Telegram Ban पर केजरीवाल का केंद्र सरकार पर हमला
NEET UG 2026 री-टेस्ट से पहले Telegram पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को लेकर राजनीति तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और पूर्व दिल्ली मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार के फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार पेपर लीक रोकने में विफल रही है और अब ऐसे कदम उठा रही है जिनसे आम लोगों को परेशानी हो रही है।
क्या बोले अरविंद केजरीवाल?
केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि “मोदी सरकार की पेपर लीक रोकने की कोई मंशा नहीं है। इसलिए ऐसे अजीब फैसले लिए जा रहे हैं। सेना के जहाजों से पेपर भेजना और Telegram बंद करना क्या पेपर लीक रोक देगा? बिल्कुल नहीं।” उनके इस बयान के बाद Telegram Ban पर नई राजनीतिक बहस शुरू हो गई है।
NEET री-टेस्ट से पहले क्यों लगाया गया Telegram Ban?
केंद्र सरकार ने Telegram पर 22 जून तक अस्थायी प्रतिबंध लगाया है। सरकार का दावा है कि कुछ चैनलों और ग्रुप्स के माध्यम से NEET परीक्षा के कथित लीक पेपर, फर्जी प्रश्नपत्र और भ्रामक जानकारी प्रसारित की जा रही थी। सरकार का कहना है कि इससे लाखों छात्रों को गुमराह किया जा सकता था और परीक्षा की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती थी।
दिल्ली हाई कोर्ट ने भी बरकरार रखा फैसला
Telegram ने केंद्र सरकार के आदेश को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। हालांकि अदालत ने सरकार के फैसले को बरकरार रखते हुए Telegram की याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने माना कि परीक्षा की निष्पक्षता और छात्रों के हितों की रक्षा करना सर्वोच्च प्राथमिकता है। अदालत ने कहा कि सरकार द्वारा प्रस्तुत तथ्यों के आधार पर यह कदम उचित माना जा सकता है।
15 करोड़ से ज्यादा यूजर्स प्रभावित
भारत Telegram का सबसे बड़ा बाजार माना जाता है। रिपोर्ट्स के अनुसार देश में 15 करोड़ से अधिक लोग Telegram का उपयोग करते हैं। प्रतिबंध के कारण छात्रों, शिक्षकों, कारोबारियों, कंटेंट क्रिएटर्स और सामान्य उपयोगकर्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ा है। Telegram के संस्थापक पावेल ड्यूरोव ने भी इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि इससे करोड़ों निर्दोष उपयोगकर्ताओं को नुकसान हुआ है।
विपक्ष ने उठाए डिजिटल अधिकारों के सवाल
Telegram Ban को लेकर केवल अरविंद केजरीवाल ही नहीं बल्कि कई विपक्षी नेताओं और डिजिटल अधिकार समूहों ने भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि कुछ गलत तत्वों की वजह से पूरे प्लेटफॉर्म को बंद करना उचित नहीं है।
आलोचकों का तर्क है कि इससे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और डिजिटल अधिकार प्रभावित होते हैं।
सरकार का पक्ष क्या है?
केंद्र सरकार ने अदालत में कहा कि Telegram का उपयोग केवल
परीक्षा संबंधी फर्जीवाड़े तक सीमित नहीं है। सरकार ने दावा किया कि कुछ मामलों में
प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल अवैध गतिविधियों और संवेदनशील सामग्री के
प्रसार के लिए भी किया गया है। सरकार के अनुसार परीक्षा माफिया Telegram के जरिए
छात्रों को ठगने और फर्जी पेपर बेचने का काम कर रहे थे।
छात्रों के लिए क्या संदेश?
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी प्रतियोगी परीक्षा के दौरान
सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली सामग्री पर आंख बंद करके भरोसा नहीं करना चाहिए।
छात्रों को केवल आधिकारिक स्रोतों और NTA द्वारा जारी सूचनाओं पर ही
विश्वास करना चाहिए। फर्जी पेपर और अफवाहें छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर सकती हैं।
Telegram Ban को लेकर देश में बहस लगातार जारी है। एक तरफ केंद्र सरकार
इसे परीक्षा की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम बता रही है, वहीं दूसरी ओर
अरविंद केजरीवाल सहित विपक्षी नेता इसे सरकार की विफलता छिपाने का प्रयास बता रहे हैं।
फिलहाल दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के बाद Telegram पर प्रतिबंध
22 जून तक जारी रहेगा और सभी की नजरें NEET UG 2026 री-टेस्ट पर टिकी हुई हैं।
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