2020 दिल्ली दंगा मामले में बड़ा फैसला,
साल 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े सबसे चर्चित मामलों में से एक, आईबी (इंटेलिजेंस ब्यूरो) कर्मचारी अंकित शर्मा हत्याकांड में दिल्ली की विशेष अदालत ने पूर्व आम आदमी पार्टी (AAP) पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच आरोपियों को दोषी करार दिया है। यह फैसला दिल्ली दंगा मामलों में हत्या के मामले में पहली बड़ी दोषसिद्धि माना जा रहा है। अदालत ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर ताहिर हुसैन को हत्या, दंगा, सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाने और अन्य गंभीर धाराओं में दोषी माना।
AAP ने कहा- 2020 में ही पार्टी से कर दिया था निलंबित,
अदालत के फैसले के बाद आम आदमी पार्टी ने ताहिर हुसैन से खुद को अलग बताते हुए कहा कि जब वर्ष 2020 में उनका नाम दिल्ली दंगा मामले में सामने आया था, तभी उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया गया था। पार्टी का कहना है कि उसका इस मामले से कोई संबंध नहीं है और कानून अपना काम कर रहा है।
AAP ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी आरोपी के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए और पार्टी किसी भी प्रकार की हिंसा या अपराध का समर्थन नहीं करती।
क्या है अंकित शर्मा हत्याकांड?
फरवरी 2020 में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान उत्तर-पूर्वी दिल्ली में सांप्रदायिक हिंसा भड़क गई थी। इसी दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के कर्मचारी अंकित शर्मा लापता हो गए थे। अगले दिन उनका शव एक नाले से बरामद हुआ था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उनके शरीर पर कई गंभीर चोटों के निशान पाए गए थे।
यह मामला दिल्ली दंगों के सबसे चर्चित मामलों में शामिल रहा और कई वर्षों तक अदालत में सुनवाई चलती रही। अब अदालत ने विस्तृत सुनवाई के बाद ताहिर हुसैन सहित पांच आरोपियों को दोषी करार दिया है, जबकि कुछ अन्य आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी किया गया।
ताहिर हुसैन का राजनीतिक सफर और कानूनी लड़ाई,
ताहिर हुसैन वर्ष 2020 में आम आदमी पार्टी के पार्षद थे। दंगा मामले में नाम आने के बाद उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया गया था। बाद के वर्षों में उन्होंने दूसरी राजनीतिक पार्टी का रुख किया, लेकिन दंगा और हत्या से जुड़े मामलों की सुनवाई लगातार जारी रही।
अदालत के ताजा फैसले के बाद उनके खिलाफ दोषसिद्धि दर्ज हो चुकी है। हालांकि भारतीय कानून के तहत दोषी करार दिए गए व्यक्ति को उच्च अदालत में फैसले के खिलाफ अपील करने का अधिकार प्राप्त है। फिलहाल सजा (Sentence) पर अदालत द्वारा अलग से सुनवाई की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
फैसले का राजनीतिक और कानूनी महत्व,
दिल्ली दंगों के मामलों में यह फैसला बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह हत्या के मामले में पहली बड़ी दोषसिद्धि है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले का असर दंगों से जुड़े अन्य लंबित मामलों पर भी पड़ सकता है।
वहीं राजनीतिक स्तर पर भी इस फैसले के बाद बयानबाजी तेज हो गई है।
हालांकि अदालत का फैसला उपलब्ध साक्ष्यों और सुनवाई के
आधार पर दिया गया है तथा आगे की कानूनी प्रक्रिया अभी जारी रहेगी।
मुख्य बातें,
- दिल्ली की विशेष अदालत ने ताहिर हुसैन समेत पांच लोगों को दोषी करार दिया।
- मामला IB अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या से जुड़ा है।
- AAP ने कहा कि ताहिर हुसैन को 2020 में ही पार्टी से निलंबित कर दिया गया था।
- यह 2020 दिल्ली दंगों के हत्या मामलों में पहली बड़ी दोषसिद्धि मानी जा रही है।
- दोषियों को सजा पर अलग से सुनवाई के बाद फैसला सुनाया जाएगा।
- दोषसिद्धि के खिलाफ उच्च अदालत में अपील का कानूनी अधिकार उपलब्ध है।
FAQ,
1. ताहिर हुसैन को किस मामले में दोषी ठहराया गया है?
उन्हें 2020 दिल्ली दंगों के दौरान आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया है।
2. AAP ने क्या प्रतिक्रिया दी है?
AAP ने कहा कि ताहिर हुसैन को वर्ष 2020 में ही पार्टी से निलंबित कर दिया गया था और
पार्टी का उनसे कोई संबंध नहीं है।
3. यह फैसला क्यों महत्वपूर्ण माना जा रहा है?
इसे 2020 दिल्ली दंगों के हत्या मामलों में पहली बड़ी दोषसिद्धि माना जा रहा है।
4. क्या ताहिर हुसैन अब अपील कर सकते हैं?
हाँ। भारतीय कानून के अनुसार दोषसिद्धि के खिलाफ उच्च अदालत में अपील की जा सकती है।
5. अंकित शर्मा कौन थे?
अंकित शर्मा इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) में कार्यरत अधिकारी थे, जिनकी फरवरी 2020 के दिल्ली दंगों के दौरान हत्या हुई थी
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