4200 करोड़ रुपये के निवेश से बदलेगी गोरखपुर की तस्वीर
उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्से को औद्योगिक विकास की नई दिशा देने के लिए गोरखपुर के धुरियापार इंडस्ट्रियल टाउनशिप में 4200 करोड़ रुपये के निवेश की तैयारी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री की सहमति मिलने के बाद शिलान्यास कार्यक्रम की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। यह परियोजना केवल गोरखपुर ही नहीं बल्कि पूरे पूर्वांचल की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देने वाली मानी जा रही है। लंबे समय से औद्योगिक विकास की प्रतीक्षा कर रहे क्षेत्र के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि साबित हो सकती है।
6500 लोगों को मिलेगा रोजगार
धुरियापार इंडस्ट्रियल टाउनशिप का सबसे बड़ा लाभ रोजगार के क्षेत्र में देखने को मिलेगा। अनुमान है कि इस परियोजना के जरिए करीब 6500 लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार प्राप्त होगा। स्थानीय युवाओं को अपने क्षेत्र में ही नौकरी और स्वरोजगार के बेहतर अवसर मिलेंगे, जिससे रोजगार के लिए बड़े शहरों की ओर होने वाला पलायन भी कम हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि उद्योगों की स्थापना के बाद परिवहन, लॉजिस्टिक्स, होटल, खानपान, व्यापार और सेवा क्षेत्र में भी रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को बहुआयामी लाभ मिलेगा।
सीमेंट और डिस्टिलरी परियोजनाओं को मिलेगी गति
धुरियापार इंडस्ट्रियल टाउनशिप में कई बड़ी औद्योगिक इकाइयों की स्थापना का प्रस्ताव है। इनमें सीमेंट निर्माण संयंत्र और डिस्टिलरी परियोजनाएं प्रमुख हैं। इन उद्योगों के शुरू होने से न केवल उत्पादन क्षमता बढ़ेगी बल्कि राज्य सरकार के राजस्व में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
बड़े निवेशकों की बढ़ती रुचि यह संकेत देती है कि गोरखपुर अब निवेशकों के लिए एक आकर्षक औद्योगिक गंतव्य बनता जा रहा है। बेहतर बुनियादी सुविधाएं और सरकार की निवेश समर्थक नीतियां इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
गीडा में छोटे उद्योगों के लिए भूमि संकट
जहां एक ओर बड़े निवेश की योजनाएं आगे बढ़ रही हैं, वहीं दूसरी ओर गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) में छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए भूमि की कमी चिंता का विषय बनी हुई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार 1000 वर्ग मीटर तक के सामान्य औद्योगिक प्लॉट लगभग समाप्त हो चुके हैं।
फिलहाल केवल रेडीमेड गारमेंट पार्क में कुछ सीमित प्लॉट उपलब्ध हैं। इससे छोटे उद्योग लगाने के इच्छुक उद्यमियों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है और कई निवेश योजनाएं प्रभावित हो रही हैं।
छोटे उद्यमियों की बढ़ रही चिंताएं
भूमि की कमी के कारण कई उद्यमी लंबे समय से प्लॉट आवंटन का इंतजार कर रहे हैं। छोटे और मध्यम उद्योगों से जुड़े कारोबारी मानते हैं कि यदि समय रहते नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित नहीं किए गए तो
स्थानीय स्तर पर निवेश और रोजगार सृजन की गति धीमी पड़ सकती है।
उद्योग संगठनों का कहना है कि बड़े उद्योगों के साथ-साथ छोटे उद्योगों को भी
समान अवसर मिलना जरूरी है, क्योंकि रोजगार सृजन में इनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है।
नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की मांग
विशेषज्ञों और उद्योग जगत से जुड़े लोगों ने सरकार से गीडा क्षेत्र का विस्तार करने और
नए औद्योगिक प्लॉट विकसित करने की मांग की है। उनका मानना है कि नई भूमि
उपलब्ध होने से छोटे और मध्यम उद्यमियों को उद्योग स्थापित करने का अवसर मिलेगा।
इससे न केवल निवेश बढ़ेगा बल्कि स्थानीय स्तर पर हजारों नए रोजगार भी सृजित होंगे।
साथ ही गोरखपुर का औद्योगिक विकास और अधिक संतुलित और व्यापक होगा।
पूर्वांचल का औद्योगिक हब बनेगा गोरखपुर
धुरियापार इंडस्ट्रियल टाउनशिप और गीडा विस्तार की योजनाएं गोरखपुर को पूर्वांचल के
सबसे महत्वपूर्ण औद्योगिक केंद्रों में शामिल कर सकती हैं। गोरखपुर पहले से ही सड़क, रेल और हवाई संपर्क के
लिहाज से एक महत्वपूर्ण शहर है। ऐसे में बड़े निवेश और आधुनिक औद्योगिक
परियोजनाओं का आगमन इसे निवेशकों की पहली पसंद बना सकता है।
यदि परियोजनाएं निर्धारित समय पर पूरी होती हैं तो आने वाले वर्षों में गोरखपुर उत्तर प्रदेश के
तेजी से विकसित होने वाले औद्योगिक शहरों की सूची में प्रमुख स्थान हासिल कर सकता है।
धुरियापार इंडस्ट्रियल टाउनशिप में 4200 करोड़ रुपये का निवेश गोरखपुर और
पूरे पूर्वांचल के विकास के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है। इससे हजारों
युवाओं को रोजगार मिलेगा, औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और क्षेत्रीय
अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। हालांकि, छोटे उद्योगों के लिए भूमि संकट का समाधान भी उतना ही आवश्यक है ताकि
विकास का लाभ सभी स्तरों तक पहुंच सके। यदि सरकार दोनों मोर्चों पर प्रभावी कदम उठाती है,
तो पूर्वांचल की आर्थिक तस्वीर आने वाले वर्षों में पूरी तरह
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