जनगणना में OBC कॉलम गायब? फिशरमैन आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रभान निषाद ने उठाए गंभीर सवाल,

OBC कॉलम को लेकर फिशरमैन आर्मी की आपत्ति

देश में होने वाली जनगणना को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। फिशरमैन आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रभान निषाद ने जनगणना प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि जनगणना फॉर्म में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए तो स्पष्ट कॉलम मौजूद हैं, लेकिन अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए अलग से कोई कॉलम दिखाई नहीं दे रहा है। उनका कहना है कि यह स्थिति OBC समुदाय की वास्तविक जनसंख्या और सामाजिक स्थिति के सही आकलन में बाधा बन सकती है।

जनगणना केवल गिनती नहीं, नीतियों का आधार

चंद्रभान निषाद ने कहा कि जनगणना किसी भी देश के विकास की आधारशिला होती है। सरकारें जनगणना के आंकड़ों के आधार पर शिक्षा, रोजगार, आरक्षण, सामाजिक न्याय और कल्याणकारी योजनाओं की रूपरेखा तैयार करती हैं। यदि OBC समुदाय का अलग डेटा उपलब्ध नहीं होगा तो भविष्य में उनके अधिकारों और हिस्सेदारी को लेकर गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

OBC और सामान्य वर्ग को एक साथ रखने पर आपत्ति

फिशरमैन आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि OBC और सामान्य वर्ग को एक ही श्रेणी में रखने की कोशिश की जा रही है। उनका कहना है कि यदि ऐसा हुआ तो पिछड़े वर्गों की वास्तविक संख्या और उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति का सही आंकड़ा सामने नहीं आ पाएगा। इससे नीति निर्धारण में भी असंतुलन पैदा हो सकता है।

अधिकारों और आरक्षण पर पड़ सकता है प्रभाव

उन्होंने कहा कि OBC समुदाय को संविधान द्वारा मिले अधिकारों की सुरक्षा के लिए उनकी अलग पहचान दर्ज होना बेहद जरूरी है। यदि जनगणना में OBC वर्ग का पृथक डेटा एकत्र नहीं किया गया तो भविष्य में योजनाओं, बजट आवंटन और संसाधनों के वितरण में असमानता बढ़ सकती है।

समाज को जागरूक रहने की अपील

चंद्रभान निषाद ने OBC समाज से अपील की कि वे जनगणना प्रक्रिया को गंभीरता से समझें और अपने अधिकारों के प्रति सजग रहें। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जागरूक नागरिक ही अपने संवैधानिक अधिकारों की रक्षा कर सकते हैं और सामाजिक न्याय की लड़ाई को मजबूत बना सकते हैं।

सरकार से की स्पष्ट मांग

फिशरमैन आर्मी ने केंद्र सरकार और संबंधित विभागों से मांग की है कि जनगणना फॉर्म में OBC वर्ग के लिए स्पष्ट और अलग कॉलम सुनिश्चित किया जाए। संगठन का कहना है कि देश के करोड़ों पिछड़े वर्ग के लोगों की वास्तविक स्थिति तभी सामने आ सकेगी जब उनकी अलग गणना की जाएगी। इससे नीतिगत निर्णय लेने में भी अधिक पारदर्शिता आएगी।

आंदोलन की चेतावनी

चंद्रभान निषाद ने कहा कि यदि समय रहते इस विषय पर उचित कदम नहीं उठाया गया और OBC समुदाय की पहचान को स्पष्ट रूप से दर्ज करने की व्यवस्था नहीं की गई तो फिशरमैन आर्मी देशव्यापी आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी। उन्होंने कहा कि संगठन सामाजिक न्याय और

संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए हर लोकतांत्रिक संघर्ष करने को तैयार है।

सामाजिक न्याय की बहस फिर हुई तेज

इस बयान के बाद OBC जनगणना और सामाजिक न्याय का मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय

बहस का विषय बन गया है। विभिन्न सामाजिक संगठनों और पिछड़े वर्गों के प्रतिनिधियों द्वारा लंबे समय से

OBC की अलग गणना और सटीक आंकड़ों की मांग उठाई जाती रही है।

ऐसे में यह मुद्दा आने वाले समय में और अधिक चर्चा का केंद्र बन सकता है।

राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मामला

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी वर्ग का सही और सटीक डेटा उपलब्ध होना नीति निर्माण के लिए

अत्यंत आवश्यक है। OBC वर्ग की अलग पहचान और उनकी जनसंख्या के आंकड़ों को लेकर

उठे सवाल आने वाले दिनों में राजनीतिक और सामाजिक विमर्श को नई दिशा दे सकते हैं।

फिशरमैन आर्मी का स्पष्ट संदेश

फिशरमैन आर्मी ने स्पष्ट किया है कि उसका उद्देश्य किसी वर्ग विशेष का विरोध करना नहीं है,

बल्कि OBC समाज के संवैधानिक अधिकारों और हिस्सेदारी की

रक्षा सुनिश्चित करना है। संगठन का कहना है कि जनगणना में पारदर्शिता और

सभी वर्गों की सही गणना ही लोकतंत्र को मजबूत बनाने का सबसे प्रभावी माध्यम है।

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