कानपुर में भाजपा के स्वागत समारोह में बवाल, कुर्सी पर बैठने को लेकर भिड़े नेता और समर्थक; चले लात-घूंसे और चप्पल

उत्तर प्रदेश के कानपुर में भाजपा के एक स्वागत समारोह के दौरान उस समय हंगामा मच गया, जब कुर्सी पर बैठने को लेकर पार्टी के ही नेता और कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए। नौबस्ता स्थित भाजपा के क्षेत्रीय कार्यालय में हुई इस घटना के दौरान गालीगलौज के बाद दोनों पक्षों के बीच जमकर लात-घूंसे चले और चप्पलें भी चलीं। मौके पर मौजूद वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने किसी तरह दोनों पक्षों को अलग कराया। घटना के बाद पार्टी नेतृत्व ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के लिए पांच सदस्यीय कमेटी गठित कर दी है। 

स्वागत समारोह में अचानक शुरू हुआ विवाद

दरअसल, भाजपा के कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र के प्रभारी शंकर लाल लोधी पहली बार कानपुर पहुंचे थे। उनके स्वागत के लिए क्षेत्रीय कार्यालय के सभागार में कार्यक्रम आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में पार्टी के कई पदाधिकारी, नेता और कार्यकर्ता मौजूद थे।

स्वागत समारोह के दौरान भाजपा की दक्षिण इकाई के विनय सिंह राठौर और पूर्व जिला मंत्री शिवपूजन सविता क्षेत्रीय प्रभारी का स्वागत करने मंच पर पहुंचे। स्वागत के बाद जब दोनों वापस अपनी जगह पर लौटे तो कुर्सी पर बैठने को लेकर उनके बीच कहासुनी शुरू हो गई। 

देखते ही देखते सामान्य कहासुनी विवाद में बदल गई और दोनों नेताओं के बीच गालीगलौज होने लगी। इसके बाद मामला हाथापाई तक पहुंच गया।

दो बार भिड़े नेता, जमकर चले लात-घूंसे

रिपोर्ट के मुताबिक दोनों नेताओं के बीच पहली बार मारपीट शुरू होने पर दक्षिण इकाई के जिलाध्यक्ष शिवराम सिंह और वहां मौजूद अन्य कार्यकर्ताओं ने बीच-बचाव किया। दोनों पक्षों को अलग कर मामला शांत कराने की कोशिश की गई।

लेकिन कुछ देर बाद विवाद दोबारा भड़क गया। इस बार दोनों पक्षों के बीच चप्पलें चलने लगीं। स्वागत समारोह में मौजूद लोग अचानक हुए इस हंगामे से हैरान रह गए।

क्षेत्रीय अध्यक्ष राम किशोर साहू ने स्थिति को संभालते हुए दोनों को स्वागत कक्ष से बाहर निकलवा दिया। हालांकि, कार्यालय से बाहर निकलने के बाद भी दोनों पक्षों के बीच मारपीट जारी रही। बाद में कार्यकर्ताओं ने किसी तरह दोनों पक्षों को अलग कराया। 

मारपीट में फट गए कपड़े

विवाद इतना बढ़ गया था कि मारपीट में शामिल लोगों के कपड़े तक फट गए। पार्टी के कार्यक्रम में हुए इस हंगामे के कारण कुछ समय के लिए वहां अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

घटना के दौरान मौजूद नेताओं और कार्यकर्ताओं ने हस्तक्षेप कर स्थिति को नियंत्रित किया। हालांकि, इस घटना ने पार्टी के अंदर अनुशासन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

क्षेत्रीय अध्यक्ष ने मंच से जताई नाराजगी

घटना के बाद क्षेत्रीय अध्यक्ष राम किशोर साहू ने मंच से ही पूरे मामले पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने साफ कहा कि भाजपा जैसे राजनीतिक दल में इस तरह की अनुशासनहीनता स्वीकार नहीं की जाएगी।

उन्होंने कहा कि घटना की जांच कराई जाएगी और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ पार्टी स्तर पर कार्रवाई की जाएगी। 

पांच सदस्यीय जांच कमेटी गठित

मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। इस कमेटी में क्षेत्रीय उपाध्यक्ष अशोक राजपूत, क्षेत्रीय मंत्री सुनील तिवारी, जिलाध्यक्ष उत्तर अनिल दीक्षित, जिलाध्यक्ष दक्षिण शिवराम सिंह और जिलाध्यक्ष ग्रामीण उपेंद्र पासवान को शामिल किया गया है।

पार्टी नेतृत्व के अनुसार कमेटी को तीन दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी है। रिपोर्ट में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। 

अनुशासनहीनता पर निष्कासन तक की चेतावनी

क्षेत्रीय अध्यक्ष ने यह भी संकेत दिया है कि जांच में जो लोग अनुशासनहीनता के दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो सकती है। पार्टी नेतृत्व ने जरूरत पड़ने पर संबंधित लोगों को पार्टी से निष्कासित करने की बात कही है।

इससे स्पष्ट है कि भाजपा संगठन ने घटना को केवल आपसी विवाद मानकर छोड़ने के बजाय इसे पार्टी अनुशासन से जोड़कर देखा है।

बड़े नेताओं के सामने हुआ पूरा विवाद

इस घटना की खास बात यह है कि पूरा विवाद पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में हुआ। कार्यक्रम में कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र के प्रभारी शंकर लाल लोधी के स्वागत के लिए नेता और कार्यकर्ता जुटे थे।

