राघव चड्ढा को BJP में जासूसी के लिए भेजा था? अरविंद केजरीवाल के जवाब ने बढ़ाई सियासी चर्चा

आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल एक इंटरव्यू के दौरान अपने ऊपर बने मीम्स और राजनीतिक घटनाक्रम से जुड़े सवालों पर हल्के-फुल्के अंदाज में जवाब देते नजर आए। बातचीत के दौरान राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा के भाजपा में जाने से जुड़ा एक मीम भी उनके सामने रखा गया। इस पर केजरीवाल ने मजाकिया अंदाज में ऐसी प्रतिक्रिया दी, जिसने राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया में चर्चा को जन्म दे दिया।

राघव चड्ढा को लेकर मीम पर केजरीवाल का मजेदार जवाब

इंटरव्यू में केजरीवाल से एक वायरल मीम को लेकर सवाल किया गया। मीम में यह सवाल उठाया गया था कि क्या राघव चड्ढा को भाजपा में जासूसी के लिए भेजा गया था। सवाल सुनने के बाद केजरीवाल ने पहले गंभीर अंदाज बनाया और फिर हंसते हुए मजाकिया प्रतिक्रिया दी।

उनका जवाब इस बात को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया। हालांकि, यह प्रतिक्रिया मीम और मजाकिया सवाल के संदर्भ में थी, इसे राघव चड्ढा को लेकर किसी वास्तविक जासूसी योजना की पुष्टि के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

राघव चड्ढा के भाजपा में जाने पर पहले क्या बोले थे केजरीवाल?

राघव चड्ढा के राजनीतिक रुख में बदलाव को लेकर केजरीवाल से एक दिन पहले भी सवाल किया गया था। उस बातचीत में उन्होंने कहा था कि उन्हें इस घटनाक्रम की उम्मीद नहीं थी और उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी।

केजरीवाल ने यह भी कहा कि जो लोग अलग होकर चले गए हैं, वे जहां गए हैं वहां खुश रहें। इस बयान से साफ है कि इस घटनाक्रम को लेकर केजरीवाल ने पहले आश्चर्य व्यक्त किया था।

सात सांसदों के साथ राजनीतिक बदलाव की चर्चा

राघव चड्ढा के साथ छह अन्य सांसदों के राजनीतिक रूप से अलग होने और भाजपा के साथ जाने की खबरों ने आम आदमी पार्टी की राजनीति में हलचल पैदा की थी। इसी घटनाक्रम के बाद सोशल मीडिया पर तरह-तरह के मीम और राजनीतिक टिप्पणियां सामने आईं।

इसी पृष्ठभूमि में केजरीवाल से मीम के जरिए राघव चड्ढा को कथित ‘जासूस’ बनाकर भाजपा में भेजे जाने वाला सवाल पूछा गया था।

अपने ‘यू-टर्न’ वाले मीम्स पर भी बोले केजरीवाल

इंटरव्यू में केजरीवाल ने अपने राजनीतिक सफर से जुड़े उन मीम्स पर भी प्रतिक्रिया दी,

जिनमें उन पर बार-बार अपना रुख बदलने का आरोप लगाया जाता है।

उन्होंने राजनीति में आने से पहले दिए गए अपने पुराने बयानों और बाद के राजनीतिक

फैसलों का संदर्भ देते हुए अपनी स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की। कांग्रेस के साथ गठबंधन के सवाल पर भी

उन्होंने अपने पुराने रुख और बाद की परिस्थितियों का उल्लेख किया।

अन्ना आंदोलन से लेकर सत्ता तक का किया जिक्र

केजरीवाल ने अपने राजनीतिक सफर की चर्चा करते हुए अन्ना आंदोलन के दौर का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि

उस समय लोकपाल कानून को लेकर चुनाव लड़ने की चुनौती दी गई थी और इसी राजनीतिक

घटनाक्रम के बाद आम आदमी पार्टी के गठन तथा चुनावी राजनीति में आने का रास्ता आगे बढ़ा।

उन्होंने दिल्ली में अपनी पार्टी के शुरुआती चुनावी प्रदर्शन का भी उल्लेख किया और

कहा कि पार्टी ने कम समय में बड़ी चुनावी सफलता हासिल की थी।

मजाकिया अंदाज में राजनीतिक सवालों के जवाब

इस पूरे इंटरव्यू की खास बात यह रही कि केजरीवाल ने कई गंभीर राजनीतिक सवालों का जवाब अपेक्षाकृत हल्के और

मजाकिया अंदाज में दिया। राघव चड्ढा से जुड़ा मीम भी इसी बातचीत का हिस्सा था।

हालांकि, राजनीतिक बयानों और मीम्स के बीच अंतर समझना जरूरी है।

किसी मीम पर दिया गया मजाकिया जवाब किसी आरोप या राजनीतिक दावे की पुष्टि नहीं करता।

राघव चड्ढा प्रकरण से क्या संदेश?

राघव चड्ढा से जुड़े राजनीतिक घटनाक्रम ने आम आदमी पार्टी के भीतर और

उसके बाहर कई सवालों को जन्म दिया है। केजरीवाल के ताजा बयान में एक तरफ

इस घटनाक्रम पर उनका हल्का-फुल्का अंदाज दिखाई दिया,

वहीं पहले दिए गए बयान में उन्होंने इसे अप्रत्याशित बताया था।

फिलहाल इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यही है कि ‘जासूस’ वाला सवाल

एक मीम के संदर्भ में पूछा गया था, जबकि केजरीवाल की प्रतिक्रिया मजाकिया थी। इसे वास्तविक जासूसी के

आरोप या प्रमाण के रूप में प्रस्तुत करना तथ्यात्मक रूप से उचित नहीं होगा।

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