गोरखपुर के परिषदीय विद्यालयों में नए शैक्षिक सत्र से बच्चों की नियमित पढ़ाई सुनिश्चित करने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने नई व्यवस्था लागू की है। अब सभी विद्यालयों में विद्यार्थियों की कम से कम 80 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य रहेगी। इतना ही नहीं, यदि कोई छात्र लगातार दो दिन तक स्कूल नहीं आता है, तो संबंधित शिक्षक स्वयं उसके घर पहुंचकर अनुपस्थिति का कारण जानेंगे और अभिभावकों से बातचीत कर बच्चे को नियमित विद्यालय भेजने के लिए प्रेरित करेंगे।
यह पहल केवल नामांकन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों की नियमित पढ़ाई, सीखने की गुणवत्ता और ड्रॉपआउट रोकने पर भी विशेष ध्यान देने के उद्देश्य से शुरू की गई है।
80 प्रतिशत उपस्थिति होगी अनिवार्य
बेसिक शिक्षा विभाग के अनुसार इस शैक्षिक सत्र में जिले के करीब 2,400 परिषदीय विद्यालयों में लगभग ढाई लाख विद्यार्थी नामांकित हैं। विभाग ने सभी विद्यालयों को निर्देश दिया है कि बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाए और प्रत्येक छात्र की पढ़ाई पर लगातार निगरानी रखी जाए।
अधिकारियों का कहना है कि केवल नामांकन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। यदि बच्चे नियमित विद्यालय नहीं आएंगे तो उनकी सीखने की क्षमता और शैक्षणिक गुणवत्ता प्रभावित होगी।
दो दिन अनुपस्थित रहे तो घर जाएंगे शिक्षक
नई व्यवस्था के तहत यदि कोई बच्चा लगातार दो दिन तक विद्यालय नहीं आता है, तो संबंधित शिक्षक उसके घर जाकर यह जानकारी लेंगे कि अनुपस्थिति का कारण क्या है।
शिक्षक अभिभावकों से मुलाकात कर बच्चों को नियमित विद्यालय भेजने का आग्रह करेंगे और शिक्षा के महत्व के बारे में भी जागरूक करेंगे। आवश्यकता पड़ने पर स्थानीय स्तर पर भी सहयोग लिया जाएगा ताकि कोई भी बच्चा पढ़ाई से दूर न हो।
नामांकन के साथ पढ़ाई पर भी रहेगा फोकस
बेसिक शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस बार लक्ष्य केवल अधिक से अधिक बच्चों का नामांकन करना नहीं, बल्कि उनकी नियमित उपस्थिति सुनिश्चित कर पढ़ाई की गुणवत्ता में सुधार लाना भी है।
इसी उद्देश्य से विद्यालय खुलने के पहले दिन से ही शिक्षकों को विद्यार्थियों की उपस्थिति पर विशेष नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।
अभिभावकों की भूमिका होगी महत्वपूर्ण
शिक्षा विभाग का मानना है कि बच्चों की नियमित पढ़ाई तभी संभव है जब अभिभावक भी सहयोग करें।
यदि बच्चा किसी कारणवश विद्यालय नहीं जा रहा है तो परिवार को समय रहते विद्यालय प्रशासन को इसकी जानकारी देनी चाहिए। साथ ही बच्चों को प्रतिदिन समय पर विद्यालय भेजने की जिम्मेदारी भी अभिभावकों की होगी।
बेसिक शिक्षा अधिकारी ने क्या कहा?
गोरखपुर के बेसिक शिक्षा अधिकारी धीरेंद्र त्रिपाठी ने कहा कि विभाग का उद्देश्य केवल बच्चों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि उनकी नियमित पढ़ाई सुनिश्चित करना है।
उन्होंने बताया कि इसी उद्देश्य से 80 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य की गई है।
यदि कोई बच्चा लगातार दो दिन तक अनुपस्थित रहता है तो शिक्षक उसके घर
जाकर कारण जानेंगे और उसे नियमित विद्यालय आने के लिए प्रेरित करेंगे।
इस पहल से क्या होगा फायदा?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस व्यवस्था से कई सकारात्मक परिणाम सामने आ सकते हैं—
- विद्यालयों में नियमित उपस्थिति बढ़ेगी।
- ड्रॉपआउट दर कम होगी।
- बच्चों की सीखने की क्षमता में सुधार होगा।
- अभिभावकों और विद्यालय के बीच बेहतर संवाद बनेगा।
- शिक्षा की गुणवत्ता मजबूत होगी।
गोरखपुर में परिषदीय विद्यालयों के लिए लागू की गई 80 प्रतिशत अनिवार्य उपस्थिति की
व्यवस्था शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
अब यदि कोई बच्चा लगातार दो दिन स्कूल नहीं पहुंचेगा तो
शिक्षक स्वयं उसके घर जाकर कारण जानेंगे और परिवार को
नियमित शिक्षा के महत्व के बारे में जागरूक करेंगे। विभाग को उम्मीद है कि
इससे नामांकन के साथ-साथ नियमित पढ़ाई और सीखने के स्तर में भी सुधार होगा।
FAQ
प्रश्न 1. गोरखपुर में विद्यार्थियों के लिए कितनी उपस्थिति अनिवार्य की गई है?
परिषदीय विद्यालयों में कम से कम 80 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य की गई है।
प्रश्न 2. यदि कोई बच्चा लगातार दो दिन स्कूल नहीं आए तो क्या होगा?
संबंधित शिक्षक उसके घर जाकर अनुपस्थिति का कारण जानेंगे और अभिभावकों से बातचीत करेंगे।
प्रश्न 3. इस व्यवस्था का उद्देश्य क्या है?
बच्चों की नियमित पढ़ाई सुनिश्चित करना, उपस्थिति बढ़ाना और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना।
प्रश्न 4. जिले में कितने परिषदीय विद्यालय हैं?
गोरखपुर जिले में लगभग 2,400 परिषदीय विद्यालय हैं, जिनमें करीब ढाई लाख विद्यार्थी नामांकित हैं
read this post :राजभर का अखिलेश यादव पर बड़ा हमला, बोले- ‘सपा आई तो बहुजन समाज पर अत्याचार बढ़ेंगे’