औरैया डबल मर्डर केस में बड़ा फैसला, पूर्व MLC कमलेश पाठक समेत 10 दोषियों को उम्रकैद

औरैया डबल मर्डर केस: उत्तर प्रदेश के औरैया जिले के बहुचर्चित दोहरे हत्याकांड में बुधवार को विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने पूर्व सपा एमएलसी कमलेश पाठक, उनके भाई और पूर्व ब्लॉक प्रमुख संतोष पाठक, रामू पाठक समेत 10 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। मामला वर्ष 2020 में अधिवक्ता मंजुल चौबे और उनकी चचेरी बहन सुधा चौबे की हत्या से जुड़ा है। अदालत ने इन दोषियों को हत्या, हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट से जुड़े मामलों में दोषी ठहराया था।

छह साल पुराने मामले में आया फैसला

औरैया का यह दोहरा हत्याकांड लंबे समय से चर्चा में रहा है। करीब छह साल तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट ने बुधवार को दोषियों की सजा का ऐलान किया। अदालत में सुनवाई पूरी होने के बाद 19 अगस्त को फैसले की तारीख तय की गई थी। फैसले के दिन अदालत परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। पुलिस और पीएसी के जवान तैनात रहे, ताकि किसी भी तरह की कानून-व्यवस्था की स्थिति पैदा न हो।

विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट के न्यायाधीश विनय प्रकाश ने सजा के बिंदु पर सुनवाई के बाद सभी 10 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अदालत ने सभी दोषियों को हत्या, हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट के मामलों में दोषी माना था।

15 मार्च 2020 को हुई थी दो लोगों की हत्या

यह मामला 15 मार्च 2020 को औरैया के मोहल्ला नारायनपुर में हुई दो हत्याओं से जुड़ा है। यहां मंजुल चौबे और उनकी चचेरी बहन सुधा चौबे की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई थी और पुलिस ने मामले की जांच शुरू की थी।

हत्या के बाद दर्ज प्राथमिकी और पुलिस की जांच के आधार पर पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक समेत कई लोगों के नाम सामने आए। पुलिस ने मामले में आरोपियों को गिरफ्तार कर अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया था। इसके बाद यह मुकदमा विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट में चला।

कमलेश पाठक समेत इन 10 लोगों को हुई उम्रकैद

अदालत के फैसले में पूर्व सपा एमएलसी कमलेश पाठक, उनके भाई और पूर्व ब्लॉक प्रमुख संतोष पाठक, रामू पाठक, कुलदीप, विकल्प, आशीष दुबे, लला चौबे, शिवम अवस्थी, गनर अवनीश प्रताप सिंह और भागवताचार्य राजेश शुक्ला को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।

अदालत ने इन सभी को हत्या, हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट के तहत दोषी ठहराया था। फैसले के बाद मामले में करीब छह वर्षों से चल रही मुख्य आपराधिक कार्यवाही का महत्वपूर्ण चरण पूरा हो गया है।

कोर्ट में फैसले से पहले बढ़ाई गई सुरक्षा

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए फैसला सुनाए जाने से पहले अदालत परिसर और उसके आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। पुलिस और पीएसी बल को तैनात किया गया था। अधिकारियों की कोशिश थी कि फैसले के दौरान अदालत परिसर में किसी तरह की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो।

फैसले के समय दोषियों को अदालत में पेश किया गया और सजा के बिंदु पर सुनवाई के बाद न्यायालय ने आजीवन कारावास का आदेश सुनाया।

पहले से जेल में चल रही थी लंबी कानूनी प्रक्रिया

इस मामले में आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई वर्ष 2020 में ही शुरू हो गई थी। मामले की सुनवाई के दौरान अधिकांश आरोपी लंबे समय तक जेल में रहे। पूर्व में सामने आई जानकारी के अनुसार, केवल सरकारी गनर अवनीश प्रताप सिंह को इस मामले में जमानत मिल सकी थी, जबकि अन्य आरोपी जेल में निरुद्ध रहे।

दोहरे हत्याकांड के साथ-साथ इस प्रकरण से जुड़े अन्य कानूनी मामले भी चलते रहे। इसी वजह से यह मामला लंबे समय तक न्यायिक प्रक्रिया में बना रहा।

