पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और युद्ध की स्थिति ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को बुरी तरह प्रभावित किया है। ईरान और इजरायल के बीच टकराव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है। ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है, जो पिछले कुछ दिनों में लगभग 15 प्रतिशत की तेजी दर्शाता है। इस वैश्विक उथल-पुथल का सीधा असर भारत पर पड़ा है, जहां वाणिज्यिक LPG सिलेंडर की कीमतों में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
दिल्ली में वाणिज्यिक सिलेंडर की कीमतों में उछाल
नई दिल्ली में तेल विपणन कंपनियों IOC, BPCL और HPCL ने 19 किलो के वाणिज्यिक गैस सिलेंडर की कीमत में 195.5 रुपये की बढ़ोतरी कर दी है। इसके बाद अब इसकी कीमत लगभग 1800 रुपये के आसपास पहुंच गई है। इस बढ़ोतरी ने खासतौर पर होटल, रेस्तरां और छोटे व्यापारियों की चिंता बढ़ा दी है।
क्यों बढ़ी गैस सिलेंडर की कीमत
पश्चिम एशिया का क्षेत्र वैश्विक तेल आपूर्ति का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल गुजरता है। युद्ध और तनाव के कारण इस सप्लाई रूट पर खतरा बढ़ गया है, जिससे तेल की कीमतों में तेजी आई है।
भारत अपनी जरूरत का करीब 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले बदलाव का सीधा असर देश की ऊर्जा कीमतों पर पड़ता है।
व्यापारियों पर बढ़ता आर्थिक दबाव
दिल्ली और एनसीआर के हजारों रेस्तरां, ढाबे और होटल इस बढ़ोतरी से प्रभावित हुए हैं। व्यापारियों का कहना है कि गैस सिलेंडर की कीमत बढ़ने से उनके मासिक खर्च में 15 से 20 प्रतिशत तक की वृद्धि हो सकती है।
छोटे कारोबारियों के लिए यह स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण है। कई ढाबा और फूड स्टॉल संचालकों का कहना है कि उन्हें मजबूरी में खाने की कीमतें बढ़ानी पड़ेंगी, जिससे आम जनता पर भी असर पड़ेगा।
आम लोगों पर भी पड़ेगा असर
हालांकि सरकार ने घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों को फिलहाल स्थिर रखा है, लेकिन वाणिज्यिक सिलेंडर महंगा होने से खाने-पीने की चीजें महंगी हो सकती हैं।
रोटी, सब्जी, बिरयानी और अन्य खाद्य पदार्थों की कीमतों में धीरे-धीरे बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
इससे महंगाई दर पर भी दबाव बढ़ सकता है, जो पहले से ही एक चिंता का विषय बना हुआ है।
वैश्विक बाजार में आगे क्या होगा
ओपेक और अन्य अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों का मानना है कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव लंबा चलता है,
तो कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है।
इससे भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो सकती है।
भारत सरकार ने स्थिति से निपटने के लिए रणनीतिक
पेट्रोलियम रिजर्व से तेल जारी करने जैसे कदमों पर विचार किया है।
साथ ही, वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों जैसे सोलर और बायो-गैस पर भी जोर दिया जा रहा है।
व्यापारियों के लिए क्या हैं विकल्प
विशेषज्ञों का मानना है कि व्यापारियों को धीरे-धीरे वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की ओर बढ़ना चाहिए।
इलेक्ट्रिक कुकिंग, बायो-गैस और सोलर एनर्जी जैसे विकल्प भविष्य में लागत कम करने में मदद कर सकते हैं।
हालांकि, फिलहाल LPG ही सबसे ज्यादा उपयोग में आने वाला ईंधन बना रहेगा।
वाणिज्यिक गैस सिलेंडर की कीमत में 195.5 रुपये की बढ़ोतरी ने
दिल्ली समेत पूरे देश के व्यापारिक क्षेत्र को प्रभावित किया है।
पश्चिम एशिया में चल रहा युद्ध और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल इसका मुख्य कारण है।
यह स्थिति न केवल व्यापारियों के लिए चुनौती है, बल्कि आम जनता की जेब पर भी असर डाल सकती है।
आने वाले समय में सरकार और बाजार की रणनीतियां तय करेंगी कि इस संकट से कैसे निपटा जाए।