उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में कथित बंधुआ मजदूरी का मामला लगातार नए खुलासे कर रहा है। फैक्ट्री से मुक्त कराए गए औरैया निवासी शिवम ने अपनी आपबीती सुनाते हुए ऐसे आरोप लगाए हैं, जिन्हें सुनकर हर कोई सन्न रह गया। शिवम के अनुसार, फैक्ट्री में मजदूरों से लगभग 20 घंटे तक लगातार काम कराया जाता था, उन्हें सिर्फ डेढ़ घंटे की नींद मिलती थी और भागने की कोशिश करने पर पिटबुल कुत्तों से डराया जाता था। पुलिस ने इस मामले में छापेमारी कर कई मजदूरों को मुक्त कराया है और दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि मुख्य आरोपी की तलाश जारी है।
शिवम ने सुनाई रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी
औरैया के रहने वाले शिवम ने बताया कि उन्हें नौकरी, अच्छे वेतन और रहने-खाने की सुविधा का झांसा देकर मुजफ्फरनगर की फैक्ट्री में लाया गया था। वहां पहुंचने के बाद उनका मोबाइल फोन छीन लिया गया और बाहर निकलने की पूरी तरह मनाही थी।
शिवम का आरोप है कि मजदूरों को रोज सुबह करीब चार बजे से आधी रात तक काम कराया जाता था। आराम के नाम पर मुश्किल से डेढ़ घंटे की नींद मिलती थी। यदि कोई थकान या बीमारी की बात करता तो उसके साथ मारपीट की जाती थी। मजदूरों का कहना है कि फैक्ट्री में डर का ऐसा माहौल था कि कोई विरोध करने की हिम्मत नहीं जुटा पाता था।
भागने की कोशिश पर पिटबुल और मारपीट का डर
पीड़ित मजदूरों ने आरोप लगाया कि फैक्ट्री परिसर में पिटबुल कुत्ते रखे गए थे ताकि कोई मजदूर भागने की कोशिश न करे। उनके अनुसार, विरोध करने वालों को लोहे की रॉड, डंडों और अन्य वस्तुओं से पीटा जाता था। कई मजदूरों के शरीर पर पुराने और नए चोटों के निशान भी मिले हैं, जिनकी पुष्टि मेडिकल जांच में होने की बात पुलिस ने कही है।
मजदूरों का यह भी आरोप है कि उन्हें पर्याप्त भोजन नहीं दिया जाता था। कई बार उन्हें केवल सूखी रोटी या बेहद खराब गुणवत्ता का खाना दिया जाता था। लंबे समय तक परिवार से संपर्क भी नहीं करने दिया गया, जिससे वे पूरी तरह बाहरी दुनिया से कट गए थे।
एक मजदूर के भागने से खुला पूरा राज
पूरे मामले का खुलासा तब हुआ, जब राजस्थान के जोधपुर निवासी एक मजदूर किसी तरह फैक्ट्री से भागकर पुलिस तक पहुंच गया। उसने पुलिस को पूरी घटना की जानकारी दी, जिसके बाद श्रम विभाग, पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम ने फैक्ट्री पर छापा मारा।
छापेमारी के दौरान कई मजदूरों को वहां से मुक्त कराया गया।
पुलिस ने मौके से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया और
फैक्ट्री मालिक सहित अन्य लोगों के खिलाफ बंधुआ मजदूरी, अवैध बंधक बनाकर रखने,
मारपीट और अन्य गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया। जांच अभी भी जारी है।
पुलिस जांच में सामने आ रहे नए तथ्य
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, शुरुआती जांच में मजदूरों के आरोप गंभीर पाए गए हैं।
मेडिकल परीक्षण में कई मजदूरों के शरीर पर चोट के निशान मिले हैं। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि
मजदूरों को किन राज्यों से लाया गया और इस कथित गिरोह का नेटवर्क कितना बड़ा था।
फैक्ट्री से मुक्त कराए गए मजदूर उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, हरियाणा,
उत्तराखंड, छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों के बताए जा रहे हैं। प्रशासन ने
सभी पीड़ितों की सुरक्षा और पुनर्वास की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
मुजफ्फरनगर की इस फैक्ट्री से सामने आई कथित बंधुआ मजदूरी की कहानी बेहद भयावह है।
पीड़ित शिवम और अन्य मजदूरों के आरोप यदि जांच में सही साबित होते हैं, तो
यह श्रमिक शोषण के सबसे गंभीर मामलों में से एक माना जाएगा।
फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी है।
अंतिम निष्कर्ष न्यायिक और पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
FAQs
Q1. मुजफ्फरनगर फैक्ट्री मामले में शिवम ने क्या आरोप लगाए हैं?
शिवम ने आरोप लगाया कि मजदूरों से लगभग 20 घंटे काम कराया जाता था,
केवल डेढ़ घंटे सोने दिया जाता था और भागने पर पिटबुल कुत्तों से डराया जाता था।
Q2. इस मामले का खुलासा कैसे हुआ?
एक मजदूर के फैक्ट्री से भागकर पुलिस तक पहुंचने के बाद प्रशासन ने छापा मारकर मजदूरों को मुक्त कराया।
Q3. पुलिस ने क्या कार्रवाई की है?
पुलिस ने कई मजदूरों को मुक्त कराया, दो आरोपियों को गिरफ्तार किया और मुख्य आरोपी की तलाश जारी है।
Q4. क्या मजदूरों के आरोपों की पुष्टि हो गई है?
पुलिस जांच जारी है। मेडिकल जांच में कई मजदूरों के शरीर पर
चोट के निशान मिलने की जानकारी सामने आई है, लेकिन अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
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