राकेश शर्मा की रिपोर्ट
गोरखपुर में चोरी के मामले में छह दिन बाद दर्ज हुई एफआईआर
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के गोला कस्बे में लाखों रुपये की चोरी के मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। पीड़ित द्वारा समय पर तहरीर देने के बावजूद पुलिस ने छह दिन तक मुकदमा दर्ज नहीं किया। व्यापार मंडल द्वारा विरोध जताने और आंदोलन की चेतावनी देने के बाद पुलिस ने आखिरकार एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की। इसके बाद क्षेत्राधिकारी (सीओ) गोला ने स्वयं घटनास्थल का निरीक्षण किया और जल्द खुलासे का भरोसा दिलाया।
घटना ने स्थानीय व्यापारियों और आम नागरिकों के बीच कानून व्यवस्था तथा सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है। व्यापारियों का कहना है कि यदि समय पर कार्रवाई होती तो अपराधियों तक पहुंचना आसान हो सकता था।
खाटूश्याम यात्रा से लौटे तो घर में मिली चोरी
पीड़ित राजकुमार कसौधन के अनुसार वह 20 जुलाई को अपने परिवार के साथ खाटूश्याम और बालाजी दर्शन के लिए घर से बाहर गए थे। 24 जुलाई को पड़ोसियों ने फोन कर घर के मुख्य दरवाजे के टूटे होने की सूचना दी।
परिवार जब वापस लौटा तो घर के कमरे और अलमारी के ताले टूटे मिले। पीड़ित के अनुसार घर से सोने के आभूषण, मंगलसूत्र, चांदी के सिक्के तथा लगभग 1.30 लाख रुपये नकद गायब थे।
घटना की सूचना तत्काल पुलिस को दी गई और अगले दिन लिखित तहरीर भी सौंपी गई, लेकिन मुकदमा दर्ज नहीं किया गया।
व्यापार मंडल के हस्तक्षेप के बाद दर्ज हुई एफआईआर
एफआईआर दर्ज न होने से व्यापारियों में नाराजगी बढ़ती गई। व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने थाना प्रभारी और क्षेत्राधिकारी को ज्ञापन सौंपकर तत्काल मुकदमा दर्ज करने तथा चोरी का खुलासा करने की मांग की।
व्यापारियों ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा। इसके बाद पुलिस ने मामले में मुकदमा दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई।
सीओ गोला ने किया घटनास्थल का निरीक्षण
एफआईआर दर्ज होने के बाद क्षेत्राधिकारी गोला पीड़ित के घर पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने टूटे हुए दरवाजे, कमरों और अलमारी का बारीकी से अवलोकन किया तथा घटना से जुड़े तथ्यों की जानकारी ली।
पुलिस अधिकारियों ने पीड़ित परिवार को भरोसा दिलाया कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और जल्द ही चोरी का खुलासा करने का प्रयास किया जाएगा।
तकनीकी साक्ष्य भी जुटा रही पुलिस
पुलिस आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है। साथ ही सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्य और अन्य उपलब्ध सुरागों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
अधिकारियों का कहना है कि सभी संभावित पहलुओं की जांच की जा रही है और
किसी भी संदिग्ध व्यक्ति को जांच के दायरे से बाहर नहीं रखा जाएगा।
व्यापारियों में बढ़ी असुरक्षा की भावना
गोला कस्बे में लगातार हो रही चोरी की घटनाओं से व्यापारियों में असुरक्षा की भावना बढ़ रही है।
व्यापारियों का कहना है कि यदि अपराधों पर समय रहते कार्रवाई नहीं होगी तो अपराधियों के
हौसले और बुलंद होंगे। उन्होंने रात्रि गश्त बढ़ाने, संवेदनशील इलाकों में पुलिस की नियमित मौजूदगी
सुनिश्चित करने और चोरी की घटनाओं का शीघ्र खुलासा करने की मांग की है।
दूसरे चोरी के मामले में भी एफआईआर का इंतजार
व्यापारियों का कहना है कि यह पहला मामला नहीं है जिसमें एफआईआर दर्ज करने में देरी हुई हो।
जानकारी के अनुसार बेवरी चौराहे पर एक चाय दुकान में हुई चोरी के मामले में भी
पीड़ित द्वारा तहरीर दिए जाने के बाद लंबे समय तक मुकदमा दर्ज नहीं हुआ।
इस कारण स्थानीय लोगों में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
हालांकि इस मामले में पुलिस की आधिकारिक स्थिति अलग हो सकती है और संबंधित जांच प्रक्रिया जारी हो सकती है।
कानून व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
लगातार चोरी की घटनाओं और एफआईआर दर्ज करने में देरी के कारण
स्थानीय लोगों में पुलिस की कार्यशैली को लेकर चर्चा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि संपत्ति संबंधी अपराधों में समय पर एफआईआर दर्ज होने और
शुरुआती जांच तेजी से शुरू होने पर कई मामलों में सुराग मिलने की संभावना अधिक रहती है।
प्रशासन से व्यापारियों की प्रमुख मांगें
व्यापारियों ने प्रशासन से मांग की है कि—
- रात्रि गश्त बढ़ाई जाए।
- बाजार क्षेत्रों में पुलिस की नियमित निगरानी हो।
- चोरी की घटनाओं का शीघ्र खुलासा किया जाए।
- संदिग्ध व्यक्तियों की नियमित जांच हो।
- व्यापारिक क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाए।
निष्कर्ष
गोरखपुर के गोला कस्बे में हुई चोरी के मामले में छह दिन बाद एफआईआर दर्ज होने से
पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हैं। व्यापार मंडल के हस्तक्षेप के बाद जांच में
तेजी आई और सीओ ने स्वयं घटनास्थल का निरीक्षण किया।
अब स्थानीय लोगों और व्यापारियों की नजर पुलिस जांच पर है। यदि जल्द खुलासा होता है तो
इससे लोगों का भरोसा मजबूत होगा, वहीं भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए
सुरक्षा व्यवस्था को और प्रभावी बनाने की आवश्यकता भी महसूस की जा रही है।
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