण कारण बताया।
पार्टी कार्यक्रम की सूचना नहीं मिलने पर जताई नाराजगी
अस्मिता चंद ने भाजपा संगठन पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ समय पहले उनके घर से थोड़ी दूरी पर पार्टी का एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित हुआ था, लेकिन उन्हें इसकी जानकारी तक नहीं दी गई।
उन्होंने कहा कि लंबे समय तक संगठन के लिए काम करने के बावजूद उन्हें कार्यक्रमों से दूर रखना उन्हें जानबूझकर की गई उपेक्षा जैसा लगा।
उनके मुताबिक, जिले और विधानसभा क्षेत्र में कई लोगों को संगठनात्मक जिम्मेदारियां मिलती रहीं, लेकिन उन्हें लगातार नजरअंदाज किया गया। उन्होंने कहा कि ऐसे घटनाक्रमों से उन्हें यह महसूस हुआ कि भाजपा में अब उनके लिए राजनीतिक स्थान नहीं बचा है।
“भाजपा अब हमें नहीं चाहती”, अस्मिता चंद का दावा
अस्मिता चंद ने कहा कि काफी समय तक उन्होंने परिस्थितियों को समझने और पार्टी के भीतर बने रहने का प्रयास किया। लेकिन धीरे-धीरे उन्हें यह समझ में आने लगा कि भाजपा अब उन्हें नहीं चाहती।
उन्होंने कहा कि किसी भी कार्यकर्ता के लिए पार्टी छोड़ना आसान फैसला नहीं होता। करीब दो दशक से अधिक समय तक जिस संगठन के लिए काम किया हो, उससे अलग होना भावनात्मक रूप से भी कठिन होता है।
इसके बावजूद उन्होंने कहा कि जब लगातार उपेक्षा महसूस हो और राजनीतिक भूमिका के लिए अवसर नहीं मिले तो व्यक्ति को दूसरे विकल्प पर विचार करना पड़ता है।
बसपा में शामिल होने का ऐलान
अस्मिता चंद ने बहुजन समाज पार्टी में जाने का ऐलान करते हुए कहा कि बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने उनकी पीड़ा को समझा और उन्हें आशीर्वाद दिया।
उन्होंने कहा कि उन्हें बसपा में अपनी राजनीतिक भूमिका को आगे बढ़ाने की संभावना दिखाई दे रही है। चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र में सक्रिय राजनीति करने की उनकी पुरानी इच्छा अब बसपा के मंच से आगे बढ़ेगी।
उन्होंने कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर वह पूरी तरह तैयार हैं और यदि पार्टी उन्हें चिल्लूपार से प्रत्याशी बनाती है तो वह क्षेत्र की जनता के बीच मजबूती से जाएंगी।
24 अगस्त को हो सकती है चिल्लूपार से प्रत्याशिता की घोषणा
अस्मिता चंद ने बताया कि 24 अगस्त को वीएसएवी मैदान में बसपा कार्यकर्ताओं का बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम में बसपा के मंडल जोन प्रभारी सहित पार्टी के कई वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहेंगे।
उन्होंने दावा किया कि इसी कार्यक्रम में चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र से उनकी प्रत्याशिता की आधिकारिक घोषणा की जाएगी।
इस घोषणा के साथ चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावना है। भाजपा से लंबे समय तक जुड़ी रही अस्मिता चंद के बसपा में जाने से क्षेत्र की चुनावी राजनीति में इस घटनाक्रम को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
चिल्लूपार में विकास को लेकर भाजपा सरकार पर निशानाअस्मिता चंद ने चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्यों को लेकर भी भाजपा सरकार और वर्तमान विधायक पर सवाल उठाए।
उन्होंने आरोप लगाया कि विकास के नाम पर चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र की स्थिति संतोषजनक नहीं है। उन्होंने विशेष रूप से स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर चिंता जताई और कहा कि क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति बदहाल है।
