नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। 19 अगस्त को ईरान की सशस्त्र सेनाओं ने खाड़ी देशों को चेतावनी दी कि वे अमेरिकी सैन्य गतिविधियों में किसी भी तरह की सहायता या सुविधा देने से बचें। ईरान ने कहा कि अमेरिकी सेना को किसी भी प्रकार की मदद को उसके खिलाफ चल रहे सैन्य अभियानों में भागीदारी के तौर पर देखा जा सकता है।
यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने ईरान के साथ सभी वित्तीय और आर्थिक लेन-देन रोकने की घोषणा की है। यह फैसला क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव और समुद्री सुरक्षा से जुड़ी घटनाओं के बीच लिया गया।
ईरान ने खाड़ी देशों को दी कड़ी चेतावनी
ईरानी सशस्त्र बलों के प्रमुख अली अब्दोल्लाही ने खाड़ी देशों को अमेरिकी सैन्य गतिविधियों में सहयोग नहीं करने की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना को किसी भी प्रकार की सहायता या लॉजिस्टिक सुविधा देना ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में शामिल होने के समान माना जाएगा।
ईरान की इस चेतावनी से खाड़ी क्षेत्र में पहले से मौजूद तनाव और बढ़ गया है। खासतौर पर उन देशों की भूमिका पर नजर है, जहां अमेरिकी सैन्य संसाधन और सुविधाएं मौजूद हैं।
UAE ने ईरान से आर्थिक संबंध रोके
संयुक्त अरब अमीरात ने ईरान के साथ आर्थिक और वित्तीय गतिविधियों को फिलहाल रोकने का फैसला किया है। UAE की ओर से यह कदम क्षेत्रीय सैन्य तनाव और समुद्री सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच उठाया गया।
रिपोर्टों के अनुसार, UAE ने ईरान से दागी गई दो बैलिस्टिक मिसाइलों का पता लगाए जाने के बाद सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी। ईरान ने हालांकि मिसाइल लॉन्च किए जाने की जिम्मेदारी से इनकार किया है।
ट्रंप ने ईरान का साथ देने वालों को चेताया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को आर्थिक मदद या किसी तरह की राहत देने वाले देशों के खिलाफ कड़े आर्थिक कदम उठाने की चेतावनी दी है। ट्रंप प्रशासन ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है और ईरान के साथ व्यापारिक संबंध रखने वाले देशों पर भी असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
अमेरिकी रुख का मुख्य उद्देश्य ईरान की आर्थिक और वित्तीय गतिविधियों पर
दबाव बढ़ाना तथा उसके लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक समर्थन सीमित करना बताया जा रहा है।
समुद्री व्यापार और होर्मुज पर बढ़ी चिंता
पश्चिम एशिया के मौजूदा संकट में होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण हो गई है।
यह क्षेत्र वैश्विक ऊर्जा और समुद्री व्यापार के लिए
रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। अमेरिका और UAE के अधिकारियों के बीच भी
क्षेत्रीय सुरक्षा तथा होर्मुज में नौवहन की स्वतंत्रता को लेकर बातचीत हुई है।
यदि क्षेत्र में सैन्य तनाव और बढ़ता है तो समुद्री परिवहन,
ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर इसका असर पड़ सकता है।
अमेरिका-ईरान टकराव के बीच बढ़ी खाड़ी देशों की चिंता
एक ओर अमेरिका ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की तैयारी में है, वहीं दूसरी ओर
ईरान खाड़ी देशों को अमेरिकी सैन्य गतिविधियों से दूरी बनाए रखने की चेतावनी दे रहा है। इससे खाड़ी देशों के
सामने सुरक्षा और आर्थिक हितों के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती बढ़ गई है।
अमेरिकी सैन्य गतिविधियों के बीच ईरान की ओर से दी गई चेतावनी को
क्षेत्रीय तनाव बढ़ने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
आगे क्या होगा?
अब सभी की नजर अमेरिका, ईरान और खाड़ी देशों के अगले कदम पर है। यदि अमेरिका ईरान के खिलाफ
आर्थिक प्रतिबंधों को और सख्त करता है और ईरान की ओर से खाड़ी देशों को इसी तरह की
चेतावनियां जारी रहती हैं, तो क्षेत्र में कूटनीतिक और आर्थिक तनाव और बढ़ सकता है।
फिलहाल UAE द्वारा ईरान के साथ आर्थिक लेन-देन रोकने और ईरान की ओर से खाड़ी देशों को
अमेरिकी सैन्य सहयोग से दूर रहने की चेतावनी ने पश्चिम एशिया के
संकट को नया मोड़ दे दिया है। इसी बीच ट्रंप की
आर्थिक कार्रवाई की चेतावनी से यह संकेत मिल रहा है कि आने वाले दिनों में
ईरान-अमेरिका टकराव का आर्थिक मोर्चा और अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है।
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