राकेश शर्मा की रिपोर्ट
गोला क्षेत्र में विद्युत आपूर्ति व्यवस्था लगातार सवालों के घेरे में है। क्षेत्र के तीन विद्युत उपकेंद्रों को चलाने के लिए पर्याप्त स्वतंत्र मेन लाइन व्यवस्था नहीं होने और एक सर्किट खराब होने पर दूसरी लाइन से टेपिंग कर आपूर्ति चलाने की व्यवस्था का खामियाजा करीब 28 हजार उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है। टेपिंग के कारण मेन लाइन पर ओवरलोड बढ़ रहा है, जिससे लो वोल्टेज, जंफर कटने और बार-बार ब्रेकडाउन की समस्या सामने आ रही है।
गोला कस्बे में स्थित तहसील विद्युत उपकेंद्र, ग्रामीण विद्युत उपकेंद्र और पकड़ी विद्युत उपकेंद्र की विद्युत आपूर्ति व्यवस्था लंबे समय से परेशानी का कारण बनी हुई है। इन तीनों उपकेंद्रों को डेहरीभार स्थित 220 केवी पारेषण केंद्र से केवल दो 33 हजार वोल्ट की मेन सर्किट लाइनों के माध्यम से बिजली मिलती है।
सबसे बड़ी समस्या यह है कि पकड़ी विद्युत उपकेंद्र के लिए अलग 33 हजार वोल्ट की मेन सर्किट लाइन अब तक नहीं बन सकी है। इसके चलते पकड़ी उपकेंद्र को ग्रामीण विद्युत उपकेंद्र से ही संचालित किया जाता है। ऐसे में किसी एक लाइन में खराबी आने पर पूरी व्यवस्था पर दबाव बढ़ जाता है।
एक लाइन खराब होते ही दूसरी पर टेपिंग
गोला क्षेत्र में विद्युत आपूर्ति की समस्या का सबसे गंभीर पहलू मेन लाइन की टेपिंग है। जब किसी उपकेंद्र की मेन सप्लाई में ब्रेकडाउन हो जाता है तो उसे तत्काल ठीक करने के बजाय दूसरी मेन लाइन से टेपिंग करके आपूर्ति बहाल कर दी जाती है।
शुरुआत में यह व्यवस्था अस्थायी राहत जरूर देती है, लेकिन लंबे समय तक टेपिंग रहने से दूसरी लाइन पर अतिरिक्त भार पड़ जाता है। परिणामस्वरूप ओवरलोड की स्थिति बनती है और जंफर कटने या लाइन में फाल्ट आने की आशंका बढ़ जाती है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि अधिकारियों की ओर से कई बार अस्थायी व्यवस्था को ही लंबे समय तक चलाया जाता है, जिससे समस्या और गंभीर होती जाती है।
रविवार को तहसील उपकेंद्र की मेन सप्लाई हुई थी खराब
बताया गया कि बीते रविवार को गोला कस्बे के तहसील विद्युत उपकेंद्र की मेन सप्लाई ब्रेकडाउन हो गई थी। इसके बाद अधिकारियों ने ग्रामीण विद्युत उपकेंद्र की मेन सप्लाई से टेपिंग करके तहसील उपकेंद्र की बिजली आपूर्ति बहाल कर दी।
इसके बाद सोमवार को तहसील उपकेंद्र की खराब मेन लाइन को ठीक कर उसे चार्ज कर दिया गया। हालांकि, लाइन ठीक होने के बाद भी ग्रामीण उपकेंद्र से की गई टेपिंग को तत्काल हटाया नहीं गया।
यही अस्थायी व्यवस्था आगे चलकर बड़ी समस्या का कारण बनी।
मंगलवार रात जंफर कटने से तीनों उपकेंद्र प्रभावित
मंगलवार रात करीब 10 बजे धौंसहर उर्फ बेलवाभारी के पास ग्रामीण विद्युत उपकेंद्र की मेन लाइन का जंफर कट गया। ग्रामीण उपकेंद्र की मेन लाइन पर पहले से अतिरिक्त भार होने के कारण तीनों उपकेंद्रों की बिजली आपूर्ति प्रभावित हो गई।
इसका सीधा असर तीनों उपकेंद्रों से जुड़े करीब 28 हजार उपभोक्ताओं पर पड़ा। घरों और दुकानों की बिजली गुल हो गई। रात के समय बिजली आपूर्ति ठप होने से लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
स्थानीय लोगों ने मामले की जानकारी अधीक्षण अभियंता विद्युत वितरण मंडल द्वितीय, गोरखपुर को दी। इसके बाद अधिकारियों ने टेपिंग हटवाई और ब्रेकडाउन को ठीक कराया।
करीब डेढ़ घंटे बाद दोनों उपकेंद्रों की आपूर्ति बहाल हो सकी।
रात दो बजे फिर बिगड़ी व्यवस्था
समस्या यहीं खत्म नहीं हुई। रात करीब दो बजे ग्रामीण विद्युत उपकेंद्र की मेन सप्लाई में दोबारा ब्रेकडाउन हो गया।
