UP News: बड़ौत डिपो में धूल फांक रहीं 30 रोडवेज बसें, हर महीने लाखों का टैक्स भर रहा विभाग

चालक-परिचालकों की कमी से खड़ी हुईं करोड़ों की बसें

Uttar Pradesh के बागपत जिले में स्थित Baraut रोडवेज डिपो में करोड़ों रुपये की बसें लंबे समय से खड़ी धूल फांक रही हैं। यात्रियों को बेहतर परिवहन सुविधा देने के लिए खरीदी गई इन बसों का संचालन चालक और परिचालकों की भारी कमी के कारण शुरू नहीं हो पाया है। हालत यह है कि बसें सड़कों पर नहीं दौड़ रहीं, लेकिन खर्चे का मीटर लगातार चल रहा है।

85 नई बसों में से 30 अब भी खड़ी

करीब एक साल पहले बड़ौत डिपो में 85 नई रोडवेज बसें शामिल की गई थीं। इससे पहले डिपो में कुल 137 बसों का संचालन होता था, जो नई बसों के आने के बाद बढ़कर 222 हो गईं। यात्रियों को उम्मीद थी कि अब कम बसों वाले रूटों पर राहत मिलेगी और सफर आसान होगा।

हालांकि, इनमें से केवल 55 बसों को ही सड़कों पर उतारा जा सका, जबकि 30 बसें अब भी डिपो में खड़ी हैं। करोड़ों रुपये की लागत से खरीदी गई ये बसें उपयोग के अभाव में खराब होने लगी हैं।

साढ़े दस करोड़ रुपये की बसें बेकार खड़ी

जानकारी के अनुसार डिपो में खड़ी इन 30 बसों की कुल कीमत करीब साढ़े दस करोड़ रुपये बताई जा रही है। बसों के उपयोग न होने से रोडवेज विभाग को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है।

सबसे बड़ी समस्या यह है कि विभाग में चालक और परिचालकों की भारी कमी बनी हुई है। डिपो में करीब 66 चालक और 110 परिचालकों के पद खाली हैं, जिसके चलते सभी बसों का संचालन संभव नहीं हो पा रहा।

हर महीने लाखों रुपये का टैक्स

बसें भले ही सड़क पर न चल रही हों, लेकिन रोडवेज विभाग को इन पर हर महीने टैक्स देना पड़ रहा है।

विभागीय अधिकारियों के मुताबिक प्रति सीट 147 रुपये के हिसाब से मासिक टैक्स जमा करना होता है।

एक बस में औसतन 52 सीटें होने के कारण प्रति बस करीब

7,644 रुपये टैक्स बनता है। इस हिसाब से डिपो में खड़ी

30 बसों पर हर महीने लगभग 2.29 लाख रुपये टैक्स के रूप में खर्च किए जा रहे हैं।

यात्रियों को हो रही परेशानी

बसों की कमी का सीधा असर यात्रियों पर पड़ रहा है।

कई रूटों पर अब भी पर्याप्त बसें नहीं चल पा रही हैं,

जिससे लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ता है।

खासकर ग्रामीण और लंबी दूरी के यात्रियों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

यात्रियों का कहना है कि जब सरकार ने नई बसें खरीद ली हैं तो उ

न्हें जल्द सड़कों पर उतारा जाना चाहिए ताकि आम लोगों को राहत मिल सके।

हर बुधवार चल रही भर्ती प्रक्रिया

रोडवेज विभाग ने चालक और परिचालकों की कमी दूर करने के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू कर रखी है।

बड़ौत डिपो में हर बुधवार को भर्ती अभियान चलाया जा रहा है।

अधिकारियों का कहना है कि जैसे ही पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध होगा, खड़ी बसों को भी

संचालन में शामिल कर दिया जाएगा। इसके बाद यात्रियों को बेहतर सुविधा मिल सकेगी।

परिवहन व्यवस्था पर उठे सवाल

करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद बसों का उपयोग न हो पाना परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर

सवाल खड़े कर रहा है। लोग पूछ रहे हैं कि जब पर्याप्त चालक और परिचालक नहीं थे तो

इतनी बड़ी संख्या में बसें खरीदने की योजना कैसे बनाई गई।

अब देखने वाली बात होगी कि विभाग स्टाफ की कमी कितनी जल्दी दूर कर पाता है और

ये बसें कब तक सड़कों पर दौड़ती नजर आएंगी।