सोमवती अमावस्या का रहस्य: आखिर क्यों बढ़ जाता है इसका धार्मिक महत्व?

परशुराम यादव की रिपोर्ट

गोरखपुर में श्रद्धालुओं ने किया जलाभिषेक, शिव मंदिरों में उमड़ी आस्था

गोरखपुर। हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि को विशेष महत्व दिया गया है, लेकिन जब अमावस्या सोमवार के दिन पड़ती है

तो उसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। इस विशेष संयोग को सोमवती अमावस्या कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के

अनुसार यह दिन भगवान शिव की आराधना, पितरों के तर्पण, दान-पुण्य और

आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

सोमवार भगवान शिव को समर्पित होने के कारण इस दिन की महत्ता और भी बढ़ जाती है।

आचार्य सुधाकर शुक्ला ने बताया सोमवती अमावस्या का महत्व

महादेवा बाजार स्थित शिव मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से जुड़े

आचार्य पंडित सुधाकर शुक्ला ने कहा कि सोमवती अमावस्या सामान्य अमावस्या की तुलना में कहीं अधिक फलदायी मानी जाती है।

उन्होंने बताया कि इस दिन गंगा स्नान, दान-पुण्य, जप-तप, तर्पण और भगवान शिव की पूजा करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।

साथ ही पितरों की कृपा भी प्राप्त होती है।

अमावस्या और सोमवार का दुर्लभ संयोग बढ़ाता है महत्व

हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक माह अमावस्या तिथि आती है, जब चंद्रमा पूर्णतः अदृश्य हो जाता है।

लेकिन जब यही तिथि सोमवार को पड़ती है तो इसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है।

सोमवार का संबंध चंद्रमा और भगवान शिव दोनों से माना जाता है।

ऐसे में अमावस्या और सोमवार का यह संयोग धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना जाता है।

शिव आराधना से मिलता है विशेष फल

धार्मिक ग्रंथों में वर्णित है कि सोमवती अमावस्या के दिन भगवान शिव की पूजा-अर्चना,

रुद्राभिषेक और जलाभिषेक करने से जीवन के अनेक कष्ट दूर होते हैं। इस दिन श्रद्धापूर्वक

शिवलिंग पर जल, बेलपत्र और दूध अर्पित करने से मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता है।

यही कारण है कि शिव मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ती है।

स्कंद पुराण और पद्म पुराण में मिलता है उल्लेख

सोमवती अमावस्या का उल्लेख स्कंद पुराण, पद्म पुराण और भविष्य पुराण जैसे प्रमुख धार्मिक ग्रंथों में भी

मिलता है। इन ग्रंथों के अनुसार इस दिन किया गया दान, व्रत, स्नान और पूजा सामान्य दिनों की तुलना में

कई गुना अधिक फल प्रदान करता है। धर्माचार्यों का मानना है कि इस दिन की गई साधना से व्यक्ति को

आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। पीपल पूजा का भी है विशेष महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पीपल के वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवताओं का वास माना गया है।

स्कंद पुराण में पीपल वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है।

सोमवती अमावस्या के दिन पीपल की परिक्रमा और पूजन करने से सुख-समृद्धि तथा पुण्य की प्राप्ति होती है।

इसी कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस दिन पीपल पूजन भी करते हैं।

पितृ तर्पण और श्राद्ध के लिए सर्वोत्तम दिन

धर्मशास्त्रों के अनुसार सोमवती अमावस्या पितरों को प्रसन्न करने का श्रेष्ठ अवसर माना जाता है।

इस दिन तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान करने से पितृ दोषों से मुक्ति मिलने की मान्यता है।

जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र और धन का दान करने से पितरों

की आत्मा को शांति प्राप्त होती है तथा परिवार पर उनकी कृपा बनी रहती है।

महिलाओं के लिए भी विशेष महत्व रखती है सोमवती अमावस्या

देश के विभिन्न हिस्सों में विवाहित महिलाएं पति की लंबी आयु, परिवार की सुख-समृद्धि और संतान के

मंगल की कामना के लिए सोमवती अमावस्या का व्रत रखती हैं।

धार्मिक विश्वास है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया यह व्रत वैवाहिक जीवन में सुख-शांति और समृद्धि लाता है।

महादेवा बाजार शिव मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

सोमवती अमावस्या के अवसर पर महादेवा बाजार स्थित शंकर जी मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।

हजारों भक्तों ने भगवान शिव का जलाभिषेक

कर परिवार की सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना की। इस अवसर पर खजनी के पूर्व विधायक संत प्रसाद,

अष्टभुजा दुबे, नन्हे दुबे, बालेश्वर प्रसाद शुक्ला, जयप्रकाश दुबे, अतुल धर दुबे, शिवशंकर मिश्रा,

पंडित सुधाकर शुक्ला, अरुण सोनी, नागेंद्र यादव सहित क्षेत्र के अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

निष्कर्ष

सोमवती अमावस्या केवल एक धार्मिक तिथि नहीं बल्कि आस्था, श्रद्धा, पितृ सम्मान और शिव भक्ति का अद्भुत संगम है।

शास्त्रों में वर्णित इस पावन अवसर पर किया गया स्नान, दान, जप, तप, तर्पण

और शिव पूजन जीवन में सकारात्मक ऊर्जा,

सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है।