कांवड़ यात्रा में दिखी सेवा, श्रद्धा और परिवार के प्रति समर्पण
सावन की पावन कांवड़ यात्रा के दौरान इस बार मेरठ में आस्था के साथ सेवा और पारिवारिक सम्मान की एक अनोखी तस्वीर देखने को मिली। नोएडा के सेक्टर-5 हरौला निवासी हिमांशु चौहान अपनी 75 वर्षीय नानी रूपरानी को कांवड़ के एक पलड़े में बैठाकर हरिद्वार से दिल्ली तक पैदल यात्रा कर रहे हैं। इस अनूठी यात्रा ने श्रद्धालुओं और राहगीरों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है।
एक पलड़े में नानी, दूसरे में 55 लीटर गंगाजल
हिमांशु चौहान ने 19 जुलाई को हरिद्वार से यात्रा शुरू की। कांवड़ के एक ओर उनकी नानी रूपरानी बैठी हैं, जिनका वजन लगभग 45 किलोग्राम बताया गया है, जबकि दूसरे पलड़े में करीब 55 लीटर गंगाजल से भरे कलश रखे गए हैं। पूरी कांवड़ का वजन लगभग एक क्विंटल है, जिसे हिमांशु और उनके मौसेरे भाई प्रिंस राघव बारी-बारी से अपने कंधों पर उठाकर यात्रा पूरी कर रहे हैं।
परिवार के सभी सदस्य निभा रहे हैं अपनी भूमिका
इस यात्रा में केवल दो भाई ही नहीं, बल्कि पूरा परिवार साथ चल रहा है। बहन लक्ष्मी लगातार पंखे से दोनों भाइयों और अपनी नानी को हवा करती रहती हैं, जबकि अन्य परिजन भी यात्रा में सहयोग कर रहे हैं। यह दृश्य लोगों के लिए श्रद्धा, सेवा और पारिवारिक मूल्यों का प्रेरणादायक उदाहरण बन गया है।
मेरठ में हुआ भव्य स्वागत
जब यह अनोखी कांवड़ यात्रा मेरठ के पल्लवपुरम क्षेत्र से होकर गुजरी, तो स्थानीय लोगों ने शिवभक्तों का फूल-मालाओं से स्वागत किया। बड़ी संख्या में लोगों ने इस अनूठी यात्रा को देखा और शिवभक्तों के सेवा भाव की सराहना की। सोशल मीडिया पर भी इस यात्रा के वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं।
कांवड़ यात्रा केवल आस्था नहीं, सेवा का भी संदेश
कांवड़ यात्रा को भगवान शिव के प्रति भक्ति का प्रतीक माना जाता है,
लेकिन हिमांशु चौहान और उनके परिवार ने इसे सेवा और सम्मान का भी
माध्यम बना दिया है। अपनी बुजुर्ग नानी को कांवड़ में बैठाकर यात्रा कराना
कई लोगों को श्रवण कुमार की कथा की याद दिला रहा है। इस यात्रा ने यह संदेश दिया है कि
परिवार के बुजुर्गों का सम्मान और सेवा भारतीय संस्कृति की अमूल्य परंपरा है।
सोशल मीडिया पर मिल रही सराहना
जैसे-जैसे इस यात्रा की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं,
लोग हिमांशु और उनके परिवार की जमकर प्रशंसा कर रहे हैं। कई लोग इसे आस्था,
संस्कार और पारिवारिक समर्पण का अनूठा उदाहरण बता रहे हैं।
निष्कर्ष
मेरठ से सामने आई यह अनोखी कांवड़ यात्रा केवल धार्मिक आस्था की कहानी नहीं,
बल्कि सेवा, सम्मान और पारिवारिक मूल्यों की प्रेरक मिसाल भी है।
हिमांशु चौहान और उनके परिवार ने यह संदेश दिया है कि सच्ची
भक्ति केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं होती, बल्कि अपने बुजुर्गों की सेवा और सम्मान में भी निहित होती है।
FAQ
प्रश्न 1: कांवड़ में किसे बैठाकर यात्रा कराई जा रही है?
उत्तर: नोएडा निवासी हिमांशु चौहान अपनी 75 वर्षीय नानी रूपरानी को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से दिल्ली तक पदयात्रा करा रहे हैं।
प्रश्न 2: कांवड़ का कुल वजन कितना है?
उत्तर: कांवड़ का कुल वजन लगभग एक क्विंटल बताया गया है, जिसमें एक ओर नानी और दूसरी ओर 55 लीटर गंगाजल रखा गया है।
प्रश्न 3: यात्रा कब शुरू हुई?
उत्तर: यह यात्रा 19 जुलाई को हरिद्वार से शुरू हुई।
प्रश्न 4: इस यात्रा में कौन-कौन शामिल हैं?
उत्तर: हिमांशु चौहान, उनके मौसेरे भाई प्रिंस राघव, बहन लक्ष्मी और परिवार के अन्य सदस्य यात्रा में शामिल हैं।
प्रश्न 5: यह यात्रा क्यों चर्चा में है?
उत्तर: क्योंकि इसमें एक युवक अपनी बुजुर्ग नानी को कांवड़ में बैठाकर पैदल यात्रा करा रहा है, जिसे लोग सेवा और श्रद्धा की अनोखी मिसाल मान रहे हैं।
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