सरयू नदी का जलस्तर बढ़ा, 158 गांवों पर बाढ़ का खतरा, 24 गांव सबसे ज्यादा संवेदनशील

सरयू का उफान: चेतावनी बिंदु से महज 1 मीटर नीचे जलस्तर, 158 गांवों पर बाढ़ का खतरा, 24 गांव अब भी बिना तटबंध के

बस्ती। मानसून की सक्रियता के साथ ही सरयू नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। नदी का पानी तेजी से बढ़ने के कारण अब जलस्तर चेतावनी बिंदु से मात्र एक मीटर नीचे पहुंच गया है। इसे देखते हुए प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। हर्रैया तहसील के दुबौलिया और विक्रमजोत ब्लॉक के माझा क्षेत्र के 158 गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। वहीं, 24 से अधिक गांव अब भी तटबंध विहीन हैं, जिससे स्थानीय लोगों की चिंता और बढ़ गई है।

हर साल मानसून के दौरान सरयू नदी का जलस्तर बढ़ने से माझा क्षेत्र के गांव बाढ़ की चपेट में आ जाते हैं। इस बार भी हालात तेजी से उसी दिशा में बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर निगरानी बढ़ा दी है, लेकिन अधूरी बाढ़ सुरक्षा परियोजनाएं लोगों की चिंता का बड़ा कारण बनी हुई हैं।

चेतावनी बिंदु के बेहद करीब पहुंचा जलस्तर

सरयू नदी में लगातार बढ़ रहे जलप्रवाह के कारण नदी का जलस्तर तेजी से ऊपर आ रहा है। जलस्तर अब चेतावनी बिंदु से सिर्फ एक मीटर नीचे रह गया है। यदि बारिश का सिलसिला जारी रहा तो आने वाले दिनों में नदी खतरे के निशान के करीब पहुंच सकती है।

जलस्तर बढ़ने के साथ ही नदी के किनारे बसे गांवों में दहशत का माहौल है। ग्रामीण अपने घरों, पशुओं और खेती को लेकर चिंतित हैं। प्रशासन भी लगातार जलस्तर की निगरानी कर रहा है और संबंधित विभागों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।

158 गांवों पर मंडरा रहा बाढ़ का खतरा

हर्रैया तहसील के दुबौलिया और विक्रमजोत ब्लॉक के माझा क्षेत्र के लगभग 158 गांव बाढ़ की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील माने जाते हैं। नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ इन गांवों में खतरा और गहरा गया है।

इन क्षेत्रों के लोगों की आजीविका मुख्य रूप से खेती और पशुपालन पर निर्भर है। बाढ़ आने की स्थिति में फसलें, घर, सड़कें और अन्य बुनियादी सुविधाएं प्रभावित हो सकती हैं। इसलिए ग्रामीण लगातार प्रशासन की तैयारियों पर नजर बनाए हुए हैं।

16 बाढ़ चौकियां की गईं सक्रिय

संभावित बाढ़ को देखते हुए प्रशासन ने तटबंधों और संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी के लिए 16 बाढ़ चौकियां सक्रिय कर दी हैं।

इन चौकियों पर तैनात कर्मचारी जलस्तर, तटबंधों की स्थिति और नदी के बहाव पर लगातार नजर रख रहे हैं। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए संबंधित विभागों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। साथ ही राहत एवं बचाव कार्यों की तैयारियों की भी समीक्षा की जा रही है।

चार बाढ़ सुरक्षा परियोजनाएं अब भी अधूरी

बाढ़ सुरक्षा के लिए प्रस्तावित छह परियोजनाओं में से केवल दो परियोजनाओं पर ही कार्य पूरा हो सका है। शेष चार परियोजनाएं अब भी अधूरी पड़ी हैं।

इन अधूरी परियोजनाओं के कारण कई गांवों को अभी तक स्थायी सुरक्षा नहीं मिल पाई है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सभी परियोजनाएं पूरी कर दी जातीं तो

बाढ़ के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता था।

24 से अधिक गांव आज भी तटबंध विहीन

सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि दुबौलिया और विक्रमजोत ब्लॉक के

24 से अधिक गांव आज भी बिना तटबंध के हैं।

ऐसे गांव हर साल सरयू नदी के बढ़ते जलस्तर का सबसे पहले सामना करते हैं।

तटबंध न होने के कारण नदी का पानी सीधे गांवों में प्रवेश कर सकता है, जिससे

जान-माल का बड़ा नुकसान होने की आशंका बनी रहती है।

ग्रामीण लंबे समय से तटबंध निर्माण की मांग कर रहे हैं,

लेकिन कई परियोजनाएं अभी तक अधूरी हैं।

ग्रामीणों में बढ़ी चिंता, प्रशासन से सुरक्षा की मांग

नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए ग्रामीणों में चिंता का माहौल है।

लोगों का कहना है कि हर वर्ष बाढ़ के कारण

उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। फसलें बर्बाद होती हैं, मकानों को

नुकसान पहुंचता है और कई बार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पलायन करना पड़ता है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से तटबंध निर्माण कार्य जल्द पूरा कराने, राहत सामग्री की पर्याप्त व्यवस्था करने और

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में समय रहते आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।

प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की

प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और

केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें। जलस्तर में लगातार वृद्धि को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है और

किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए राहत एवं बचाव दल तैयार रखे गए हैं।

लोगों से कहा गया है कि यदि जलस्तर और बढ़ता है तो प्रशासन द्वारा जारी

निर्देशों का पालन करें तथा सुरक्षित स्थानों पर जाने में सहयोग करें।

निष्कर्ष

सरयू नदी का लगातार बढ़ता जलस्तर बस्ती जिले के दुबौलिया और विक्रमजोत ब्लॉक के

158 गांवों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है। चेतावनी बिंदु से केवल

एक मीटर नीचे पहुंचा जलस्तर संभावित बाढ़ का संकेत दे रहा है।

हालांकि प्रशासन ने 16 बाढ़ चौकियां सक्रिय कर दी हैं, लेकिन अधूरी बाढ़ सुरक्षा परियोजनाएं और

24 से अधिक तटबंध विहीन गांव अभी भी बड़े खतरे का सामना कर रहे हैं।

ऐसे में समय रहते प्रभावी तैयारी और

सतर्कता ही संभावित नुकसान को कम करने का सबसे बेहतर उपाय होगी

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