नेपाल की बारिश से बढ़ा बाढ़ का खतरा: राप्ती, सरयू और गंडक उफान पर, पूर्वांचल के 5 जिले हाई अलर्ट पर

नेपाल की बारिश का असर पूर्वांचल की नदियों पर

नेपाल और तराई क्षेत्र में लगातार हो रही भारी बारिश का असर अब उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में साफ दिखाई देने लगा है। राप्ती, सरयू, गंडक, रोहिनी और अन्य नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। गोरखपुर, बस्ती, सिद्धार्थनगर, संतकबीरनगर, कुशीनगर, महराजगंज और देवरिया समेत कई जिलों में प्रशासन ने बाढ़ को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है। हालांकि अधिकांश नदियां अभी खतरे के निशान से नीचे बह रही हैं, लेकिन लगातार बढ़ते जलस्तर ने तटवर्ती गांवों की चिंता बढ़ा दी है।

किन जिलों पर सबसे ज्यादा खतरा?

सबसे अधिक प्रभाव सिद्धार्थनगर, संतकबीरनगर, कुशीनगर, देवरिया और महराजगंज के नदी किनारे बसे इलाकों में देखा जा रहा है। इन जिलों के कई गांव हर साल मानसून के दौरान बाढ़ से प्रभावित होते हैं। इस बार भी नेपाल में लगातार वर्षा होने के कारण प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी तेज कर दी है और राहत-बचाव टीमों को अलर्ट मोड पर रखा है।

राप्ती नदी खतरे के निशान के करीब

सिद्धार्थनगर जिले में राप्ती नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। जलस्तर खतरे के निशान से कुछ मीटर नीचे पहुंच चुका है। इसके अलावा कूड़ा, घोघी और बानगंगा नदियों में भी पानी बढ़ने से कटान और जलभराव की आशंका बढ़ गई है। डुमरियागंज, बांसी, शोहरतगढ़, इटवा और नौगढ़ क्षेत्र के लोगों को विशेष सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

गंडक में छोड़ा गया लाखों क्यूसेक पानी

नेपाल के वाल्मीकिनगर बैराज से गंडक नदी में बड़ी मात्रा में पानी छोड़े जाने के बाद कुशीनगर और आसपास के इलाकों में जलस्तर तेजी से बढ़ा है। कई निचले गांवों के खेतों में पानी भर गया है और किसानों की फसलें प्रभावित होने लगी हैं। प्रशासन लगातार हालात की निगरानी कर रहा है।

तटबंधों पर बढ़ाई गई निगरानी

सिंचाई विभाग, बाढ़ खंड और जिला प्रशासन ने सभी संवेदनशील तटबंधों पर निगरानी बढ़ा दी है। कहीं भी रिसाव या कटान की सूचना मिलने पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। राहत सामग्री, नाव और बचाव दल भी तैयार रखे गए हैं ताकि जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके।

किसानों और ग्रामीणों की बढ़ी चिंता

लगातार बढ़ते जलस्तर से किसानों की धान, मक्का और सब्जियों की फसल पर खतरा मंडराने लगा है। नदी किनारे बसे गांवों के लोगों को आशंका है कि यदि नेपाल में बारिश जारी रही और नदियों में और पानी छोड़ा गया तो बाढ़ की स्थिति गंभीर हो सकती है। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और सरकारी निर्देशों का पालन करने की अपील की है।

प्रशासन की अपील

जिलाधिकारियों ने नदी किनारे रहने वाले लोगों से सतर्क रहने, अनावश्यक रूप से नदी के पास न जाने और मौसम व बाढ़ संबंधी आधिकारिक सूचनाओं पर नजर रखने की सलाह दी है। आपदा प्रबंधन विभाग भी लगातार हालात की समीक्षा कर रहा है।

निष्कर्ष

नेपाल में जारी भारी बारिश का असर पूर्वांचल की नदियों पर लगातार बढ़ रहा है।

फिलहाल अधिकांश नदियां खतरे के

निशान से नीचे हैं, लेकिन जलस्तर में तेजी से हो रही वृद्धि को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है।

यदि बारिश का सिलसिला जारी रहा तो आने वाले दिनों में बाढ़ का खतरा और बढ़ सकता है।

FAQ

Q1. किन नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है?
उत्तर: राप्ती, सरयू, गंडक, रोहिनी सहित कई नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है।

Q2. बाढ़ का सबसे ज्यादा खतरा किन जिलों में है?
उत्तर: सिद्धार्थनगर, संतकबीरनगर, कुशीनगर, देवरिया और महराजगंज सहित पूर्वांचल के कई जिलों में।

Q3. जलस्तर बढ़ने का मुख्य कारण क्या है?
उत्तर: नेपाल और तराई क्षेत्र में लगातार हो रही भारी बारिश तथा बैराजों से छोड़ा गया पानी।

Q4. क्या नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं?
उत्तर: फिलहाल अधिकांश नदियां खतरे के निशान से नीचे हैं, लेकिन जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है।

Q5. प्रशासन ने क्या तैयारी की है?
उत्तर: तटबंधों पर निगरानी बढ़ाई गई है, राहत-बचाव दल, नाव और आवश्यक संसाधन तैयार रखे गए हैं।

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