48 साल बाद मिला न्याय! संभल में दंगा पीड़ितों को मिलेगा अपना घर

उत्तर प्रदेश के संभल जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसे सामाजिक न्याय और मानवीय संवेदनशीलता की मिसाल माना जा रहा है। वर्ष 1978 के सांप्रदायिक दंगों से प्रभावित परिवार को करीब 48 साल बाद पुनर्वास का अधिकार मिलने जा रहा है। प्रशासन ने कब्रिस्तान के अवैध कब्जे से मुक्त कराई गई सरकारी भूमि पर पीड़ित परिवार को बसाने और उन्हें जमीन का वैध पट्टा देने का फैसला लिया है।

यह फैसला केवल जमीन आवंटन तक सीमित नहीं है, बल्कि उन परिवारों के दर्द, संघर्ष और लंबे इंतजार को सम्मान देने वाला कदम माना जा रहा है।

1978 के दंगों ने बदल दी थी जिंदगी

संभल में वर्ष 1978 में हुए सांप्रदायिक दंगों ने कई परिवारों को उजाड़ दिया था। हिंसा के दौरान अनेक लोगों की जान गई और कई परिवारों को अपना घर-बार छोड़कर पलायन करना पड़ा। रिपोर्टों के अनुसार दंगे में रामशरण दास रस्तोगी की हत्या कर दी गई थी, जिसके बाद उनका परिवार भय के कारण संभल छोड़कर दूसरे स्थान पर रहने लगा।

करीब पांच दशक तक यह परिवार स्थायी पुनर्वास और न्याय की प्रतीक्षा करता रहा। कई बार प्रशासन और सरकारों से गुहार लगाने के बावजूद उन्हें स्थायी समाधान नहीं मिल पाया था।

कब्रिस्तान से मुक्त कराई गई जमीन पर होगा पुनर्वास

प्रशासन ने जिस भूमि को पुनर्वास के लिए चुना है, वह सरकारी जमीन बताई जा रही है जिस पर अवैध कब्जा कर कब्रिस्तान विकसित कर दिया गया था। राजस्व अभिलेखों की जांच, सीमांकन और प्रशासनिक कार्रवाई के बाद इस जमीन को मुक्त कराया गया। इसके बाद निर्णय लिया गया कि इस भूमि का उपयोग दंगा पीड़ित परिवार के पुनर्वास के लिए किया जाएगा।

जानकारी के अनुसार लगभग 100 वर्गमीटर भूमि का पट्टा पीड़ित परिवार को दिया जाएगा,

जिससे वे अपना नया आशियाना बना सकें।

मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद तेज हुई कार्रवाई

मामले ने उस समय गति पकड़ी जब पीड़ित परिवार ने

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से न्याय की गुहार लगाई।

इसके बाद प्रशासन ने मामले की गंभीरता से जांच की और भूमि को कब्जा मुक्त कराने की प्रक्रिया शुरू की। मुख्यमंत्री ने भी

सार्वजनिक मंचों से संभल दंगों का उल्लेख करते हुए पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की बात कही थी।

इसके बाद जिला प्रशासन ने पुनर्वास योजना को अमलीजामा पहनाने की दिशा में तेजी से काम किया।

पट्टा मिलने से मिलेगा कानूनी अधिकार

इस योजना की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि परिवार को केवल रहने की जगह नहीं दी जाएगी बल्कि

भूमि का कानूनी स्वामित्व भी दिया जाएगा। पट्टा मिलने के बाद परिवार सरकारी योजनाओं का लाभ लेने,

घर बनाने और भविष्य में किसी कानूनी विवाद से बचने में सक्षम होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि पुनर्वास तभी सफल माना जाता है जब लाभार्थी को

कानूनी सुरक्षा भी मिले। यही वजह है कि इस फैसले को दीर्घकालिक समाधान माना जा रहा है।

सामाजिक न्याय की मिसाल बनेगा फैसला

स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि यह फैसला उन हजारों लोगों के लिए उम्मीद की किरण है

जो वर्षों से पुनर्वास और न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं। प्रशासन का यह कदम केवल एक परिवार की मदद नहीं बल्कि

सामाजिक विश्वास बहाल करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मॉडल सफल रहता है तो

भविष्य में अन्य लंबित पुनर्वास मामलों में भी इसका उदाहरण दिया जा सकता है।

संभल में 1978 दंगा पीड़ित परिवार को 48 वर्षों बाद जमीन का पट्टा देकर

पुनर्वासित करने का फैसला ऐतिहासिक माना जा रहा है। यह निर्णय केवल

एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं बल्कि न्याय, सम्मान और मानवीय संवेदना का प्रतीक है।

आने वाले समय में यह कदम उत्तर प्रदेश में सामाजिक न्याय की एक नई मिसाल बन सकता है।

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