राकेश शर्मा की रिपोर्ट
गोरखपुर से बड़ी खबर
उत्तर प्रदेश में लेखपालों की लंबित मांगों को लेकर एक बार फिर आंदोलन की आहट तेज हो गई है। गोरखपुर में उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ ने अपनी विभिन्न लंबित और न्यायोचित मांगों को लेकर गोला तहसील के उपजिलाधिकारी मनीष कुमार के माध्यम से राजस्व परिषद अध्यक्ष के नाम ज्ञापन सौंपा। संघ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि 5 अगस्त 2026 तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो प्रदेशभर के लेखपाल चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेंगे। पहले चरण में अतिरिक्त कार्यों का बहिष्कार किया जाएगा, जिससे राजस्व विभाग की कई सेवाओं पर असर पड़ सकता है।
वर्षों से लंबित मांगों पर बढ़ा असंतोष
लेखपाल संघ का कहना है कि प्रदेश के लेखपाल लगातार बढ़ते कार्यभार और सीमित संसाधनों के बीच अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं। एक-एक लेखपाल को कई गांवों का कार्यभार संभालना पड़ रहा है, जिससे भूमि अभिलेखों का रखरखाव, सरकारी योजनाओं का सत्यापन, नामांतरण, भूमि विवादों का निस्तारण और अन्य राजस्व कार्य समय पर पूरे करना चुनौतीपूर्ण हो गया है।
संघ का आरोप है कि लंबे समय से विभिन्न मांगें शासन स्तर पर लंबित हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। इससे कर्मचारियों में असंतोष लगातार बढ़ रहा है।
ज्ञापन में उठाई गई प्रमुख मांगें
लेखपाल संघ ने ज्ञापन के माध्यम से कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं। इनमें प्रमुख रूप से—
- अंतरमंडलीय स्थानांतरण के लिए ऑनलाइन पोर्टल दोबारा खोला जाए।
- इच्छुक लेखपालों को गृह मंडल में स्थानांतरण का अवसर दिया जाए।
- चयन वर्ष 2025-26 की लंबित पदोन्नति सूची जारी की जाए।
- चयन वर्ष 2024 के नव नियुक्त लेखपालों की विभागीय परीक्षा का परिणाम घोषित किया जाए।
- प्रशिक्षण प्रमाणपत्र शीघ्र जारी किए जाएं।
- स्टेशनरी, वाहन एवं विशेष भत्ते में वृद्धि की जाए।
- भूलेख कार्यालयों एवं अन्य पटलों से संबद्ध लेखपालों को कार्यमुक्त किया जाए।
- ग्राम सचिवालयों में पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध कराए बिना रोस्टर ड्यूटी समाप्त की जाए।
संघ का कहना है कि इन मांगों के पूरा होने से केवल कर्मचारियों को ही नहीं बल्कि पूरी राजस्व व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
5 अगस्त से अतिरिक्त कार्यों के बहिष्कार की चेतावनी
लेखपाल संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि 5 अगस्त तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो प्रदेशभर में अतिरिक्त कार्यों का बहिष्कार किया जाएगा। इस दौरान लेखपाल केवल अपने मूल हल्के का कार्य करेंगे और अतिरिक्त हल्कों, ऑनलाइन कार्यों तथा अन्य प्रशासनिक जिम्मेदारियों का निर्वहन नहीं करेंगे।
संघ ने कहा कि यदि इससे राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है तो इसकी जिम्मेदारी शासन और संबंधित अधिकारियों की होगी।
तहसील अध्यक्ष अजय पाठक के नेतृत्व में सौंपा गया ज्ञापन
गोला तहसील में आयोजित कार्यक्रम में तहसील अध्यक्ष अजय पाठक के नेतृत्व में बड़ी संख्या में लेखपाल उपस्थित रहे। इस दौरान सुरेंद्र पटेल, वीरेंद्र कुमार, पृथ्वीनाथ, महेंद्र गुप्ता सहित अन्य पदाधिकारियों और सदस्यों ने ज्ञापन सौंपते हुए मांगों के शीघ्र समाधान की मांग की।
आम जनता पर पड़ सकता है असर
यदि प्रस्तावित आंदोलन शुरू होता है तो राजस्व विभाग से जुड़े कई कार्य प्रभावित हो सकते हैं। आय, जाति और निवास प्रमाणपत्रों का सत्यापन, नामांतरण, भूमि संबंधी अभिलेख, सरकारी योजनाओं का सत्यापन तथा अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं में देरी होने की संभावना है। इससे आम नागरिकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
शासन के सामने बड़ी चुनौती
अब सभी की निगाहें उत्तर प्रदेश सरकार और राजस्व परिषद पर टिकी हैं। यदि 5 अगस्त से पहले लेखपाल संघ की मांगों पर वार्ता या समाधान नहीं निकलता है तो आंदोलन का दायरा बढ़ सकता है, जिसका असर प्रदेशभर की राजस्व व्यवस्था पर देखने को मिल सकता है।
निष्कर्ष
उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ का प्रस्तावित आंदोलन केवल कर्मचारियों की मांगों तक सीमित नहीं है,
बल्कि इसका सीधा प्रभाव आम जनता को मिलने वाली राजस्व सेवाओं पर भी पड़ सकता है। ऐसे में समय रहते
समाधान निकालना शासन और राजस्व विभाग दोनों के लिए महत्वपूर्ण होगा। आने वाले दिनों में सरकार और
लेखपाल संघ के बीच होने वाली बातचीत इस पूरे घटनाक्रम की दिशा तय करेगी।
📌 इस खबर में जानिए: ✅ लेखपालों की प्रमुख मांगें क्या हैं? ✅ किन सरकारी सेवाओं पर पड़ सकता है असर? ✅ आंदोलन को लेकर प्रशासन का क्या रुख है?
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