नई दिल्ली। भारत में मेडिकल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र से एक ऐसी खबर सामने आई है, जो देश की आत्मनिर्भरता और स्वास्थ्य सेवाओं के भविष्य से जुड़ी है। बेंगलुरु की कंपनी Voxelgrids भारत में स्वदेशी MRI मशीन विकसित करने की दिशा में काम कर रही है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पीछे इंजीनियर और कंपनी के संस्थापक-CEO अर्जुन अरुणाचलम की वर्षों की मेहनत है।
इस सफर में सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ MRI जैसी जटिल मेडिकल मशीन को विकसित करना नहीं थी, बल्कि उस तकनीक को तैयार करने के लिए लंबे समय तक फंडिंग जुटाना भी था। इसी दौर में Tata Trusts और Zoho से मिले समर्थन ने इस भारतीय मेडिकल टेक्नोलॉजी प्रोजेक्ट को आगे बढ़ने में महत्वपूर्ण मदद की।
भारत में MRI मशीन बनाना क्यों था इतना बड़ा सपना?
MRI यानी Magnetic Resonance Imaging आधुनिक चिकित्सा जांच की महत्वपूर्ण तकनीकों में से एक है। शरीर के अंदरूनी हिस्सों की विस्तृत तस्वीर हासिल करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन भारत में लंबे समय से MRI मशीनों के लिए विदेशी कंपनियों और आयातित सिस्टम पर काफी निर्भरता रही है।
अर्जुन अरुणाचलम के मुताबिक, भारत में MRI स्कैन की औसत कीमत करीब 10 हजार रुपये तक पहुंच सकती है। महंगी मशीनों की खरीद, स्थापना और रखरखाव के कारण देश के कई हिस्सों में MRI की सुविधा आम लोगों के लिए आसानी से उपलब्ध नहीं हो पाती।
यही चुनौती अर्जुन अरुणाचलम के लिए प्रेरणा बनी। उनका उद्देश्य ऐसी MRI तकनीक तैयार करना था, जो भारत की परिस्थितियों के अनुरूप हो और भविष्य में मेडिकल जांच की लागत को कम करने में मदद कर सके।
अमेरिका से लौटे इंजीनियर ने शुरू की स्वदेशी MRI बनाने की कोशिश
अर्जुन अरुणाचलम इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर हैं। उन्होंने भारत में MRI मशीन विकसित करने का सपना लेकर इस दिशा में काम शुरू किया। लेकिन यह कोई सामान्य स्टार्टअप प्रोजेक्ट नहीं था।
MRI मशीन दुनिया की जटिल मेडिकल डिवाइस तकनीकों में गिनी जाती है। इसके लिए हार्डवेयर, इलेक्ट्रॉनिक्स, सॉफ्टवेयर, मैग्नेट सिस्टम और इमेजिंग तकनीक जैसे कई क्षेत्रों में विशेषज्ञता की जरूरत होती है।
Voxelgrids की टीम ने इन तकनीकों को अपने स्तर पर विकसित करने की कोशिश की। रिपोर्ट के अनुसार, शुरुआत में टीम में सिर्फ चार इंजीनियर थे, जो आगे बढ़कर करीब 33 इंजीनियरों तक पहुंची।
जब फंडिंग खत्म होने लगी, तब सामने आया बड़ा मोड़
इस परियोजना की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक लगातार फंडिंग जुटाना था। एक तरफ कंपनी को जटिल तकनीक विकसित करनी थी, दूसरी तरफ उसके सामने अरबों डॉलर की क्षमता रखने वाली वैश्विक मेडिकल टेक्नोलॉजी कंपनियां थीं।
कोविड-19 महामारी के दौरान एक बहुराष्ट्रीय कंपनी की ओर से Voxelgrids को खरीदने का प्रस्ताव भी सामने आया। ऐसी स्थिति में कंपनी के सामने विकल्प था कि वह अपना प्रोजेक्ट किसी बड़ी वैश्विक कंपनी को सौंप दे या फिर खुद इस सफर को जारी रखे।
अरुणाचलम ने दूसरा रास्ता चुना। उन्होंने कंपनी को बेचने के बजाय स्वदेशी MRI तकनीक विकसित करने का लक्ष्य जारी रखा।
रतन टाटा और Tata Trusts बने मुश्किल समय में सहारा
Voxelgrids के इस सफर में Tata Trusts का समर्थन बेहद महत्वपूर्ण रहा। अर्जुन अरुणाचलम के अनुसार, Tata Trusts उन शुरुआती संस्थाओं में था जिसने उनकी तकनीक पर भरोसा जताया।
अरुणाचलम ने वर्ष 2015 में Tata Trusts से संपर्क किया था। उस समय रतन टाटा सक्रिय रूप से ट्रस्ट से जुड़े हुए थे। तकनीक की संभावनाओं को देखते हुए तत्कालीन मैनेजिंग ट्रस्टी आर. वेंकटरामनन ने उन्हें मुंबई बुलाया था।
यह समर्थन उस समय महत्वपूर्ण था, जब स्वदेशी MRI बनाने की परियोजना को लंबे समय तक रिसर्च और डेवलपमेंट की जरूरत थी।
श्रीधर वेम्बू की Zoho ने भी दिया अहम समर्थन
बाद के दौर में Zoho के संस्थापक श्रीधर वेम्बू की ओर से भी Voxelgrids को महत्वपूर्ण समर्थन मिला। इस मदद ने कंपनी को उस समय मजबूती दी, जब विदेशी कंपनी के प्रस्ताव के बीच अपने स्वतंत्र तकनीकी विजन को बचाए रखना चुनौती बन गया था।
Tata Trusts और Zoho से मिले समर्थन ने कंपनी को अपने रिसर्च और डेवलपमेंट पर ध्यान केंद्रित करने में मदद की। यही वजह रही कि Voxelgrids अपनी स्वदेशी MRI तकनीक के विकास की दिशा में आगे बढ़ सकी।
कैसे अलग है Voxelgrids की MRI मशीन?