उनका कहना है कि लंबे समय से जनता विकास की उम्मीद कर रही है, लेकिन कई क्षेत्रों में अपेक्षित बदलाव दिखाई नहीं देता।
“भाजपा को समुद्र बताया गया, लेकिन बूंद-बूंद निकलने से समुद्र खाली होता है”
भाजपा पर राजनीतिक हमला करते हुए अस्मिता चंद ने वर्तमान विधायक की उस टिप्पणी का भी जिक्र किया, जिसमें भाजपा को समुद्र बताया गया था।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि समुद्र कितना भी बड़ा क्यों न हो, अगर एक-एक बूंद बाहर निकलती रहे तो एक समय बाद समुद्र भी खाली हो सकता है।
अस्मिता चंद ने दावा किया कि भाजपा का राजनीतिक अहंकार जल्द खत्म होगा। हालांकि यह उनका राजनीतिक आकलन है और आगामी चुनाव में इसका प्रभाव मतदाताओं के रुख तथा राजनीतिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
दल बदल को लेकर भी उठाए सवाल
अस्मिता चंद ने चिल्लूपार की राजनीति में दल बदल के पुराने घटनाक्रमों का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे पहले भी कुछ लोग बसपा के टिकट पर चुनाव जीतकर बाद में दूसरी राजनीतिक पार्टी में चले गए।
उन्होंने इसे जनता के साथ विश्वासघात बताया।अस्मिता चंद ने कहा कि यदि बसपा उन्हें चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र से प्रत्याशी बनाती है और जनता उन्हें विधायक चुनती है तो वह दल बदल नहीं करेंगी।
उन्होंने जनता के बीच अपनी राजनीतिक प्रतिबद्धता को लेकर भरोसा दिलाने की कोशिश की और कहा कि वह जिस दल से चुनाव लड़ेंगी, उसके साथ ईमानदारी से काम करेंगी।
चिल्लूपार की राजनीति में बढ़ी हलचल
अस्मिता चंद के भाजपा छोड़ने और बसपा में जाने के ऐलान के बाद चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में हलचल बढ़ गई है।
चिल्लूपार क्षेत्र में पहले से ही विभिन्न राजनीतिक दल अपनी संगठनात्मक गतिविधियों को मजबूत करने में जुटे हैं। ऐसे समय में भाजपा की एक लंबे समय तक सक्रिय रही महिला नेता का बसपा के साथ जुड़ना राजनीतिक रूप से चर्चा का विषय बन गया है।
अस्मिता चंद की राजनीतिक पृष्ठभूमि और क्षेत्र में लंबे समय से सक्रियता को देखते हुए उनके बसपा में जाने को लेकर समर्थकों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच भी चर्चा तेज हो गई है।
महिला नेतृत्व के लिहाज से भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम
अस्मिता चंद ने लंबे समय तक भाजपा के महिला मोर्चा में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। ऐसे में उनका बसपा में जाना महिला राजनीतिक नेतृत्व के नजरिए से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
उन्होंने कहा कि राजनीति में महिलाओं को केवल संगठनात्मक जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि उन्हें चुनावी राजनीति में भी बराबर अवसर मिलना चाहिए।
चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने की उनकी इच्छा लंबे समय से रही है। अब बसपा के मंच से उनकी यह राजनीतिक महत्वाकांक्षा आगे बढ़ती दिखाई दे रही है।
भाजपा छोड़ने के पीछे बताए कई कारण
अस्मिता चंद ने भाजपा छोड़ने के पीछे मुख्य रूप से तीन प्रमुख कारण बताए। पहला, लंबे समय तक राजनीतिक उपेक्षा का अनुभव। दूसरा, चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र में टिकट और चुनावी भूमिका को लेकर असंतोष। तीसरा, संगठनात्मक कार्यक्रमों में अपेक्षित भागीदारी नहीं मिलना।
उन्होंने कहा कि पार्टी के प्रति उनकी निष्ठा में कभी कमी नहीं आई। लेकिन जब उन्हें लगातार यह लगा कि उनकी राजनीतिक भूमिका को महत्व नहीं दिया जा रहा है तो उन्होंने नया राजनीतिक विकल्प चुनने का निर्णय लिया।
बसपा के लिए कितना महत्वपूर्ण होगा यह कदम?
