दो महीने बाद फिर शुरू हुआ ईरानी तेल का निर्यात
वैश्विक तेल बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की दिशा में हुई प्रगति के बाद दो महीने से रुका ईरानी तेल फिर अंतरराष्ट्रीय बाजार की ओर बढ़ने लगा है। रिपोर्टों के अनुसार कई बड़े ईरानी तेल टैंकर अमेरिकी नाकेबंदी क्षेत्र को पार कर एशिया की ओर रवाना हो चुके हैं। इससे वैश्विक बाजार में तेल आपूर्ति बढ़ने की उम्मीद मजबूत हुई है।
क्रूड ऑयल की कीमतों में आई बड़ी गिरावट
ईरानी तेल की वापसी और मध्य पूर्व में तनाव कम होने की उम्मीदों के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई है। ब्रेंट क्रूड 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे फिसल गया है, जो पिछले लगभग तीन महीनों का निचला स्तर माना जा रहा है। बाजार को उम्मीद है कि ईरान से अतिरिक्त तेल आपूर्ति शुरू होने पर वैश्विक सप्लाई बेहतर होगी और कीमतों पर दबाव बना रहेगा।
क्या है अमेरिका-ईरान समझौता?
रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका और ईरान के बीच हुए प्रारंभिक समझौते में ईरान को तेल और ईंधन निर्यात फिर से शुरू करने की अनुमति देने पर सहमति बनी है। इसके साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से सामान्य रूप से खोलने और क्षेत्रीय तनाव कम करने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व
दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल का परिवहन होर्मुज जलडमरूमध्य से होता है। पिछले महीनों में क्षेत्रीय संघर्ष और प्रतिबंधों के कारण यहां से तेल आपूर्ति प्रभावित हुई थी, जिससे कीमतें तेजी से बढ़ गई थीं। अब शांति समझौते के बाद जहाजों की आवाजाही धीरे-धीरे फिर शुरू हो रही है, हालांकि पूरी तरह सामान्य स्थिति बहाल होने में कुछ समय लग सकता है।
भारत को कैसे मिलेगा फायदा?
भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में गिरावट भारत के लिए राहत भरी खबर मानी जा रही है। सस्ता क्रूड ऑयल मिलने से आयात बिल कम हो सकता है, जिससे रुपये को मजबूती मिल सकती है और महंगाई पर भी नियंत्रण रखने में मदद मिल सकती है।
शेयर बाजार में भी दिखा सकारात्मक असर
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का असर शेयर बाजार पर भी दिखाई दिया है। निवेशकों का भरोसा बढ़ने से कई वैश्विक और भारतीय बाजारों में तेजी दर्ज की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तेल की कीमतें नियंत्रित रहती हैं तो विमानन, परिवहन, पेंट, केमिकल और ऊर्जा आधारित उद्योगों को विशेष लाभ मिल सकता है।
पेट्रोल-डीजल के दाम घटेंगे?
विशेषज्ञों के अनुसार यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक नीचे बनी रहती हैं तो
भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है।
हालांकि अंतिम फैसला तेल कंपनियों और सरकारी नीतियों पर निर्भर करेगा। फिलहाल बाजार
इस बात पर नजर बनाए हुए है कि ईरानी तेल आपूर्ति कितनी तेजी से सामान्य होती है।
आगे क्या हो सकता है?
विश्लेषकों का मानना है कि यदि अमेरिका-ईरान समझौता पूरी तरह लागू हो जाता है और
ईरान का तेल निर्यात तेजी से बढ़ता है, तो वैश्विक तेल बाजार में आपूर्ति और मजबूत होगी।
इससे आने वाले महीनों में क्रूड ऑयल की कीमतों पर और
दबाव बन सकता है। हालांकि भू-राजनीतिक जोखिम अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं,
इसलिए बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
अमेरिका-ईरान शांति समझौते की खबर ने वैश्विक तेल बाजार की दिशा बदल दी है।
दो महीने बाद ईरानी तेल की वापसी से आपूर्ति बढ़ने की उम्मीद है और
इसी कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली है।
भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए यह सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
यदि यह रुझान जारी रहता है तो
आने वाले समय में महंगाई, पेट्रोल-डीजल की कीमतों और अर्थव्यवस्था को राहत मिल सकती है।
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