ITR Revised Return 2026: रिटर्न में गलती हो गई? जानिए Section 139(5) के तहत कैसे करें संशोधित ITR फाइल

अगर आपने आकलन वर्ष (AY) 2026-27 के लिए अपना आयकर रिटर्न (ITR) समय पर दाखिल कर दिया है, लेकिन बाद में पता चलता है कि किसी आय का विवरण छूट गया, टैक्स क्रेडिट सही दर्ज नहीं हुआ या बैंक खाते की जानकारी में त्रुटि रह गई है, तो चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। आयकर अधिनियम की धारा 139(5) करदाताओं को संशोधित (Revised) आयकर रिटर्न दाखिल करने की सुविधा देती है। इस प्रावधान का उद्देश्य करदाताओं को वास्तविक त्रुटियों को सुधारने का अवसर देना है ताकि भविष्य में अनावश्यक नोटिस या विवाद की संभावना कम हो सके।

क्या होता है Revised ITR?

Revised ITR वह संशोधित आयकर रिटर्न होता है जिसे मूल रिटर्न दाखिल करने के बाद किसी गलती, छूटी हुई जानकारी या गलत विवरण को सुधारने के लिए दाखिल किया जाता है। यदि करदाता को महसूस होता है कि पहले जमा किए गए रिटर्न में कोई त्रुटि रह गई है, तो वह निर्धारित समय सीमा के भीतर संशोधित रिटर्न दाखिल कर सकता है।

यह सुविधा करदाताओं को सही और पूर्ण जानकारी उपलब्ध कराने का अवसर देती है।

किन परिस्थितियों में करें Revised Return?

निम्न स्थितियों में संशोधित ITR दाखिल करना उचित हो सकता है—

  • किसी आय का विवरण छूट जाना।
  • Form 16 और ITR में अंतर होना।
  • Form 26AS, AIS या TIS में उपलब्ध जानकारी का रिटर्न से मेल न खाना।
  • टैक्स क्रेडिट या TDS गलत दर्ज होना।
  • धारा 80C, 80D या अन्य कटौतियां छूट जाना।
  • बैंक खाता या व्यक्तिगत विवरण में त्रुटि होना।
  • किसी निवेश या पूंजीगत लाभ की जानकारी शामिल न होना।

यदि ऐसी कोई गलती सामने आती है तो उसे समय रहते सुधारना बेहतर माना जाता है।

रिवाइज्ड ITR दाखिल करने से पहले क्या जांचें?

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि संशोधित रिटर्न दाखिल करने से पहले सभी वित्तीय दस्तावेजों का मिलान अवश्य करें।

इन दस्तावेजों की जांच करें—

  • Form 16
  • Form 26AS
  • Annual Information Statement (AIS)
  • Taxpayer Information Summary (TIS)
  • बैंक स्टेटमेंट
  • निवेश एवं डिडक्शन से जुड़े दस्तावेज
  • TDS और अग्रिम कर (Advance Tax) का रिकॉर्ड

इन सभी का सही मिलान करने से भविष्य में कर संबंधी विवादों की संभावना कम हो जाती है।

बार-बार Revised Return दाखिल करना क्यों ठीक नहीं?

हालांकि कानून संशोधित रिटर्न की अनुमति देता है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि बार-बार ITR संशोधित करने से बचना चाहिए।

यदि मूल और संशोधित रिटर्न के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है या कई बार बदलाव किए जाते हैं, तो आयकर विभाग अतिरिक्त जांच कर सकता है। इसलिए सभी दस्तावेजों की सावधानीपूर्वक जांच करने के बाद ही संशोधित रिटर्न दाखिल करना बेहतर होता है।

AI आधारित जांच पर बढ़ा जोर

आयकर विभाग अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा एनालिटिक्स और ऑटोमैटिक डेटा मैचिंग सिस्टम का व्यापक उपयोग कर रहा है। विभाग बैंकिंग लेनदेन, TDS, निवेश, संपत्ति, शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड और अन्य वित्तीय जानकारियों का मिलान विभिन्न स्रोतों से प्राप्त डेटा के साथ करता है।

यदि रिटर्न में दी गई जानकारी उपलब्ध रिकॉर्ड से मेल नहीं खाती, तो करदाता को स्पष्टीकरण या नोटिस प्राप्त हो सकता है।

सही जानकारी देना क्यों जरूरी है?

विशेषज्ञों का कहना है कि आयकर रिटर्न में हमेशा सही और पारदर्शी जानकारी देना सबसे सुरक्षित तरीका है। जानबूझकर गलत जानकारी देने या आय छिपाने की स्थिति में आयकर कानून के तहत कार्रवाई हो सकती है।

इसलिए यदि गलती का पता चल जाए तो निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार संशोधित रिटर्न दाखिल कर उसे सुधार लेना बेहतर विकल्प माना जाता है।

संशोधित रिटर्न दाखिल करने के फायदे

  • गलतियों को समय रहते सुधारने का अवसर मिलता है।
  • टैक्स नोटिस की संभावना कम हो सकती है।
  • सही टैक्स क्रेडिट का लाभ मिलता है।
  • रिफंड में अनावश्यक देरी से बचा जा सकता है।
  • आयकर रिकॉर्ड अधिक सटीक और पारदर्शी रहता है।

निष्कर्ष

यदि AY 2026-27 के लिए दाखिल किए गए ITR में किसी भी प्रकार की गलती या छूटी हुई जानकारी का पता चलता है, तो घबराने की आवश्यकता नहीं है। आयकर अधिनियम की धारा 139(5) के तहत संशोधित रिटर्न दाखिल कर त्रुटियों को सुधारा जा सकता है। हालांकि ऐसा करने से पहले Form 16, AIS, TIS, Form 26AS और अन्य दस्तावेजों का अच्छी तरह मिलान करना आवश्यक है। सही और पारदर्शी जानकारी देने से भविष्य में कर संबंधी समस्याओं और नोटिस के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

FAQ

Q1. Revised ITR क्या होता है?
उत्तर: यह मूल आयकर रिटर्न में हुई गलती या छूटी जानकारी को सुधारने के लिए दाखिल किया जाने वाला संशोधित रिटर्न है।

Q2. किस धारा के तहत Revised Return दाखिल किया जाता है?
उत्तर: आयकर अधिनियम की धारा 139(5) के तहत।

Q3. Revised Return दाखिल करने से पहले कौन-कौन से दस्तावेज जांचने चाहिए?
उत्तर: Form 16, Form 26AS, AIS, TIS, बैंक स्टेटमेंट और निवेश संबंधी दस्तावेज।

Q4. क्या बार-बार Revised Return दाखिल करना सही है?
उत्तर: विशेषज्ञों के अनुसार बार-बार संशोधन से बचना चाहिए, क्योंकि बड़े अंतर होने पर अतिरिक्त जांच हो सकती है।

Q5. क्या आयकर विभाग AI से जांच करता है?
उत्तर: हां, आयकर विभाग अब AI, डेटा एनालिटिक्स और ऑटोमैटिक डेटा मैचिंग सिस्टम के माध्यम से रिटर्न की जांच करता है।

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