परिसीमन (Delimitation) बिल क्या है? मोदी सरकार को दो-तिहाई बहुमत की जरूरत क्यों पड़ रही है?

क्या है परिसीमन (Delimitation)?

परिसीमन का अर्थ है लोकसभा और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं तथा सीटों का पुनर्निर्धारण करना। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि बढ़ती जनसंख्या के अनुसार प्रत्येक सांसद और विधायक लगभग समान संख्या में लोगों का प्रतिनिधित्व करे। भारत में परिसीमन का कार्य समय-समय पर गठित परिसीमन आयोग द्वारा किया जाता है।

परिसीमन की जरूरत क्यों पड़ती है?

देश के विभिन्न राज्यों में जनसंख्या वृद्धि की दर अलग-अलग रही है। कई क्षेत्रों में आबादी तेजी से बढ़ी है जबकि कुछ राज्यों में जनसंख्या नियंत्रण बेहतर रहा है। ऐसे में पुराने निर्वाचन क्षेत्र जनसंख्या के अनुपात में असंतुलित हो जाते हैं। परिसीमन का उद्देश्य इस असंतुलन को दूर कर लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व को अधिक न्यायसंगत बनाना है।

1971 की जनगणना के आधार पर क्यों जमी हुई थीं सीटें?

संविधान संशोधनों के माध्यम से 1976 में लोकसभा और विधानसभा सीटों के बंटवारे को 1971 की जनगणना के आधार पर स्थिर कर दिया गया था। बाद में 2001 के 84वें संविधान संशोधन द्वारा यह व्यवस्था 2026 के बाद होने वाली पहली जनगणना तक बढ़ा दी गई। इसका उद्देश्य राज्यों को जनसंख्या नियंत्रण के लिए प्रोत्साहित करना था।

Delimitation Bill 2026 में क्या प्रस्ताव है?

2026 के परिसीमन विधेयक में परिसीमन आयोग गठित करने, लोकसभा और विधानसभा सीटों के पुनर्विन्यास तथा निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएं तय करने का प्रावधान किया गया है। प्रस्तावित बदलावों के तहत लोकसभा की अधिकतम सीटें बढ़ाकर 850 तक करने का विचार भी सामने आया है।

दो-तिहाई बहुमत की जरूरत क्यों है?

परिसीमन से जुड़े कुछ प्रस्ताव संविधान में बदलाव की मांग करते हैं। संविधान संशोधन विधेयक पारित करने के लिए संसद में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई समर्थन की आवश्यकता होती है। इसी कारण सरकार को साधारण बहुमत से अधिक, यानी विशेष बहुमत की जरूरत पड़ती है। अप्रैल 2026 में पेश किया गया संविधान संशोधन विधेयक आवश्यक दो-तिहाई समर्थन प्राप्त नहीं कर सका था।

दक्षिणी राज्यों को क्यों है चिंता?

तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में आशंका है कि यदि सीटों का पुनर्वितरण केवल जनसंख्या के आधार पर हुआ तो उत्तर भारत के अधिक आबादी वाले राज्यों को अधिक सीटें मिल सकती हैं और

दक्षिणी राज्यों का संसद में सापेक्ष प्रतिनिधित्व घट सकता है। यही वजह है कि

परिसीमन देश की सबसे बड़ी राजनीतिक बहसों में से एक बन गया है।

उत्तर भारत के राज्यों को क्या फायदा हो सकता है?

विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे

अधिक जनसंख्या वाले राज्यों को अतिरिक्त सीटें मिल सकती हैं। हालांकि अंतिम निर्णय

परिसीमन आयोग और संसद की प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।

महिलाओं के आरक्षण से भी जुड़ा है मामला

परिसीमन बहस महिलाओं के लिए संसद और विधानसभाओं में आरक्षण लागू करने के

मुद्दे से भी जुड़ी रही है। कुछ प्रस्तावों में महिलाओं के आरक्षण को परिसीमन प्रक्रिया से

जोड़कर देखा गया था, जिससे राजनीतिक विवाद और बढ़ गया।

परिसीमन बिल केवल सीटों की संख्या बढ़ाने का मामला नहीं है, बल्कि यह भारत के

राजनीतिक प्रतिनिधित्व, संघीय ढांचे और राज्यों के बीच शक्ति संतुलन से जुड़ा बड़ा मुद्दा है। यही कारण है कि

इसे लेकर संसद से लेकर राज्यों तक व्यापक चर्चा चल रही है। आने वाले समय में यह तय करेगा कि

भारत की लोकतांत्रिक संरचना अगले कई दशकों तक किस रूप में काम करेगी।

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