UP Politics: अर्श से फर्श तक पहुंचा विजय मिश्रा का कुनबा, चार बार विधायक बनने के बाद अब सजा और कार्रवाई

Bhadohi की ज्ञानपुर विधानसभा सीट से चार बार विधायक रहे Vijay Mishra का राजनीतिक सफर अब बड़े पतन की कहानी बन चुका है। एमपी-एमएलए कोर्ट ने हाल ही में संपत्ति हड़पने के मामले में विजय मिश्रा, उनकी पत्नी और बेटे को 10-10 साल की सजा सुनाई है, जबकि बहू को चार साल की कैद मिली है।

एक समय पूर्वांचल की राजनीति में दबदबा रखने वाला यह परिवार अब लगातार कानूनी कार्रवाई और संपत्ति जब्ती का सामना कर रहा है।

2020 से लगातार बढ़ती गई मुश्किलें,

वर्ष 2020 में रिश्तेदार की संपत्ति कब्जाने के मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद विजय मिश्रा और उनके परिवार की मुश्किलें तेजी से बढ़ीं।

इसके बाद एक के बाद एक कई मामलों में कार्रवाई शुरू हुई। पुलिस और प्रशासन ने विजय मिश्रा से जुड़े कई मामलों की जांच तेज कर दी।

वर्तमान में विजय मिश्रा आगरा जेल में बंद हैं।

83 से ज्यादा मुकदमे दर्ज,

जानकारी के अनुसार विजय मिश्रा पर 83 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। लंबे समय तक राजनीतिक प्रभाव और बाहुबली छवि के कारण उनके खिलाफ खुलकर शिकायत करने से लोग डरते थे।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि पूर्वांचल में विजय मिश्रा का प्रभाव वर्षों तक बना रहा और वह क्षेत्रीय राजनीति में मजबूत पकड़ रखते थे।

कारोबार से राजनीति तक का सफर,

विजय मिश्रा मूल रूप से प्रयागराज जिले के खपटिहां गांव के रहने वाले हैं। वर्ष 1980 के आसपास वह भदोही पहुंचे और कारोबार शुरू किया।

इसके बाद उन्होंने पेट्रोल पंप और ट्रांसपोर्ट कारोबार में कदम रखा। धीरे-धीरे राजनीति में सक्रिय हुए और वर्ष 1990 में ब्लॉक प्रमुख बने।

बताया जाता है कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलापति त्रिपाठी उन्हें राजनीति में लेकर आए थे।

सपा से मिली बड़ी पहचान,

वर्ष 2001 में Samajwadi Party ने विजय मिश्रा को ज्ञानपुर सीट से टिकट दिया।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार सपा नेतृत्व को उम्मीद थी कि विजय मिश्रा पूर्वांचल की कई सीटों पर पार्टी को फायदा पहुंचाएंगे।

इसके बाद उनका राजनीतिक प्रभाव तेजी से बढ़ा और वर्ष 2007 में वह सपा के टिकट पर विधायक बने।

जेल में रहते हुए भी जीता चुनाव,

विजय मिश्रा ने वर्ष 2012 का विधानसभा चुनाव जेल में रहते हुए भी जीता था। इसके बाद

2017 में टिकट कटने के बावजूद उन्होंने निषाद पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़कर जीत दर्ज की।

हालांकि वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

उस समय उनकी पत्नी रामलली मिश्रा और बेटी ने गांव-गांव जाकर प्रचार किया था।

ब्राह्मण राजनीति और विवाद,

विजय मिश्रा ने खुद को ब्राह्मण समाज के बड़े नेता के रूप में स्थापित करने की कोशिश की,

लेकिन उन पर कई चर्चित हत्याओं और आपराधिक मामलों के आरोप भी लगे।

राजनीतिक विरोधियों ने हमेशा उन्हें बाहुबली राजनीति का चेहरा बताया, जबकि समर्थक उन्हें क्षेत्र का प्रभावशाली नेता मानते रहे।

200 करोड़ से ज्यादा संपत्ति पर कार्रवाई,

वर्ष 2020 के बाद प्रशासन ने विजय मिश्रा और उनके परिवार की संपत्तियों पर बड़ी कार्रवाई की।

जानकारी के अनुसार करीब 200 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति पर

बुलडोजर चलाया गया या उसे जब्त कर लिया गया।

प्रयागराज, लखनऊ, दिल्ली और मध्य प्रदेश समेत कई स्थानों पर दर्ज जमीनों और भवनों पर कार्रवाई हुई।

परिवार के कई सदस्य जेल में,

वर्तमान में विजय मिश्रा के साथ उनके बेटे विष्णु मिश्रा और भतीजे भी जेल में बंद हैं।

हाल ही में अदालत ने पत्नी रामलली मिश्रा को भी दोषी करार देते हुए जेल भेज दिया।

राजनीति में बड़ा संदेश,

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि विजय मिश्रा का मामला

उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़ा संदेश माना जा रहा है।

एक समय क्षेत्रीय राजनीति में बेहद प्रभावशाली रहे नेता का इस तरह कानूनी मामलों में

घिरना प्रदेश की बदलती राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था को भी दर्शाता है।

सोशल मीडिया पर चर्चा तेज,

विजय मिश्रा और उनके परिवार को मिली सजा के बाद

सोशल मीडिया पर यह मामला तेजी से वायरल हो रहा है।

फेसबुक, एक्स और यूट्यूब पर लोग उनके राजनीतिक सफर और मौजूदा हालात को लेकर चर्चा कर रहे हैं।