राकेश शर्मा की रिपोर्ट
गोरखपुर जनपद के दक्षिणांचल क्षेत्र स्थित विकास खंड गोला की ग्राम पंचायत रकौली के राजस्व ग्राम झरकटा-भदौरा में स्थित प्राचीन स्वयंभू झारखंडी महादेव शिवालय एक बार फिर श्रद्धा, भक्ति और सामाजिक समरसता का केंद्र बना। यहां आयोजित दो दिवसीय धार्मिक महोत्सव में हजारों श्रद्धालुओं ने भगवान भोलेनाथ के दर्शन कर जलाभिषेक किया तथा परिवार की सुख-समृद्धि और क्षेत्र की खुशहाली की कामना की। हर वर्ष आयोजित होने वाला यह धार्मिक आयोजन अब पूरे क्षेत्र की धार्मिक पहचान बन चुका है, जिसमें आसपास के गांवों के साथ-साथ दूर-दराज से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं।
24 घंटे तक गूंजता रहा अखंड राम नाम संकीर्तन
धार्मिक आयोजन का शुभारंभ 24 घंटे के अखंड संगीतमय राम नाम संकीर्तन के साथ हुआ। शिवालय परिसर में लगातार गूंजते राम नाम और भगवान शिव की महिमा का गुणगान करते भजनों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। दिन-रात श्रद्धालु भक्ति में लीन होकर भगवान शिव और प्रभु श्रीराम का स्मरण करते रहे। मंदिर परिसर में “हर-हर महादेव” और “जय श्रीराम” के जयघोष लगातार गूंजते रहे, जिससे पूरे क्षेत्र में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता रहा।

वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुआ सामूहिक रुद्राभिषेक
धार्मिक कार्यक्रम के दूसरे दिन वैदिक आचार्यों के मंत्रोच्चार के बीच सामूहिक रुद्राभिषेक का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का गंगाजल, दुग्ध, बेलपत्र, धतूरा, पुष्प, फल और अन्य पूजन सामग्री से विधिवत अभिषेक किया। भक्तों ने अपने परिवार की सुख-शांति, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और क्षेत्र की खुशहाली की कामना करते हुए भोलेनाथ से आशीर्वाद मांगा। पूरे शिवालय परिसर में भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं और श्रद्धा का अद्भुत दृश्य देखने को मिला।
विशाल भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया महाप्रसाद
रुद्राभिषेक के उपरांत विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने महाप्रसाद ग्रहण किया। आयोजन समिति की ओर से भोजन, पेयजल, बैठने की व्यवस्था, प्रसाद वितरण और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा गया। श्रद्धालुओं ने आयोजन की उत्कृष्ट व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि इतने बड़े आयोजन के बावजूद व्यवस्थाएं अनुकरणीय रहीं। पूरे आयोजन के दौरान सेवा भाव का सुंदर उदाहरण देखने को मिला।
मनोज मधुर की भजन संध्या बनी आकर्षण का केंद्र
दो दिवसीय धार्मिक आयोजन का सबसे प्रमुख आकर्षण पूर्वांचल के सुप्रसिद्ध लोक एवं भजन गायक तथा ‘सरयू रत्न’ सम्मान से सम्मानित मनोज मधुर की भजन संध्या रही। उन्होंने भगवान शिव और प्रभु श्रीराम की महिमा का गुणगान करते हुए एक से बढ़कर एक भजन प्रस्तुत किए। उनके भजनों पर श्रद्धालु देर रात तक झूमते रहे। पूरा शिवालय परिसर भक्ति रस में डूब गया और हर ओर भगवान भोलेनाथ के जयघोष सुनाई देते रहे।
युवाओं की सेवा भावना ने जीता सभी का दिल
इस धार्मिक महोत्सव की सफलता के पीछे आयोजन समिति के युवाओं का अथक परिश्रम और समर्पण सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आया। युवाओं ने कई दिनों पहले से ही मंदिर परिसर की साफ-सफाई, आकर्षक सजावट, विद्युत व्यवस्था, पेयजल, श्रद्धालुओं के स्वागत, पार्किंग, यातायात नियंत्रण, सुरक्षा व्यवस्था और महाप्रसाद वितरण जैसी सभी जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा और अनुशासन के साथ निभाया। उनकी सेवा भावना ने आने वाले श्रद्धालुओं का दिल जीत लिया।
इन युवाओं ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
धार्मिक आयोजन को सफल बनाने में नागेंद्र नाथ दूबे (पंकज), सुधांशू दूबे (सत्यम), नितेश तिवारी, कृष्णम तिवारी (भूकंप बाबा), राहुल दूबे, अभय तिवारी, आलोक तिवारी, वैभव दूबे, जयप्रकाश यादव, संजय यादव, करन गुप्ता, आशीष गुप्ता, सत्यपाल यादव, अश्वनी गुप्ता, शिवम गुप्ता, राजपाल, लालविहारी तथा दिनेश यादव सहित अनेक युवाओं ने अपनी सक्रिय भूमिका निभाई। सभी ने टीम भावना के साथ कार्य करते हुए आयोजन को सफल बनाया।
धार्मिक आयोजन से मजबूत हुआ सामाजिक भाईचारा
ग्रामीणों और श्रद्धालुओं का कहना है कि यह आयोजन केवल धार्मिक
अनुष्ठान नहीं बल्कि सामाजिक एकता, भाईचारे और सांस्कृतिक विरासत को
मजबूत करने का माध्यम भी है। इस तरह के धार्मिक कार्यक्रम गांव के लोगों को एक
मंच पर जोड़ते हैं और आपसी प्रेम, सहयोग तथा सामाजिक समरसता को बढ़ावा देते हैं।
यही कारण है कि हर वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है।
क्षेत्र की धार्मिक पहचान बन चुका है स्वयंभू झारखंडी महादेव शिवालय
झरकटा-भदौरा स्थित स्वयंभू झारखंडी महादेव शिवालय आज पूरे क्षेत्र की आस्था का
प्रमुख केंद्र बन चुका है। सावन माह, महाशिवरात्रि तथा अन्य धार्मिक अवसरों पर यहां हजारों
श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। स्थानीय लोगों का अटूट विश्वास है कि यहां सच्चे मन से
मांगी गई हर मनोकामना भगवान शिव अवश्य पूरी करते हैं।
यही आस्था इस मंदिर को दिन-प्रतिदिन अधिक लोकप्रिय और महत्वपूर्ण बनाती जा रही है।
निष्कर्ष
झरकटा-भदौरा के स्वयंभू झारखंडी महादेव शिवालय में आयोजित दो दिवसीय धार्मिक
महोत्सव ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि आस्था, सेवा और सामाजिक एकता भारतीय संस्कृति की
सबसे बड़ी पहचान हैं। अखंड राम नाम संकीर्तन, सामूहिक रुद्राभिषेक,
भव्य भजन संध्या और विशाल भंडारे ने इस आयोजन को यादगार बना दिया।
युवाओं की सक्रिय भागीदारी और ग्रामीणों के सहयोग से यह धार्मिक महोत्सव न केवल सफल रहा
बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक परंपराओं को भी नई ऊर्जा प्रदान कर गया।
read this post :आजमगढ़ में भीषण हादसा: बिजली के पोल से टकराया डीजल टैंकर, विस्फोट में तीन लोगों की जिंदा जलकर मौत