दूसरी ओर तहसील विद्युत उपकेंद्र की मेन सप्लाई चालू होने के बावजूद वहां से उपभोक्ताओं को बिजली नहीं मिल सकी। इसकी वजह यह बताई गई कि तहसील विद्युत उपकेंद्र के फीडरों को चलाने के लिए 440 वोल्ट की सप्लाई ग्रामीण विद्युत उपकेंद्र परिसर से ही ली जा रही है।
तहसील विद्युत उपकेंद्र के कंट्रोल रूम में फीडर स्थापित है, लेकिन उसका ट्रांसफार्मर जला हुआ बताया जा रहा है। इसके कारण स्वतंत्र रूप से फीडर संचालित करने की व्यवस्था प्रभावित है।
सुबह पांच बजे ठीक हुआ फाल्ट
ग्रामीण विद्युत उपकेंद्र की मेन लाइन में आए फाल्ट को सुबह करीब पांच बजे ठीक किया गया। इसके बाद तीनों उपकेंद्रों में बिजली आपूर्ति दोबारा बहाल हो सकी।
इस दौरान करीब तीन घंटे तक उपभोक्ताओं को अघोषित बिजली कटौती का सामना करना पड़ा। रात में बिजली बंद रहने के कारण लोगों को गर्मी और उमस के बीच काफी परेशानी हुई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बार-बार होने वाले ब्रेकडाउन और लो वोल्टेज की समस्या अब रोजमर्रा की परेशानी बन चुकी है।
तीन दशक बाद भी पकड़ी उपकेंद्र की अलग लाइन नहीं
गोला क्षेत्र की विद्युत व्यवस्था में सबसे गंभीर सवाल पकड़ी विद्युत उपकेंद्र को लेकर है। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार करीब तीन दशक बीत जाने के बाद भी पकड़ी उपकेंद्र के लिए अलग 33 हजार वोल्ट की मेन सर्किट लाइन नहीं बन सकी है।
इसके चलते पकड़ी उपकेंद्र की निर्भरता ग्रामीण विद्युत उपकेंद्र पर बनी हुई है।
जब ग्रामीण उपकेंद्र की मेन लाइन में कोई तकनीकी खराबी आती है तो इसका असर पकड़ी उपकेंद्र पर भी पड़ता है। इसी तरह टेपिंग और ओवरलोड की समस्या पूरे क्षेत्र की विद्युत आपूर्ति को प्रभावित कर रही है।
टेपिंग को लेकर पहले भी हो चुकी है कार्रवाई
यह पहली बार नहीं है जब गोला क्षेत्र में टेपिंग को लेकर सवाल उठे हैं। बीते जुलाई महीने में भी तहसील विद्युत उपकेंद्र की मेन सप्लाई में ब्रेकडाउन होने के बाद उसे ग्रामीण विद्युत उपकेंद्र की मेन सप्लाई से टेपिंग कर दिया गया था।
बताया गया कि उस समय भी मेन सप्लाई के ब्रेकडाउन को तत्काल ठीक नहीं किया गया। परिणामस्वरूप कई दिनों तक लोगों को लो वोल्टेज की समस्या का सामना करना पड़ा।
इस मामले की शिकायत के बाद जांच हुई थी और तत्कालीन जेई का स्थानांतरण कर दिया गया था।
सवालों के घेरे में विद्युत व्यवस्था
लगातार सामने आ रही समस्याओं ने गोला क्षेत्र की विद्युत व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब किसी मेन लाइन में खराबी आती है तो स्थायी समाधान के बजाय टेपिंग के सहारे आपूर्ति क्यों चलाई जाती है।
दूसरा सवाल यह है कि पकड़ी विद्युत उपकेंद्र के लिए अलग मेन सर्किट लाइन अब तक क्यों नहीं बनाई गई। तीसरा महत्वपूर्ण मुद्दा तहसील विद्युत उपकेंद्र के कंट्रोल रूम में लगे फीडर के ट्रांसफार्मर का है, जिसके खराब होने के कारण स्वतंत्र आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित बताई जा रही है।
28 हजार उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा खामियाजा
तकनीकी खामियों और अस्थायी व्यवस्थाओं का सबसे ज्यादा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है।
बिजली कटौती के कारण घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ दुकानदारों, छोटे कारोबारियों और
अन्य बिजली आधारित काम करने वाले लोगों को भी परेशानी होती है।
लो वोल्टेज की समस्या से विद्युत उपकरणों को नुकसान पहुंचने की आशंका भी बनी रहती है।
वहीं बार-बार बिजली आने-जाने से लोगों की दिनचर्या प्रभावित हो रही है।
स्थानीय लोगों की मांग है कि टेपिंग जैसी अस्थायी व्यवस्था को खत्म कर तीनों
