डॉक्टर का नंबर तलाशना पड़ा महंगा
उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में साइबर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। एक व्यक्ति को गूगल पर डॉक्टर का नंबर सर्च करना भारी पड़ गया। इलाज संबंधी जानकारी लेने के लिए इंटरनेट पर नंबर खोजने के दौरान वह साइबर ठगों के जाल में फंस गया और उसके खाते से 1.25 लाख रुपये निकल गए। यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि इंटरनेट पर उपलब्ध हर जानकारी भरोसेमंद नहीं होती।
पीड़ित ने डॉक्टर से संपर्क करने के उद्देश्य से गूगल पर नंबर तलाशा था। लेकिन वहां मिले एक कथित नंबर पर संपर्क करने के बाद ठगों ने उसे अपने झांसे में ले लिया। इसके बाद कुछ ही समय में उसके बैंक खाते से बड़ी रकम निकाल ली गई।
फर्जी नंबर और साइबर जाल का शिकार हुआ व्यक्ति
जानकारी के अनुसार पीड़ित ने डॉक्टर का नंबर समझकर जिस मोबाइल नंबर पर संपर्क किया, वह साइबर ठगों का निकला। बातचीत के दौरान ठगों ने विश्वास जीतने के लिए खुद को संबंधित सेवा से जुड़ा व्यक्ति बताया। इसके बाद उन्होंने विभिन्न बहानों से बैंकिंग और डिजिटल भुगतान से जुड़ी जानकारी हासिल करने की कोशिश की।
साइबर अपराधी लगातार नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। कई बार गूगल सर्च रिजल्ट में फर्जी मोबाइल नंबर या नकली संपर्क विवरण भी दिखाई देते हैं, जिनके जरिए ठग लोगों तक पहुंच जाते हैं। इस मामले में भी ऐसा ही होने की आशंका जताई जा रही है।
खाते से निकल गए 1.25 लाख रुपये
पीड़ित को तब ठगी का एहसास हुआ जब उसके मोबाइल पर बैंक खाते से रकम कटने के संदेश आने लगे। कुछ ही देर में उसके खाते से कुल 1.25 लाख रुपये निकल गए। रकम गायब होने के बाद पीड़ित के होश उड़ गए और उसने संबंधित अधिकारियों से शिकायत की।
मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस और साइबर सेल को सूचना दी गई। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान नंबर पर भरोसा करने से पहले उसकी पुष्टि अवश्य करें और बैंकिंग संबंधी जानकारी किसी के साथ साझा न करें।
तेजी से बढ़ रहे हैं साइबर अपराध
डिजिटल इंडिया के दौर में ऑनलाइन सेवाओं का उपयोग तेजी से बढ़ा है। लोग अस्पताल, होटल, बैंक और अन्य सेवाओं के नंबर इंटरनेट पर खोजते हैं। इसी का फायदा उठाकर साइबर ठग फर्जी नंबर और नकली प्रोफाइल बनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी संस्था, अस्पताल या डॉक्टर का नंबर खोजते समय केवल आधिकारिक वेबसाइट या प्रमाणित स्रोतों का ही उपयोग करना चाहिए।
संदिग्ध लिंक और अज्ञात नंबरों से सावधान रहना बेहद जरूरी है।
साइबर ठगी से बचने के लिए अपनाएं ये उपाय
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार कभी भी किसी अनजान व्यक्ति को ओटीपी, यूपीआई पिन,
बैंक खाता विवरण या कार्ड संबंधी जानकारी नहीं देनी चाहिए। यदि कोई व्यक्ति फोन पर बैंक कर्मचारी,
डॉक्टर या सरकारी अधिकारी बनकर जानकारी मांगता है तो पहले उसकी सत्यता की जांच अवश्य करें।
इसके अलावा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की स्थिति में तुरंत बैंक और
साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए। समय रहते
शिकायत करने पर कई मामलों में रकम रिकवर होने की संभावना बढ़ जाती है।
प्रशासन ने जारी की चेतावनी
घटना के बाद प्रशासन और साइबर सेल ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
अधिकारियों का कहना है कि ऑनलाइन नंबर खोजते समय सावधानी बरतें और
किसी भी तरह के डिजिटल भुगतान या बैंकिंग प्रक्रिया के दौरान पूरी सतर्कता रखें।
कुशीनगर की यह घटना इस बात का उदाहरण है कि एक छोटी सी लापरवाही भी
बड़ी आर्थिक हानि का कारण बन सकती है। इसलिए
इंटरनेट का उपयोग करते समय जागरूकता और सावधानी बेहद जरूरी है।
FAQ
कुशीनगर में साइबर ठगी का मामला क्या है?
एक व्यक्ति ने गूगल पर डॉक्टर का नंबर खोजा और कथित
फर्जी नंबर के संपर्क में आने के बाद उसके खाते से 1.25 लाख रुपये निकल गए।
पीड़ित के खाते से कितनी रकम निकाली गई?
पीड़ित के खाते से लगभग 1.25 लाख रुपये की रकम निकल गई।
साइबर ठगी से कैसे बचा जा सकता है?
ओटीपी, यूपीआई पिन और बैंकिंग जानकारी किसी से साझा न करें तथा केवल आधिकारिक स्रोतों से संपर्क विवरण प्राप्त करें।
साइबर ठगी होने पर क्या करें?
तुरंत बैंक को सूचित करें और राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।
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