Voxelgrids की MRI मशीन की खासियत सिर्फ यह नहीं है कि इसे भारत में विकसित किया जा रहा है। कंपनी ने इसके डिजाइन और तकनीकी संरचना में भी अलग दृष्टिकोण अपनाने की कोशिश की है।
अर्जुन अरुणाचलम के अनुसार, मशीन की आंतरिक मैग्नेट आर्किटेक्चर पारंपरिक MRI सिस्टम से अलग है। इसमें सामान्य MRI सिस्टम की तुलना में करीब एक-तिहाई केबल इस्तेमाल होने का दावा किया गया है।
इलेक्ट्रॉनिक पैकेजिंग में कम बिजली की खपत और मशीन का अपेक्षाकृत हल्का होना भी इसकी डिजाइन विशेषताओं में शामिल बताया गया है।
MRI स्कैन की कीमत 70% तक घटाने का दावा
इस स्वदेशी MRI मशीन को लेकर सबसे बड़ी उम्मीद इसकी संभावित लागत में कमी से जुड़ी है।
अर्जुन अरुणाचलम के अनुसार, Voxelgrids की तकनीक भविष्य में MRI स्कैन की लागत को करीब 70 प्रतिशत तक कम करने में मदद कर सकती है। यह आंकड़ा कंपनी के संस्थापक द्वारा बताई गई संभावित लागत कमी है, इसलिए इसे मौजूदा हर अस्पताल में लागू होने वाली निश्चित कीमत नहीं माना जाना चाहिए।
अगर बड़े स्तर पर यह तकनीक कम लागत पर उपलब्ध होती है तो इसका फायदा छोटे शहरों और ऐसे क्षेत्रों को मिल सकता है, जहां महंगे MRI सिस्टम की वजह से सुविधा सीमित है।
भारत में CT की तुलना में MRI मशीनें कम क्यों हैं?
भारत में CT स्कैनर की संख्या MRI मशीनों से काफी ज्यादा बताई जाती है। इसका एक बड़ा कारण MRI सिस्टम की खरीद और संचालन की ऊंची लागत है।
आयातित मशीनों की कीमत के अलावा उन्हें स्थापित करने, रखरखाव और तकनीकी सेवाओं की जरूरत भी होती है। ऐसे में कम लागत वाली स्वदेशी तकनीक भारत के मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
छोटे शहरों और आम मरीजों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह तकनीक?
