‘चलो संसद’ मार्च से पहले आया बड़ा बयान
सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षाविद सोनम वांगचुक ने 20 जुलाई को प्रस्तावित ‘चलो संसद’ मार्च से पहले बड़ा बयान देते हुए कहा है कि वे अपना अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल समाप्त करने के लिए तैयार हैं, लेकिन इसके लिए सरकार और राजनीतिक नेतृत्व को कुछ महत्वपूर्ण शर्तें पूरी करनी होंगी। उनका कहना है कि यह आंदोलन केवल किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही, युवाओं के भविष्य और लोकतांत्रिक संवाद का आंदोलन है।
इस बीच दिल्ली में ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान जंतर-मंतर और संसद मार्ग के आसपास भारी सुरक्षा व्यवस्था की गई। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच तनाव की खबरें भी सामने आईं।
पहली शर्त: शिक्षा व्यवस्था की जवाबदेही स्वीकार करे सरकार
सोनम वांगचुक ने कहा कि यदि केंद्र सरकार देश की शिक्षा व्यवस्था में कथित कमियों और विफलताओं की जिम्मेदारी स्वीकार करती है तथा सुधार की दिशा में स्पष्ट कदम उठाने का भरोसा देती है, तो वे अपना अनशन समाप्त करने पर विचार करेंगे। उनका कहना है कि लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर सरकार को स्पष्ट जवाबदेही दिखानी चाहिए।
दूसरी शर्त: संसद में उठाए जाएं शिक्षा से जुड़े मुद्दे
उन्होंने कहा कि यदि विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता उनसे मिलकर यह भरोसा दें कि उनके द्वारा उठाए गए शिक्षा और युवाओं से जुड़े मुद्दों को संसद के मानसून सत्र में गंभीरता से उठाया जाएगा, तब भी वे अपना अनशन समाप्त कर देंगे। वांगचुक का कहना है कि उद्देश्य टकराव नहीं बल्कि संसद के माध्यम से समाधान निकालना है।
तीसरी शर्त: लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान
सोनम वांगचुक ने दावा किया कि उनकी आवाजाही, संवाद और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाया गया है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए ताकि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का अवसर मिल सके। उन्होंने यह भी इच्छा जताई कि यदि उनकी स्वास्थ्य स्थिति अनुमति देती है तो उन्हें अस्पताल से निकलकर ‘चलो संसद’ मार्च में शामिल होने दिया जाए।
अस्पताल से सरकार को लिखा पत्र
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, वांगचुक ने अस्पताल प्रशासन को पत्र लिखकर कहा कि उनकी तबीयत अब बेहतर है और उन्हें प्रदर्शन में शामिल होने की अनुमति दी जाए। उनका कहना है कि वे स्वयं मार्च में शामिल होकर प्रदर्शनकारियों का मनोबल बढ़ाना चाहते हैं।
दिल्ली में ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान बढ़ा तनाव
सोमवार को संसद के मानसून सत्र के पहले दिन हजारों प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पर एकत्र हुए। पुलिस ने मार्च की अनुमति नहीं दी थी। प्रदर्शनकारियों के संसद की ओर बढ़ने की कोशिश के दौरान सुरक्षा बलों ने उन्हें रोकने का प्रयास किया। कई स्थानों पर धक्का-मुक्की और तनाव की स्थिति बनी। कुछ मीडिया रिपोर्टों में लाठीचार्ज और हिरासत की खबरें आईं, जबकि दिल्ली पुलिस ने बल प्रयोग के आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि स्थिति को पेशेवर तरीके से संभाला गया।
अभिजीत दीपके ने खत्म किया अनशन
आंदोलन से जुड़े सीजेपी (Cockroach Janta Party) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोनम वांगचुक के अनुरोध पर अपना भूख हड़ताल समाप्त कर दिया। हालांकि वांगचुक ने स्पष्ट किया कि उनका अनशन तब तक जारी रहेगा जब तक उनकी रखी गई शर्तों में से कोई एक पूरी नहीं होती।
$आंदोलन का उद्देश्य
आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि उनका अभियान शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता,
युवाओं के लिए रोजगार और सरकार की जवाबदेही जैसे मुद्दों पर केंद्रित है। उनका दावा है कि
वे लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को संसद और सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं।
निष्कर्ष
सोनम वांगचुक ने स्पष्ट किया है कि वे अपनी भूख हड़ताल समाप्त करने के लिए तैयार हैं, लेकिन इसके लिए
उन्होंने तीन प्रमुख शर्तें रखी हैं। उनका कहना है कि आंदोलन का उद्देश्य सरकार से संवाद और शिक्षा व्यवस्था में
जवाबदेही सुनिश्चित करना है। दूसरी ओर, ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही और
घटनाक्रम पर पूरे देश की नजर बनी हुई है। आगे की स्थिति सरकार,
राजनीतिक दलों और आंदोलनकारियों के बीच होने वाले संवाद पर निर्भर करेगी।
FAQ
प्रश्न 1: सोनम वांगचुक ने भूख हड़ताल खत्म करने के लिए क्या कहा है?
उत्तर: उन्होंने कहा कि यदि उनकी तीन प्रमुख शर्तों में से कोई एक पूरी होती है तो
वे अनशन समाप्त करने पर विचार करेंगे।
प्रश्न 2: उनकी मुख्य मांगें क्या हैं?
उत्तर: शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही, संसद में शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा और लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान।
प्रश्न 3: ‘चलो संसद’ मार्च कब हुआ?
उत्तर: संसद के मानसून सत्र के पहले दिन, 20 जुलाई को।
प्रश्न 4: क्या सोनम वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त कर दिया है?
उत्तर: उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने अनशन समाप्त नहीं किया है और कहा है कि उनकी निर्धारित शर्तें पूरी होने पर ही वे इसे समाप्त करेंगे।
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