सरकारी ट्यूबवेल बना शोपीस! पानी के लिए तरसे किसान, बाड़ीतरया में नलकूप विभाग के खिलाफ फूटा आक्रोश

राकेश शर्मा की रिपोर्ट

गोरखपुर जनपद के गोला विकास खंड अंतर्गत बाड़ीतरया गांव में वर्षों से खराब पड़े सरकारी ट्यूबवेल ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। धान की खेती के सबसे महत्वपूर्ण समय में सिंचाई व्यवस्था पूरी तरह ठप होने से किसानों में भारी नाराजगी देखने को मिली। सोमवार को बड़ी संख्या में किसान सरकारी ट्यूबवेल परिसर में एकत्र हुए और नलकूप विभाग के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। किसानों ने विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि कई वर्षों से ट्यूबवेल बंद पड़ा है, लेकिन बार-बार शिकायत करने के बावजूद कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया। किसानों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर सिंचाई व्यवस्था बहाल कराने की मांग की।

वर्षों से खराब पड़ा सरकारी ट्यूबवेल बना शोपीस

ग्रामीणों के अनुसार बाड़ीतरया गांव का सरकारी ट्यूबवेल कई वर्षों से खराब पड़ा है। कभी मोटर खराब होने की बात कही जाती है तो कभी तकनीकी समस्या का हवाला देकर मरम्मत टाल दी जाती है। कई बार नलकूप विभाग के अधिकारियों को लिखित और मौखिक शिकायतें दी गईं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन मिला। नतीजा यह है कि करोड़ों रुपये की सरकारी संपत्ति आज शोपीस बनकर रह गई है और किसानों को इसका कोई लाभ नहीं मिल रहा।

धान की खेती पर गहराया सिंचाई संकट

इस समय धान की फसल को नियमित पानी की सबसे अधिक आवश्यकता होती है। किसानों का कहना है कि सरकारी ट्यूबवेल बंद होने से खेतों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पा रहा है। जिन खेतों में धान की रोपाई हो चुकी है, वहां फसल सूखने लगी है, जबकि कई किसान समय पर रोपाई भी नहीं कर पा रहे हैं। यदि जल्द सिंचाई की व्यवस्था नहीं हुई तो धान की पैदावार पर गंभीर असर पड़ सकता है।

छोटे और सीमांत किसान सबसे ज्यादा परेशान

बाड़ीतरया गांव के अधिकांश किसान छोटे और सीमांत वर्ग से जुड़े हैं। उनके पास निजी बोरिंग या अन्य सिंचाई के साधन उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे किसानों को मजबूरी में डीजल पंप किराए पर लेकर खेतों की सिंचाई करनी पड़ रही है। लगातार बढ़ती डीजल कीमतों के कारण खेती की लागत कई गुना बढ़ गई है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति और कमजोर होती जा रही है।

महंगी सिंचाई से बढ़ी खेती की लागत

किसानों का कहना है कि पहले सरकारी ट्यूबवेल से कम खर्च में सिंचाई हो जाती थी, लेकिन अब निजी संसाधनों पर निर्भर होने के कारण प्रति बीघा सिंचाई का खर्च काफी बढ़ गया है। पहले ही बीज, खाद, कीटनाशक और मजदूरी महंगी हो चुकी है। ऐसे में सिंचाई पर अतिरिक्त खर्च किसानों की कमर तोड़ रहा है। यदि यही स्थिति बनी रही तो खेती लाभ का नहीं बल्कि घाटे का सौदा बन जाएगी।

सरकारी योजनाओं और दावों पर उठे सवाल

प्रदर्शन के दौरान किसानों ने कहा कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने, आधुनिक खेती को बढ़ावा देने और हर खेत तक पानी पहुंचाने का दावा करती है, लेकिन जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग है। गांव का सरकारी ट्यूबवेल वर्षों से खराब पड़ा है और संबंधित विभाग इसे ठीक कराने में रुचि नहीं दिखा रहा। किसानों का कहना है कि जब सरकारी सिंचाई योजनाएं ही धरातल पर काम नहीं करेंगी तो किसानों की आय कैसे बढ़ेगी।

प्रदर्शन कर किसानों ने जताया आक्रोश

सोमवार को बड़ी संख्या में किसान सरकारी ट्यूबवेल परिसर में एकत्र हुए और नलकूप विभाग के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। किसानों ने कहा कि यदि समय रहते ट्यूबवेल चालू नहीं किया गया तो उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से मांग की कि जल्द से जल्द तकनीकी टीम भेजकर ट्यूबवेल की मरम्मत कराई जाए और नियमित रखरखाव की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए।

प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग

किसानों ने जिला प्रशासन और नलकूप विभाग से मांग की कि सरकारी ट्यूबवेल को तत्काल चालू कराया जाए ताकि धान की फसल को समय पर पानी मिल सके। किसानों का कहना है कि सिंचाई की समस्या का समाधान केवल अस्थायी मरम्मत से नहीं बल्कि स्थायी व्यवस्था से होना चाहिए। साथ ही गांव के सभी सरकारी ट्यूबवेलों का नियमित निरीक्षण भी कराया जाए ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो।

आंदोलन तेज करने की दी चेतावनी

प्रदर्शन कर रहे किसानों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। किसानों ने कहा कि यह केवल एक गांव का मुद्दा नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र की खेती और किसानों के भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय है। यदि प्रशासन ने

समय रहते समाधान नहीं निकाला तो आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।

*प्रदर्शन में बड़ी संख्या में किसान रहे मौजूद

प्रदर्शन में नागेश्वर यादव, पप्पू यादव, कमलेश, भवानी शंकर, रोहन, गोलू, जय यादव, आर.एस.

यादव, सरवन, दीपक सिंह, बलदाऊ सिंह, संत कुमार यादव, विपिन, महेंद्र कुमार सहित बड़ी

संख्या में किसान शामिल रहे। सभी किसानों ने एक स्वर में सरकारी ट्यूबवेल को

तत्काल चालू कराने और सिंचाई व्यवस्था बहाल करने की मांग उठाई।

निष्कर्ष

बाड़ीतरया गांव का यह मामला केवल एक खराब सरकारी ट्यूबवेल तक

सीमित नहीं है, बल्कि किसानों की आजीविका, धान की खेती और

ग्रामीण सिंचाई व्यवस्था से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। यदि समय रहते नलकूप विभाग और

प्रशासन ने आवश्यक कदम नहीं उठाए तो धान की फसल को भारी नुकसान हो सकता है,

जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति और कमजोर होगी। किसानों की मांग है कि सरकारी

ट्यूबवेल को तत्काल चालू कराया जाए, नियमित रखरखाव सुनिश्चित किया जाए और

भविष्य में ऐसी समस्याओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी कार्ययोजना बनाई जाए।

🔔 ताज़ा और भरोसेमंद खबरों के लिए Fisherman World News को अभी Subscribe करें और

Bell 🔔 Icon दबाकर “All” नोटिफिकेशन ऑन करें, ताकि हर बड़ी खबर सबसे पहले आप तक पहुंचे।

लाइक करें, शेयर करें और अपने दोस्तों तक भी यह जानकारी पहुँचाएँ।

read this post :झरकटा-भदौरा के स्वयंभू झारखंडी महादेव शिवालय में दो दिवसीय धार्मिक आयोजन संपन्न,