उपकेंद्रों के लिए पर्याप्त और स्वतंत्र विद्युत आपूर्ति व्यवस्था विकसित की जाए।
स्थायी समाधान की जरूरत
गोला क्षेत्र में बार-बार सामने आ रही बिजली समस्या का स्थायी समाधान
केवल फाल्ट ठीक करने तक सीमित नहीं हो सकता। इसके लिए मेन
लाइन की क्षमता बढ़ाने, आवश्यकतानुसार स्वतंत्र सर्किट तैयार करने, खराब
ट्रांसफार्मर को बदलने और उपकेंद्रों की तकनीकी क्षमता मजबूत करने की जरूरत है।
यदि पकड़ी उपकेंद्र के लिए अलग मेन लाइन तैयार हो जाती है और तहसील विद्युत उपकेंद्र के
कंट्रोल रूम की व्यवस्था भी दुरुस्त कर दी जाती है तो ग्रामीण उपकेंद्र पर निर्भरता कम हो सकती है।
इससे ओवरलोड और टेपिंग की समस्या पर भी काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है।
निष्कर्ष
गोला क्षेत्र में बिजली आपूर्ति की मौजूदा व्यवस्था करीब 28 हजार उपभोक्ताओं के लिए
परेशानी का कारण बनती जा रही है। एक मेन सर्किट के खराब होने पर दूसरी लाइन से टेपिंग करके
आपूर्ति चलाने की व्यवस्था के कारण ओवरलोड बढ़ रहा है। इसके परिणामस्वरूप लो वोल्टेज,
जंफर कटने और बार-बार ब्रेकडाउन जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं।
मंगलवार रात से बुधवार सुबह तक हुई बिजली समस्या ने एक बार फिर
व्यवस्था की कमियों को उजागर कर दिया। करीब तीन घंटे तक उपभोक्ताओं को
अघोषित कटौती का सामना करना पड़ा। जुलाई में भी टेपिंग के कारण पैदा
हुई समस्या की जांच के बाद तत्कालीन जेई का स्थानांतरण किया जा चुका है।
ऐसे में अब उपभोक्ता स्थायी समाधान की उम्मीद कर रहे हैं,
ताकि बार-बार की बिजली कटौती और लो वोल्टेज से राहत मिल सके।,
FAQ
1. गोला क्षेत्र में कितने बिजली उपभोक्ता प्रभावित हैं?
गोला क्षेत्र के तहसील, ग्रामीण और पकड़ी विद्युत उपकेंद्रों से जुड़े
करीब 28 हजार उपभोक्ता विद्युत आपूर्ति की समस्या से प्रभावित हो रहे हैं।
2. गोला में बिजली की समस्या क्यों बढ़ रही है?
एक मेन सर्किट में खराबी आने पर दूसरी सर्किट से टेपिंग करके आपूर्ति चलाने से
ओवरलोड बढ़ रहा है। इससे लो वोल्टेज, जंफर कटने और ब्रेकडाउन की समस्या सामने आ रही है।
3. गोला के किन विद्युत उपकेंद्रों पर असर पड़ रहा है?
तहसील विद्युत उपकेंद्र, ग्रामीण विद्युत उपकेंद्र और पकड़ी विद्युत उपकेंद्र इस व्यवस्था से प्रभावित हो रहे हैं।
4. पकड़ी विद्युत उपकेंद्र की समस्या क्या है?
पकड़ी विद्युत उपकेंद्र के लिए अलग 33 हजार वोल्ट की मेन सर्किट
लाइन उपलब्ध नहीं होने के कारण इसे ग्रामीण विद्युत उपकेंद्र से चलाया जाता है।
5. मंगलवार रात गोला में क्या हुआ?
मंगलवार रात करीब 10 बजे धौंसहर उर्फ बेलवाभारी में ग्रामीण विद्युत उपकेंद्र की
मेन लाइन का जंफर कट गया। इससे तीनों उपकेंद्रों की बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई।
6. बिजली आपूर्ति कितने समय बाद बहाल हुई?
टेपिंग हटाने और ब्रेकडाउन ठीक करने के बाद करीब डेढ़ घंटे में दोनों उपकेंद्रों की आपूर्ति बहाल की गई।
बाद में रात दो बजे फिर ब्रेकडाउन हुआ और सुबह करीब पांच बजे आपूर्ति सामान्य हो सकी।
7. क्या इससे पहले भी टेपिंग को लेकर शिकायत हुई थी?
हां। जुलाई में भी तहसील विद्युत उपकेंद्र की मेन सप्लाई को ग्रामीण उपकेंद्र से टेपिंग करके चलाया गया था।
इसके बाद लो वोल्टेज की शिकायत हुई और
जांच के बाद तत्कालीन जेई का स्थानांतरण किया गया था।
8. उपभोक्ताओं की मुख्य मांग क्या है?
उपभोक्ता टेपिंग की अस्थायी व्यवस्था समाप्त कर स्थायी विद्युत आपूर्ति व्यवस्था,
स्वतंत्र मेन सर्किट लाइन और खराब उपकरणों को दुरुस्त कराने की मांग कर रहे हैं।
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