भारत में अत्याधुनिक मेडिकल सुविधाएं अभी भी बड़े शहरों में अधिक केंद्रित हैं।
यदि MRI मशीनों की लागत, बिजली की खपत और रखरखाव का खर्च कम होता है, तो छोटे शहरों और
ग्रामीण क्षेत्रों में भी ऐसी मशीनें लगाना आसान हो सकता है।
इसका सीधा असर मरीजों पर पड़ सकता है। कम लागत वाली जांच से
आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए MRI जांच अधिक सुलभ हो सकती है।
हालांकि, किसी भी नई मेडिकल डिवाइस के व्यापक इस्तेमाल से पहले नियामकीय मंजूरी,
क्लिनिकल वैलिडेशन, सुरक्षा और प्रदर्शन जैसे जरूरी मानकों को पूरा करना महत्वपूर्ण होगा।
भारत की मेडिकल टेक्नोलॉजी में आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम
Voxelgrids की कहानी सिर्फ एक MRI मशीन के विकास की कहानी नहीं है।
यह भारत में मेडिकल डिवाइस के क्षेत्र में स्वदेशी रिसर्च और निर्माण की क्षमता से भी जुड़ी है।
भारत लंबे समय से कई महंगी मेडिकल मशीनों के लिए आयात पर निर्भर रहा है। यदि देश में
जटिल मेडिकल उपकरणों का डिजाइन और निर्माण बढ़ता है, तो इससे स्थानीय इंजीनियरिंग,
रिसर्च, मैन्युफैक्चरिंग और रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा मिल सकता है।
रतन टाटा से लेकर श्रीधर वेम्बू तक, भरोसे ने बदली कहानी
अर्जुन अरुणाचलम का यह सफर बताता है कि डीप-टेक और मेडिकल टेक्नोलॉजी में किसी विचार को
वास्तविक उत्पाद में बदलने के लिए वर्षों की मेहनत के साथ धैर्य और पूंजी दोनों की आवश्यकता होती है।
यदि Tata Trusts और Zoho जैसे समर्थकों से वित्तीय मदद और भरोसा नहीं मिलता, तो इस परियोजना को
आगे बढ़ाना और भी कठिन हो सकता था। यही वजह है कि भारत की पहली स्वदेशी MRI तकनीक की
कहानी में तकनीकी उपलब्धि के साथ-साथ उन संस्थाओं और लोगों की
भूमिका भी महत्वपूर्ण बन जाती है, जिन्होंने इस सफर में भरोसा दिखाया।
निष्कर्ष: सस्ती MRI जांच की उम्मीद को मिल सकती है नई ताकत
भारत में स्वदेशी MRI मशीन का विकास देश के मेडिकल टेक्नोलॉजी सेक्टर के लिए
महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। Voxelgrids की तकनीक
अगर बड़े पैमाने पर सफल होती है और लागत में अपेक्षित कमी आती है,
तो आने वाले समय में MRI जांच को ज्यादा लोगों तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है।
इस पूरी कहानी का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि एक भारतीय इंजीनियर ने
महंगी और जटिल मेडिकल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में विदेशी कंपनियों से
प्रतिस्पर्धा करने का फैसला किया और लंबे समय तक अपने प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाया।
रतन टाटा से जुड़े Tata Trusts और श्रीधर वेम्बू की Zoho से मिले समर्थन ने
इस सफर को मजबूती दी। अब इस स्वदेशी MRI तकनीक की
वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि इसे कितनी तेजी से सुरक्षित,
विश्वसनीय और बड़े पैमाने पर मरीजों तक पहुंचाया जा सकता है।
FAQ
1. भारत की पहली स्वदेशी MRI मशीन किसने बनाई है?
बेंगलुरु की मेडिकल टेक्नोलॉजी कंपनी Voxelgrids इस स्वदेशी MRI तकनीक को विकसित कर रही है और
इसके संस्थापक-CEO अर्जुन अरुणाचलम हैं।
2. Voxelgrids की MRI मशीन की खासियत क्या है?
कंपनी के अनुसार इसका डिजाइन पारंपरिक MRI सिस्टम से अलग है और इसमें कम केबल,
कम बिजली खपत तथा हल्के डिजाइन जैसी विशेषताओं पर काम किया गया है।
3. Voxelgrids की MRI मशीन से स्कैन की कीमत कितनी कम हो सकती है?
अर्जुन अरुणाचलम के अनुसार, तकनीक भविष्य में MRI स्कैन की लागत को करीब 70% तक कम करने में
मदद कर सकती है। यह कंपनी द्वारा बताई गई संभावित कमी है, निश्चित मरीज शुल्क नहीं।
4. रतन टाटा का इस प्रोजेक्ट में क्या योगदान रहा?
अर्जुन अरुणाचलम के अनुसार, Tata Trusts ने शुरुआती दौर में उनकी तकनीक पर
भरोसा जताया और परियोजना को महत्वपूर्ण समर्थन मिला। उन्होंने 2015 में ट्रस्ट से संपर्क किया था।
5. श्रीधर वेम्बू और Zoho ने Voxelgrids की कैसे मदद की?
Zoho के संस्थापक श्रीधर वेम्बू की ओर से भी Voxelgrids को वित्तीय समर्थन मिला,
जिससे कंपनी को स्वदेशी MRI तकनीक विकसित करने का काम जारी रखने में मदद मिली।
6. भारत में स्वदेशी MRI मशीन की जरूरत क्यों है?
महंगे आयातित MRI सिस्टम की वजह से खरीद, रखरखाव और जांच की लागत
अधिक हो सकती है। स्वदेशी और कम लागत वाली तकनीक से
छोटे शहरों तथा अन्य क्षेत्रों में MRI सुविधा बढ़ाने की संभावना है।
7. Voxelgrids की MRI मशीन कहां विकसित हुई?
इस स्वदेशी MRI मशीन को विकसित करने वाली कंपनी Voxelgrids बेंगलुरु स्थित स्टार्टअप है।
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