बरेली में खुद को आईएएस अफसर बताकर ठगी करने वाली विप्रा शर्मा और उसकी दो बहनों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पूछताछ में सामने आया कि विप्रा ने न सिर्फ अफसर होने का झूठा दावा किया, बल्कि खुद ही अपना “प्रमोशन” कर एसडीएम से एडीएम बन बैठी और उसी रुतबे का इस्तेमाल कर लोगों से लाखों रुपये ठगती रही।
ऐसे रचा गया फर्जी अफसर बनने का खेल
पुलिस के अनुसार विप्रा ने कई बार सिविल सेवा परीक्षा दी, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद उसने खुद को अधिकारी बताना शुरू कर दिया। उसकी बड़ी बहन ने उसे एसडीएम के रूप में पेश किया और इसी बहाने बेरोजगार युवाओं से पैसे लेकर नौकरी दिलाने का झांसा दिया।
धीरे-धीरे यह ठगी का नेटवर्क बड़ा होता गया और तीनों बहनें मिलकर लोगों को फर्जी नियुक्ति पत्र देने लगीं।
फर्जी प्रमोशन और बढ़ता रुतबा
विप्रा ने खुद को एसडीएम से एडीएम वित्त-राजस्व पद पर प्रमोट होने का दावा किया। लोगों को भरोसा दिलाने के लिए:
एसयूवी पर एडीएम लिखवाया
हूटर और बत्ती लगाकर घूमती थी
कभी गजरौला तो कभी अमरोहा में पोस्टिंग बताती थी
इस तरह उसने एक सरकारी अफसर की पूरी छवि तैयार कर ली, जिससे लोग आसानी से उसके झांसे में आ जाते थे।
ऐसे होती थी ठगी
तीनों बहनें बेहद शातिर तरीके से ठगी को अंजाम देती थीं:
फर्जी नियुक्ति पत्र घर में ही छापे जाते थे
लखनऊ से डाक के जरिए पत्र भेजे जाते थे ताकि शक न हो
कुछ लोगों के खातों में शुरुआती महीनों में “वेतन” भी भेजा जाता था
इससे पीड़ितों को विश्वास हो जाता था कि उन्हें सच में सरकारी नौकरी मिल गई है।
ठगी के पैसों से आलीशान जिंदगी
पुलिस के मुताबिक ठगी से कमाए पैसों से:
महंगा मकान बनवाया गया
करीब 27 लाख की SUV खरीदी गई
शाही जीवनशैली अपनाई गई
यह सब दिखाकर आरोपी और ज्यादा लोगों को अपने जाल में फंसाते थे।
परिवार और निजी जीवन
विप्रा की शादी 2017 में एक इंजीनियर से हुई थी, लेकिन 2020 में तलाक हो गया। इसके बाद वह अपने पिता के घर रहने लगी। उसकी बहनें भी पढ़ी-लिखी हैं, लेकिन उन्होंने गलत रास्ता अपनाकर ठगी का नेटवर्क खड़ा कर लिया।
पुलिस जांच और कार्रवाई
पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और
उनके खिलाफ ठगी समेत कई धाराओं में केस दर्ज किया गया है।
मामले की जांच जारी है और यह पता लगाया जा रहा है कि
इस गिरोह ने कितने लोगों को ठगा है।
बरेली का यह मामला दिखाता है कि कैसे फर्जी पहचान और
दिखावे के दम पर लोगों को ठगा जा सकता है।
ऐसे मामलों में सतर्क रहना बेहद जरूरी है और किसी भी नौकरी या
सरकारी पद के नाम पर पैसे देने से पहले पूरी जांच करना जरूरी है।