उत्तर प्रदेश के Kanpur से देश के सबसे बड़े वित्तीय घोटालों में से एक का खुलासा हुआ है। पुलिस ने 3200 करोड़ रुपये के अवैध लेनदेन मामले में फरार चल रहे महफूज अली उर्फ पप्पू छुरी को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी पर फर्जी बैंक खातों और हवाला नेटवर्क के जरिए 400 से अधिक कारोबारियों की रकम इधर-उधर ट्रांसफर कराने का आरोप है।
इस खुलासे के बाद कानपुर समेत कई राज्यों में कारोबारी जगत और बैंकिंग सिस्टम को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
25 लाख की लूट ने खोला करोड़ों के काले खेल का राज,
पूरा मामला श्यामनगर इलाके में हुई 25 लाख रुपये की लूट से सामने आया। फरवरी में मो. वासिद और अरशद से बाइक सवार बदमाशों ने नकदी लूट ली थी। शुरुआत में दोनों ने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन CCTV फुटेज में लूट की पुष्टि हो गई।
पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि दोनों युवक जाजमऊ निवासी महफूज अली उर्फ पप्पू छुरी के बैंक खाते से 3.20 करोड़ रुपये निकालकर ले जा रहे थे। उसी रकम में से 25 लाख रुपये रास्ते में लूट लिए गए थे। यही घटना आगे चलकर 3200 करोड़ रुपये के अवैध नेटवर्क का पर्दाफाश बन गई।
12 बैंकों में मिले 68 संदिग्ध खाते,
जांच के दौरान पुलिस को महफूज अली और उसके रिश्तेदारों के नाम पर 12 अलग-अलग बैंकों में 68 बैंक खाते मिले। इन खातों में करीब ढाई साल के भीतर 1600 करोड़ रुपये से ज्यादा का ट्रांजेक्शन सामने आया।
बाद में आयकर विभाग की जांच में कुल 3200 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन की जानकारी सामने आई। जांच एजेंसियों के मुताबिक यह रकम टेनरी, स्लॉटर हाउस और स्क्रैप कारोबार से जुड़े कई कारोबारियों की बताई जा रही है।
400 कारोबारियों और बड़ी फर्मों से जुड़े तार,
पुलिस के अनुसार महफूज अली का नेटवर्क सिर्फ कानपुर तक सीमित नहीं था। उसके जरिए दिल्ली, पंजाब, गुजरात, हिमाचल प्रदेश समेत कई राज्यों के लगभग 400 कारोबारी और बड़ी फर्में पैसा ट्रांसफर कराती थीं।
बताया जा रहा है कि अवैध और वैध दोनों तरह की रकम फर्जी खातों में भेजी जाती थी और फिर कैश के रूप में निकाली जाती थी। इस पूरे नेटवर्क में हवाला और शेल अकाउंट्स का इस्तेमाल किया जा रहा था।
बैंक अधिकारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में,
जांच एजेंसियों को इस खेल में कुछ बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों की संलिप्तता के संकेत भी मिले हैं।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इतने बड़े स्तर पर
ट्रांजेक्शन बिना बैंकिंग सिस्टम की मदद के कैसे संभव हुए।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बैंकिंग निगरानी मजबूत होती तो
इतने बड़े लेनदेन को पहले ही पकड़ा जा सकता था।
फरारी के दौरान कई राज्यों में छिपता रहा आरोपी,
पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल के अनुसार महफूज
अली गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार ठिकाने बदल रहा था।
वह दिल्ली, बिहार और पश्चिम बंगाल में छिपता फिर रहा था।
सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि आरोपी मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं कर रहा था और
केवल व्हाट्सएप कॉलिंग के जरिए संपर्क में रहता था। पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस और
डिजिटल ट्रैकिंग की मदद से आखिरकार उसे गिरफ्तार कर लिया।
कैसे बना परचून दुकानदार से करोड़ों के नेटवर्क का सरगना,
पुलिस के मुताबिक महफूज अली मूल रूप से गाजीपुर का रहने वाला है। उसके पिता चमड़ा फैक्टरी में काम करते थे,
जिसके बाद परिवार कानपुर आ गया। शुरुआती दिनों में उसने जाजमऊ इलाके में परचून की दुकान चलाई,
लेकिन बाद में वह अवैध वित्तीय लेनदेन और हवाला नेटवर्क से जुड़ गया।
धीरे-धीरे उसने करोड़ों रुपये के ट्रांजेक्शन संभालने वाला बड़ा सिंडिकेट खड़ा कर लिया।
पुलिस और आयकर विभाग की जांच तेज,
फिलहाल पुलिस और आयकर विभाग पूरे नेटवर्क की
जांच में जुटे हुए हैं। यह भी पता लगाया जा रहा है कि कहीं
अन्य राज्यों के कारोबारी और बैंक कर्मचारी भी इस सिंडिकेट से जुड़े तो नहीं थे।
जांच एजेंसियां अब डिजिटल रिकॉर्ड, बैंक स्टेटमेंट और ट्रांजेक्शन हिस्ट्री खंगाल रही हैं।
आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
कानपुर का यह 3200 करोड़ रुपये का कथित महाघोटाला देश के सबसे बड़े
अवैध वित्तीय नेटवर्क में से एक माना जा रहा है।
एक छोटी लूट की घटना से शुरू हुई जांच ने हवाला,
फर्जी खातों और संदिग्ध बैंकिंग लेनदेन के विशाल नेटवर्क को उजागर कर दिया।
अब पूरे देश की नजर इस बात पर टिकी है कि जांच में आगे और कितने बड़े नाम सामने आते हैं।