स्वगणना के दौरान मैपिंग बना सबसे बड़ा सिरदर्द
जनगणना की स्वगणना प्रक्रिया शुरू होते ही लोगों को तकनीकी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा दिक्कत मकान की लोकेशन और गली चयन करने में आ रही है। अगर मैपिंग के दौरान सही पता और लोकेशन नहीं चुनी गई तो ऐप पर आगे की प्रक्रिया नहीं बढ़ रही।
Gorakhpur समेत कई जिलों से लोगों ने शिकायत की है कि गूगल मैपिंग में सही लोकेशन चुनना काफी मुश्किल हो रहा है। इंटरनेट की धीमी स्पीड होने पर भी ऐप काम नहीं कर रहा और स्वगणना बीच में अटक जा रही है।
जनगणना निदेशालय ने भेजा वीडियो
राजस्वकर्मियों की शिकायत के बाद जनगणना निदेशालय की ओर से एक वीडियो जारी किया गया है। इस वीडियो में बताया गया है कि गूगल मैप पर सही लोकेशन चुनकर उसे ऐप में चस्पा करने से समस्या हल हो सकती है।
हालांकि यह वीडियो अभी सीमित लोगों तक ही पहुंचा है। ऐसे में अधिकांश लोगों को सही तरीका पता नहीं होने के कारण परेशानी उठानी पड़ रही है।
लोगों ने बताई अपनी परेशानी
बेतियाहाता निवासी संजीव कुमार ने बताया कि गूगल मैपिंग के दौरान उनके घर के पास होटल का नाम तो दिख रहा था, लेकिन गली का चयन नहीं हो पा रहा था।
उन्होंने कई बार कोशिश की लेकिन लोकेशन एक्सेप्ट नहीं हुई। आखिरकार उन्होंने स्वगणना प्रक्रिया बीच में ही छोड़ दी।
वहीं सिविल लाइंस की रहने वाली श्वेता राय ने बताया कि परिवार के 13 सदस्यों का विवरण भरने के दौरान सबसे ज्यादा दिक्कत मैपिंग में हुई। काफी प्रयास के बाद उन्होंने लैंडमार्क के रूप में फिराक चौक डालकर प्रक्रिया पूरी की।
स्क्रोलिंग और मैप चयन में भी उलझन
जनप्रिय विहार के पार्षद ऋषि मोहन वर्मा ने बताया कि मोबाइल ऐप पर गूगल मैपिंग के दौरान सही पता चुनने में परेशानी हो रही थी।
उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि दोनों हाथों से स्क्रीन स्क्रोल करके लोकेशन सटीक तरीके से चुनी जा सकती है। बाद में प्रगणक की मदद से उनकी स्वगणना पूरी हो पाई।
ईंधन और मकान की जानकारी में भी भ्रम
Gorakhpur के गोरखनाथ इलाके में रहने वाले कुछ लोग मकान और ईंधन से जुड़ी जानकारी भरने में उलझ गए।
करुणेश पांडेय और किशन मिश्र ने बताया कि उनके मकान का कुछ हिस्सा टाइल वाला है और
कुछ साधारण फर्श वाला। उन्हें समझ नहीं आया कि कौन-सा विकल्प चुनें।
इसके अलावा खाना पकाने के ईंधन वाले कॉलम में भी दिक्कत हुई
क्योंकि घर में पीएनजी, गैस सिलिंडर और
इंडक्शन तीनों का इस्तेमाल होता है। बाद में राजस्वकर्मी से जानकारी लेकर उन्होंने प्रक्रिया पूरी की।
हेल्पलाइन न होने से बढ़ी परेशानी
लोगों की सबसे बड़ी शिकायत यह है कि स्वगणना प्रक्रिया के
दौरान मदद के लिए कोई हेल्पलाइन नंबर उपलब्ध नहीं है।
तकनीकी दिक्कत आने पर लोग या तो खुद प्रयास करते रहते हैं या
फिर प्रगणक के आने का इंतजार कर रहे हैं। अब कई लोग
21 मई से घर-घर आने वाले प्रगणकों के जरिए ही जनगणना पूरी कराने की योजना बना रहे हैं।
ऐसे करें सही तरीके से स्वगणना
- गूगल मैप में पहले अपना सही लोकेशन खोजें
- दोनों उंगलियों से स्क्रीन स्क्रोल कर सही गली और मकान चुनें
- मजबूत इंटरनेट कनेक्शन का इस्तेमाल करें
- लैंडमार्क सही भरें
- ईंधन और मकान से जुड़ी जानकारी सोच-समझकर दर्ज करें
- समस्या होने पर प्रगणक या राजस्वकर्मी से मदद लें