अस्मिता चंद के बसपा में शामिल होने से पार्टी को चिल्लूपार क्षेत्र में एक ऐसे चेहरे का लाभ मिल सकता है जो लंबे समय तक एक बड़े राजनीतिक संगठन के साथ सक्रिय रही हैं।हालांकि चुनावी राजनीति में किसी नेता के दल बदलने का वास्तविक प्रभाव कई कारकों पर निर्भर करता है। इसमें संगठन की स्थिति, स्थानीय समीकरण, उम्मीदवार की स्वीकार्यता, कार्यकर्ताओं का समर्थन और मतदाताओं का रुख प्रमुख हैं।
ऐसे में 24 अगस्त के बसपा कार्यक्रम के बाद चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।
भाजपा के लिए भी चुनौती?
अस्मिता चंद के आरोप भाजपा के लिए राजनीतिक रूप से असहज सवाल खड़े कर सकते हैं, खासकर इसलिए क्योंकि वह करीब 22 वर्षों तक पार्टी की सक्रिय कार्यकर्ता और पदाधिकारी रही हैं।
हालांकि उनके आरोपों पर भाजपा की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है, यह भी महत्वपूर्ण होगा। राजनीतिक दलों में नेताओं का आना-जाना चुनावी राजनीति का हिस्सा रहा है, लेकिन किसी वरिष्ठ पदाधिकारी का सार्वजनिक रूप से उपेक्षा का आरोप लगाकर पार्टी छोड़ना स्थानीय स्तर पर चर्चा जरूर पैदा करता है।
चिल्लूपार में चुनावी मुकाबला हो सकता है दिलचस्प
आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियां तेज होती जा रही हैं। विभिन्न दल अपने-अपने संगठन को मजबूत करने में लगे हैं।
अस्मिता चंद के बसपा में जाने के बाद यदि उनकी प्रत्याशिता की आधिकारिक घोषणा होती है तो चिल्लूपार का चुनावी मुकाबला और अधिक दिलचस्प हो सकता है।
अब सबकी नजर 24 अगस्त को होने वाले बसपा कार्यक्रम पर रहेगी। इसी कार्यक्रम में उनकी उम्मीदवारी को लेकर स्थिति स्पष्ट होने की बात कही गई है।
जनता के मुद्दों को चुनावी एजेंडे में शामिल करने का दावा
अस्मिता चंद ने कहा कि चिल्लूपार की जनता से जुड़े मुद्दे उनके लिए प्राथमिकता होंगे। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं, विकास और क्षेत्रीय समस्याओं को प्रमुख मुद्दा बनाने की बात कही।
उनका कहना है कि चुनाव केवल टिकट पाने या राजनीतिक पद हासिल करने के लिए नहीं बल्कि जनता की समस्याओं को विधानसभा तक पहुंचाने का माध्यम होना चाहिए।उन्होंने दावा किया कि यदि उन्हें जनता का समर्थन मिलता है तो वह क्षेत्र के विकास और बुनियादी सुविधाओं के लिए आवाज उठाएंगी।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, भाजपा की पूर्व नेत्री अस्मिता चंद का पार्टी छोड़कर बसपा के साथ जाने का ऐलान चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र की राजनीति के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। करीब 22 वर्षों तक भाजपा में सक्रिय रहने के बाद उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर उपेक्षा और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर वादा खिलाफी का आरोप लगाया है।
उन्होंने चिल्लूपार से चुनाव लड़ने की अपनी पुरानी इच्छा को दोहराते हुए कहा है कि 24 अगस्त को वीएसएवी मैदान में आयोजित बसपा कार्यक्रम में उनकी प्रत्याशिता की आधिकारिक घोषणा हो सकती है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बसपा नेतृत्व उन्हें आधिकारिक तौर पर चिल्लूपार से उम्मीदवार घोषित करता है या नहीं और यदि ऐसा होता है तो स्थानीय राजनीतिक समीकरण किस दिशा में जाते हैं।
आगामी चुनाव को लेकर चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र में भाजपा, बसपा, सपा और अन्य राजनीतिक दलों की रणनीति पर भी नजर रहेगी। अस्मिता चंद के इस कदम से क्षेत्र की राजनीति में एक नया अध्याय जुड़ गया है।