लखनऊ में साइबर ठगी के बड़े रैकेट का पर्दाफाश
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में साइबर अपराध का एक बड़ा मामला सामने आया है। पुलिस ने समिट बिल्डिंग में संचालित एक फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ करते हुए करोड़ों रुपये की अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी का खुलासा किया है। जांच एजेंसियों के अनुसार यह गिरोह विदेशी नागरिकों, खासकर अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाकर डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाता था और उनसे करोड़ों रुपये की ठगी करता था।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस नेटवर्क के जरिए करीब 250 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की गई है। मामले की जांच लगातार जारी है और पुलिस कई अहम सुराग जुटा रही है।
12वीं पास आरोपी बनते थे FBI अधिकारी
जांच में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि गिरफ्तार किए गए 80 से अधिक आरोपियों में अधिकांश केवल 10वीं या 12वीं पास हैं। इसके बावजूद वे विदेशी लहजे में अंग्रेजी बोलकर खुद को FBI, पुलिस अधिकारी या अन्य अमेरिकी जांच एजेंसियों का अधिकारी बताते थे।
आरोपी अमेरिकी नागरिकों को फोन कर कहते थे कि उनके बैंक खाते, सोशल सिक्योरिटी नंबर या पहचान पत्र का गलत इस्तेमाल हुआ है। इसके बाद उन्हें “डिजिटल अरेस्ट” का डर दिखाकर बैंक खातों से बड़ी रकम ट्रांसफर करवा ली जाती थी।
अहमदाबाद का मास्टरमाइंड चला रहा था पूरा नेटवर्क
पुलिस जांच के अनुसार इस अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह का मास्टरमाइंड गुजरात के अहमदाबाद का रहने वाला बताया जा रहा है। उसी के निर्देश पर लखनऊ से पूरे नेटवर्क का संचालन किया जा रहा था।
जांच एजेंसियां अब इस गिरोह के अन्य राज्यों और विदेशों में फैले नेटवर्क की भी पड़ताल कर रही हैं। पुलिस को आशंका है कि इस रैकेट से कई और लोग जुड़े हो सकते हैं।
पुलिस और जांच एजेंसियां जुटीं नेटवर्क खंगालने में
पुलिस ने कॉल सेंटर से कंप्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल फोन, हार्ड डिस्क और कई डिजिटल उपकरण जब्त किए हैं। इनकी फोरेंसिक जांच के जरिए यह पता लगाया जा रहा है कि ठगी का पैसा किन-किन खातों में भेजा गया और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोग कौन हैं।
अधिकारियों का कहना है कि यह हाल के वर्षों में सामने आए सबसे बड़े साइबर फ्रॉड मामलों में से एक हो सकता है। जांच पूरी होने के बाद कई और बड़े खुलासे होने की संभावना है।
डिजिटल अरेस्ट से कैसे बचें?
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि कोई भी सरकारी एजेंसी, पुलिस, CBI, FBI या अन्य
जांच एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर किसी व्यक्ति को “डिजिटल अरेस्ट” नहीं करती।
यदि कोई व्यक्ति खुद को अधिकारी बताकर पैसे ट्रांसफर करने, बैंक खाते की
जानकारी देने या वीडियो कॉल पर धमकाने की कोशिश करे तो तुरंत कॉल काट दें और
इसकी सूचना राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 या स्थानीय पुलिस को दें।
लखनऊ का यह मामला दिखाता है कि साइबर अपराधी
अब अत्याधुनिक तकनीक और मनोवैज्ञानिक दबाव का
इस्तेमाल कर लोगों को निशाना बना रहे हैं। इसलिए किसी भी अनजान कॉल, वीडियो कॉल या
सरकारी अधिकारी बनकर किए गए दावे पर बिना पुष्टि किए विश्वास न करें।
सतर्कता ही साइबर ठगी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।
FAQ
प्रश्न 1: यह मामला कहां का है?
उत्तर: लखनऊ की समिट बिल्डिंग में संचालित फर्जी कॉल सेंटर का।
प्रश्न 2: कितनी ठगी का खुलासा हुआ है?
उत्तर: प्रारंभिक जांच में 250 करोड़ रुपये से अधिक की साइबर ठगी सामने आई है।
प्रश्न 3: आरोपी किस तरह लोगों को ठगते थे?
उत्तर: वे खुद को FBI या अन्य जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाते थे।
प्रश्न 4: इस गिरोह का मास्टरमाइंड कहां का है?
उत्तर: पुलिस के अनुसार मास्टरमाइंड गुजरात के अहमदाबाद का रहने वाला है।
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