ऐसे कार्यक्रम में पार्टी कार्यकर्ताओं से अनुशासन और मर्यादा बनाए रखने की अपेक्षा की जाती है। लेकिन कुर्सी पर बैठने जैसे मामूली मुद्दे को लेकर शुरू हुआ विवाद मारपीट तक पहुंच गया।

इस घटनाक्रम ने पार्टी के भीतर आपसी समन्वय और अनुशासन को लेकर चर्चा तेज कर दी है।

सोशल मीडिया पर भी चर्चा तेज

घटना के बाद मारपीट से जुड़े वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गए हैं। चप्पल और घूंसे चलने की घटना को लेकर लोग अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।

राजनीतिक दलों के कार्यक्रमों में कार्यकर्ताओं के बीच विवाद होना कोई नई बात नहीं है, लेकिन वरिष्ठ पदाधिकारियों के सामने इस तरह मारपीट होना पार्टी के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकता है।

कुर्सी का विवाद कैसे पहुंचा मारपीट तक?

पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की हो रही है कि

आखिर एक कुर्सी पर बैठने को लेकर शुरू हुआ

विवाद इतनी जल्दी हिंसक झड़प में कैसे बदल गया।

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक दोनों नेता स्वागत के बाद अपनी जगह पर लौटे थे।

इसी दौरान कुर्सी पर बैठने को लेकर कहासुनी हुई और फिर मामला गालीगलौज तथा हाथापाई तक पहुंच गया।

बीच-बचाव के बाद भी विवाद दोबारा शुरू हो गया। 

अब जांच कमेटी यह भी देखेगी कि विवाद की वास्तविक शुरुआत किस बात से हुई और

इसमें किन लोगों की भूमिका रही।

तीन दिन में सामने आएगी जांच रिपोर्ट

भाजपा की पांच सदस्यीय जांच कमेटी को तीन दिन के भीतर रिपोर्ट सौंपनी है।

रिपोर्ट के आधार पर यह तय होगा कि विवाद में शामिल नेताओं और

समर्थकों के खिलाफ किस तरह की संगठनात्मक कार्रवाई की जाए।

पार्टी नेतृत्व के सख्त रुख को देखते हुए माना जा रहा है कि

जांच के बाद जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो सकती है।

भाजपा के लिए अनुशासन बना अहम मुद्दा

कानपुर की यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब राजनीतिक दल अपने संगठन को मजबूत करने और

कार्यकर्ताओं में अनुशासन बनाए रखने पर जोर देते हैं। ऐसे में पार्टी कार्यालय के अंदर ही नेताओं और

समर्थकों के बीच मारपीट होना संगठन के लिए चिंता का विषय बन सकता है।

अब सभी की नजर जांच कमेटी की रिपोर्ट पर रहेगी। रिपोर्ट से यह साफ होगा कि

विवाद में कौन-कौन शामिल था और उनके खिलाफ पार्टी किस स्तर की कार्रवाई करती है।

निष्कर्ष

कानपुर के नौबस्ता स्थित भाजपा के क्षेत्रीय कार्यालय में स्वागत समारोह के दौरान कुर्सी पर

बैठने को लेकर शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते मारपीट में बदल गया। भाजपा दक्षिण इकाई के

दो नेताओं के बीच गालीगलौज के बाद लात-घूंसे और चप्पलें चलीं। बीच-बचाव के बावजूद

दोनों पक्ष दोबारा भिड़ गए और कार्यालय के बाहर भी मारपीट हुई।

मामले को गंभीरता से लेते हुए क्षेत्रीय अध्यक्ष राम किशोर साहू ने

पांच सदस्यीय जांच कमेटी गठित की है। कमेटी को तीन दिन में रिपोर्ट देनी है और

दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई, यहां तक कि निष्कासन की चेतावनी भी दी गई है।

FAQ

1. कानपुर में भाजपा नेताओं के बीच विवाद क्यों हुआ?

भाजपा के स्वागत समारोह के दौरान कुर्सी पर बैठने को लेकर दो नेताओं के बीच कहासुनी हुई,

जिसके बाद विवाद मारपीट में बदल गया। 

2. मारपीट की घटना कहां हुई?

घटना कानपुर के नौबस्ता स्थित भाजपा के क्षेत्रीय कार्यालय में आयोजित स्वागत समारोह के दौरान हुई। 

3. विवाद में क्या हुआ?

कहासुनी के बाद दोनों पक्षों के बीच लात-घूंसे चले।

बाद में चप्पलें भी चलीं और कार्यालय के बाहर भी मारपीट हुई। 

4. स्वागत समारोह किसके लिए आयोजित किया गया था?

कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र के प्रभारी शंकर लाल लोधी के पहली बार कानपुर आने पर

उनका स्वागत करने के लिए कार्यक्रम आयोजित किया गया था। 

5. भाजपा ने मामले में क्या कार्रवाई की?

मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय कमेटी गठित की गई है,

जिसे तीन दिन में रिपोर्ट देने को कहा गया है। 

6. क्या दोषियों पर पार्टी कार्रवाई करेगी?

हां। क्षेत्रीय अध्यक्ष ने कहा है कि जांच में अनुशासनहीनता करने वाले लोगों के खिलाफ

कार्रवाई की जाएगी और जरूरत पड़ने पर उन्हें पार्टी से निष्कासित भी किया जा सकता है। 

7. जांच कमेटी में कौन-कौन शामिल हैं?

कमेटी में अशोक राजपूत, सुनील तिवारी, अनिल दीक्षित, शिवराम सिंह और उपेंद्र पासवान को शामिल किया गया है। 

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