महाराष्ट्र की राजनीति में नया भूचाल
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा होता दिखाई दे रहा है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के कई सांसदों के दिल्ली पहुंचने के बाद पार्टी में संभावित टूट की अटकलें तेज हो गई हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उद्धव ठाकरे गुट के 9 सांसदों में से 6 से 7 सांसद अलग समूह बनाने या एकनाथ शिंदे गुट के साथ जाने की तैयारी में हैं।
दिल्ली पहुंचे बागी सांसद
सूत्रों के अनुसार कई सांसद मंगलवार रात और बुधवार सुबह दिल्ली पहुंचे। इन सांसदों के लोकसभा अध्यक्ष को पत्र देकर अलग संसदीय समूह बनाने की संभावना जताई जा रही है। इसी बीच महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे भी दिल्ली पहुंचे, जिससे राजनीतिक चर्चाएं और तेज हो गईं।
शिंदे से मुलाकात की चर्चाएं
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि उद्धव गुट के सांसदों और एकनाथ शिंदे के बीच संपर्क लगातार बना हुआ है। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि छह सांसदों ने शिंदे से मुलाकात की है, हालांकि इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। वहीं कुछ प्रस्तावित बैठकों के अंतिम समय में टल जाने की भी खबर सामने आई है।
‘ऑपरेशन टाइगर’ की हो रही चर्चा
महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों ‘ऑपरेशन टाइगर’ शब्द काफी चर्चा में है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार शिंदे गुट और एनडीए की रणनीति उद्धव ठाकरे के सांसदों को अपने पक्ष में लाने की हो सकती है। कुछ नेताओं का दावा है कि बातचीत अंतिम चरण में पहुंच चुकी है और जल्द बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आ सकता है।
संजय राउत ने लगाए गंभीर आरोप
शिवसेना (UBT) के वरिष्ठ नेता Sanjay Raut ने आरोप लगाया है कि सांसदों को पार्टी छोड़ने के लिए भारी आर्थिक प्रलोभन दिए जा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि कुछ सांसदों को करोड़ों रुपये के ऑफर दिए गए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
पार्टी ने जारी किया व्हिप
संभावित टूट की खबरों के बीच शिवसेना (UBT) नेतृत्व ने अपने सांसदों को एकजुट रखने के लिए कदम उठाए हैं। पार्टी की ओर से सांसदों को व्हिप जारी किए जाने और लोकसभा अध्यक्ष को पत्र
भेजे जाने की खबरें सामने आई हैं। पार्टी नेतृत्व किसी भी संभावित विभाजन को रोकने की कोशिश कर रहा है।
2022 की बगावत की यादें हुईं ताजा
यह घटनाक्रम 2022 की उस ऐतिहासिक बगावत की याद दिला रहा है जब Eknath Shinde के
नेतृत्व में बड़ी संख्या में विधायक अलग हो गए थे। उस बगावत के बाद
उद्धव ठाकरे की सरकार गिर गई थी और शिवसेना दो हिस्सों में बंट गई थी। बाद में
चुनाव आयोग ने शिंदे गुट को आधिकारिक शिवसेना के रूप में मान्यता भी दी थी।
उद्धव ठाकरे के लिए क्यों अहम है यह संकट?
यदि 6 या उससे अधिक सांसद अलग समूह बनाते हैं तो लोकसभा में उद्धव ठाकरे गुट की
ताकत काफी कमजोर हो सकती है। इससे महाराष्ट्र की राजनीति के साथ-साथ
विपक्षी गठबंधन की रणनीति पर भी असर पड़ सकता है। राजनीतिक विश्लेषक इसे
2027 के महाराष्ट्र चुनावों और राष्ट्रीय राजनीति के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम मान रहे हैं।
फिलहाल शिवसेना (UBT) में संभावित टूट को लेकर अटकलों का दौर जारी है। सांसदों की दिल्ली यात्रा,
शिंदे की मौजूदगी और लगातार हो रही बैठकों ने महाराष्ट्र की राजनीति को गर्मा दिया है।
अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या वास्तव में उद्धव ठाकरे को
एक और बड़ा झटका लगेगा या पार्टी नेतृत्व स्थिति को संभालने में सफल रहेगा।
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