गैंगस्टर एक्ट में भी हो चुकी थी कार्रवाई

दोहरे हत्याकांड के बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई की थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 26 जून 2020 को गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की गई थी। इस मामले में मार्च 2026 में अदालत ने कमलेश पाठक समेत कई आरोपियों को दोषी ठहराया था। कमलेश पाठक को उस मामले में छह वर्ष की कैद और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई थी, जबकि कुछ अन्य आरोपियों को पांच-पांच वर्ष की सजा और जुर्माना लगाया गया था।

इससे स्पष्ट है कि दोहरे हत्याकांड से जुड़े कानूनी मामले केवल हत्या के मुकदमे तक सीमित नहीं रहे, बल्कि आरोपियों के खिलाफ अन्य धाराओं और कानूनों के तहत भी कार्रवाई हुई।

हत्या, हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट में दोषसिद्धि

मुख्य मुकदमे में अदालत ने आरोपियों को हत्या, हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट से जुड़े आरोपों में दोषी माना। इसके बाद सजा के बिंदु पर

सुनवाई हुई और सभी 10 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।

अदालत का यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मामला लंबे समय से

न्यायिक प्रक्रिया में था और इसे लेकर स्थानीय स्तर पर लगातार नजर बनी हुई थी।

एक आरोपी का मामला किशोर न्याय बोर्ड में

इस हत्याकांड में कुल 11 आरोपियों का जिक्र सामने आया था। इनमें एक आरोपी नाबालिग था,

जिसका मामला किशोर न्याय बोर्ड में स्थानांतरित किया गया। इसलिए विशेष

एमपी-एमएलए कोर्ट के मौजूदा फैसले में 10 वयस्क आरोपियों को लेकर निर्णय सुनाया गया।

इस तरह अदालत ने वयस्क आरोपियों से जुड़े मुख्य मामले में अपना फैसला सुनाया,

जबकि नाबालिग आरोपी की न्यायिक प्रक्रिया अलग मंच पर जारी है।

छह साल बाद पीड़ित परिवार को मिला न्यायिक फैसला

दोहरे हत्याकांड के बाद पीड़ित परिवार और मामले से जुड़े लोगों की

नजर लंबे समय से अदालत के फैसले पर थी। करीब छह साल की न्यायिक प्रक्रिया के बाद

बुधवार को अदालत ने दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई।

किसी आपराधिक मामले में दोषसिद्धि और सजा अदालत में पेश किए गए

साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होती है। इस मामले में भी

अदालत ने सुनवाई पूरी करने के बाद आरोपियों को दोषी माना और सजा सुनाई।

फैसले के बाद औरैया में चर्चा तेज

अदालत के फैसले के बाद औरैया का यह पुराना मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है।

पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक का नाम इस मामले में प्रमुख आरोपियों में रहा है।

अब अदालत द्वारा उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बाद मामले की कानूनी स्थिति में बड़ा बदलाव आया है।

हालांकि किसी भी दोषसिद्धि के खिलाफ कानून में उपलब्ध न्यायिक उपायों का इस्तेमाल किया जा सकता है।

आगे की स्थिति उच्च अदालत में होने वाली कानूनी कार्यवाही पर निर्भर करेगी।

फैसले से पहले भी बनी थी लोगों की नजर

17 अगस्त को अदालत के फैसले की तारीख तय होने की जानकारी सामने

आने के बाद से ही इस मामले को लेकर औरैया में चर्चा तेज थी। उस समय बताया गया था कि

विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट 19 अगस्त को दोहरे हत्याकांड से जुड़े मामलों में फैसला सुनाएगी।

बुधवार को अदालत ने तय तारीख पर फैसला सुनाते हुए 10 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा दे दी।

निष्कर्ष

औरैया डबल मर्डर केस में छह साल बाद अदालत का बड़ा फैसला आया है।

विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट ने पूर्व सपा एमएलसी कमलेश पाठक, उनके भाई संतोष पाठक,

रामू पाठक समेत 10 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने

इन्हें हत्या, हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट के मामलों में दोषी पाया था।

यह मामला 15 मार्च 2020 को औरैया के नारायनपुर में मंजुल चौबे और

उनकी चचेरी बहन सुधा चौबे की गोली मारकर हत्या से जुड़ा है। मामले में पुलिस जांच के बाद

कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था और लंबे समय तक अदालत में सुनवाई चली।

फैसले के दिन अदालत परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।

अब इस मामले में आगे की कानूनी स्थिति

उच्च न्यायालय में होने वाली संभावित कार्यवाही पर निर्भर करेगी। वहीं नाबालिग आरोपी से

जुड़ी प्रक्रिया किशोर न्याय बोर्ड के स्तर पर अलग से जारी है।

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