ट्रंप का एक संकेत और शेयर बाजार में आई रॉकेट जैसी तेजी, सेंसेक्स-निफ्टी ने भरी उड़ान

भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को जबरदस्त तेजी देखने को मिली। सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन निवेशकों की संपत्ति में भारी इजाफा हुआ और बाजार खुलते ही सेंसेक्स तथा निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांकों ने शानदार बढ़त दर्ज की। इस तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का वह संकेत माना जा रहा है, जिसमें उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के जल्द खुलने और ईरान के साथ संभावित समझौते की उम्मीद जताई। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई और निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ।

होर्मुज पर ट्रंप के बयान का बड़ा असर

मध्य पूर्व में लंबे समय से जारी तनाव के कारण वैश्विक बाजारों में चिंता का माहौल बना हुआ था। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक माना जाता है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ट्रंप द्वारा इस मार्ग के खुलने और तनाव कम होने के संकेत दिए जाने के बाद बाजारों ने राहत की सांस ली। इसके परिणामस्वरूप ब्रेंट क्रूड और डब्ल्यूटीआई कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज मार्ग सामान्य रूप से संचालित होता है तो वैश्विक तेल आपूर्ति बेहतर होगी और ऊर्जा संकट की आशंकाएं कम होंगी।

सेंसेक्स और निफ्टी में जोरदार उछाल

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का सीधा फायदा भारतीय शेयर बाजार को मिला। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 1000 अंकों से अधिक उछल गया, जबकि निफ्टी ने भी मजबूत बढ़त दर्ज की। निवेशकों ने बैंकिंग, ऑटो, एयरलाइन, पेंट, सीमेंट और तेल विपणन कंपनियों के शेयरों में जमकर खरीदारी की।

विशेष रूप से वे सेक्टर जिनकी लागत कच्चे तेल पर निर्भर करती है, उनमें तेजी देखने को मिली। इससे बाजार का समग्र माहौल सकारात्मक बना रहा।

कच्चे तेल की कीमत गिरना भारत के लिए क्यों अहम?

भारत दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल आयातकों में शामिल है। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें बढ़ती हैं तो भारत का आयात बिल बढ़ जाता है और महंगाई पर दबाव बनता है। वहीं तेल सस्ता होने से सरकार, उद्योगों और आम उपभोक्ताओं को राहत मिलती है।

विश्लेषकों के अनुसार, तेल की कीमतों में गिरावट से परिवहन लागत कम होती है, कंपनियों का मुनाफा बढ़ सकता है और महंगाई नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। यही कारण है कि तेल सस्ता होने की खबर पर शेयर बाजार में उत्साह दिखाई दिया।

वैश्विक बाजारों में भी दिखा सकारात्मक असर

केवल भारत ही नहीं, बल्कि अमेरिका और एशियाई बाजारों में भी सकारात्मक माहौल देखने को मिला। ट्रंप के बयान के बाद अमेरिकी शेयर बाजारों में भी जोरदार तेजी दर्ज की गई।

निवेशकों ने इसे भू-राजनीतिक तनाव कम होने के संकेत के रूप में देखा।

वैश्विक निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता बढ़ी और

सुरक्षित निवेश विकल्पों की बजाय इक्विटी बाजारों में निवेश बढ़ता दिखाई दिया।

किन सेक्टरों को मिला सबसे ज्यादा फायदा?

तेल कीमतों में गिरावट का सबसे अधिक फायदा एयरलाइन, पेंट, टायर, सीमेंट और तेल विपणन कंपनियों को मिला।

इन उद्योगों की लागत का बड़ा हिस्सा ईंधन और पेट्रोलियम उत्पादों पर आधारित होता है।

इसलिए तेल सस्ता होने पर इनके लाभ में वृद्धि की संभावना बढ़ जाती है।

इसके अलावा बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में भी मजबूती देखी गई, जिससे बाजार की तेजी को और बल मिला।

निवेशकों के लिए क्या है संकेत?

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मध्य पूर्व में तनाव और कम होता है तथा

तेल की कीमतें नियंत्रित रहती हैं, तो भारतीय बाजार में आगे भी

सकारात्मक रुझान देखने को मिल सकता है। हालांकि भू-राजनीतिक घटनाक्रम अभी भी

बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे वैश्विक घटनाओं और कच्चे तेल की कीमतों पर नजर बनाए रखें

क्योंकि इनका भारतीय बाजार पर सीधा प्रभाव पड़ता है।

डोनाल्ड ट्रंप के एक संकेत ने वैश्विक बाजारों का मूड बदल दिया। होर्मुज जलडमरूमध्य के खुलने और

ईरान के साथ तनाव कम होने की उम्मीद ने कच्चे तेल की कीमतों को नीचे धकेला, जिसका सीधा फायदा भारतीय

शेयर बाजार को मिला। सेंसेक्स और निफ्टी में आई जोरदार तेजी ने निवेशकों का उत्साह बढ़ा दिया है।

यदि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां अनुकूल बनी रहती हैं तो आने वाले दिनों में बाजार में सकारात्मक रुख जारी रह सकता है।

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