यूपी चुनाव 2027 को लेकर समाजवादी पार्टी
यूपी चुनाव 2027 को लेकर सपा ने तेज की तैयारी
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी बीच समाजवादी पार्टी भी पश्चिमी यूपी में मजबूत रणनीति बनाने में जुट गई है। खासतौर पर मेरठ की सात विधानसभा सीटों को लेकर पार्टी के अंदर गहन मंथन चल रहा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अगस्त महीने में Akhilesh Yadav अपना “मेरठ कार्ड” खोल सकते हैं।
पार्टी नेतृत्व चाहता है कि उम्मीदवारों की घोषणा समय रहते कर दी जाए ताकि प्रत्याशी जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत कर सकें और चुनावी तैयारियों को धार दे सकें।
सर्वे रिपोर्ट बनेगी टिकट का आधार
इस बार समाजवादी पार्टी टिकट वितरण में नई रणनीति अपनाती नजर आ रही है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक संभावित दावेदारों की सूची लखनऊ स्थित मुख्यालय पहुंच चुकी है। अब आंतरिक सर्वे कराया जा रहा है, जिसमें यह देखा जाएगा कि कौन प्रत्याशी किस सीट पर सबसे मजबूत स्थिति में है और किसके जीतने की संभावना ज्यादा है।
बताया जा रहा है कि टिकट वितरण में सिर्फ पुराने समीकरण या वरिष्ठता नहीं, बल्कि जीत की संभावना सबसे बड़ा आधार बनेगी। यही वजह है कि पार्टी हर सीट पर बेहद सावधानी से फैसला लेना चाहती है।
मेरठ की सात सीटों पर मची होड़
मेरठ की सातों विधानसभा सीटें — मेरठ शहर, मेरठ दक्षिण, मेरठ कैंट, किठौर, हस्तिनापुर, सरधना और सिवालखास — इस बार सपा के भीतर चर्चा का केंद्र बनी हुई हैं। पुराने दिग्गज नेता अपने अनुभव और संगठन में लंबे समय से सक्रिय रहने का हवाला देकर टिकट की दावेदारी कर रहे हैं।
कुछ सीटों पर पार्टी पुराने चेहरों पर भरोसा जता सकती है, जबकि एक-दो सीटों पर नए चेहरों को मौका मिलने की भी चर्चा है।
मेरठ दक्षिण सीट पर असमंजस
मेरठ दक्षिण सीट को लेकर पार्टी के भीतर सबसे ज्यादा असमंजस की स्थिति बताई जा रही है। पिछली बार यहां से आदिल चौधरी ने चुनाव लड़ा था, लेकिन भाजपा उम्मीदवार Somendra Tomar से हार गए थे।
अब पार्टी यहां नए चेहरे या नए समीकरण पर विचार कर सकती है।
हस्तिनापुर सीट पर कई दावेदार
हस्तिनापुर सीट पर मुकाबला काफी दिलचस्प माना जा रहा है। यहां पूर्व मंत्री प्रभुदयाल वाल्मीकि,
पूर्व विधायक योगेश वर्मा, मेयर चुनाव लड़ चुकीं दीपू
मनोठिया और प्रशांत गौतम अपनी मजबूत दावेदारी पेश कर रहे हैं।
पार्टी नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती जातीय समीकरण और जीतने की क्षमता के बीच संतुलन बनाना होगा।
सिवालखास और कैंट सीट पर नजर
सिवालखास सीट पर सम्राट मलिक, गौरव चौधरी, नदीम चौहान और वसीम राजा टिकट की दौड़ में बताए जा रहे हैं।
पिछली बार यहां सपा-रालोद गठबंधन के उम्मीदवार गुलाम मोहम्मद ने जीत दर्ज की थी,
लेकिन अब रालोद भाजपा के साथ है, जिससे समीकरण पूरी तरह बदल चुके हैं।
वहीं मेरठ कैंट सीट पर दावेदारी सीमित बताई जा रही है।
राजनीतिक चर्चाओं में यह भी कहा जा रहा है कि
यदि सपा और कांग्रेस का गठबंधन होता है, तो यह सीट कांग्रेस के खाते में जा सकती है।
पश्चिम यूपी की राजनीति में अहम है मेरठ
Akhilesh Yadav अच्छी तरह जानते हैं कि मेरठ की सातों सीटों का असर पूरे पश्चिमी
उत्तर प्रदेश की राजनीति पर पड़ता है। यदि यहां सही जातीय और राजनीतिक समीकरण साध लिए गए, तो
इसका फायदा कई आसपास की सीटों पर भी मिल सकता है।
यही वजह है कि पार्टी टिकट वितरण में जल्दबाजी से बच रही है और
हर सीट पर फूंक-फूंक कर कदम रख रही है।
अगस्त में हो सकता है बड़ा ऐलान
राजनीतिक सूत्रों की मानें तो अगस्त में अखिलेश यादव मेरठ की कई सीटों पर
उम्मीदवारों के नाम लगभग तय कर सकते हैं। इससे संभावित प्रत्याशियों को
चुनाव प्रचार और संगठन मजबूत करने के लिए पर्याप्त समय मिल जाएगा।
अब देखना यह होगा कि पार्टी पुराने चेहरों पर भरोसा जताती है या कुछ सीटों पर नए प्रयोग करती है।
