गोरखपुर के डिसेंट
गोरखपुर में इंश्योरेंस फ्रॉड का पर्दाफाश: मैनेजर गिरफ्तार, अस्पताल सील
गोरखपुर में एक बार फिर मेडिकल फ्रॉड का बड़ा मामला सामने आया है। तारामंडल के बुद्ध विहार पार्ट-ए स्थित डिसेंट हॉस्पिटल एंड ट्रॉमा सेंटर के मैनेजर ताहिर खान को रामगढ़ताल पुलिस ने रविवार को गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई एसबीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड की शिकायत पर हुई है। आरोप है कि अस्पताल ने 12 मरीजों को कभी भर्ती ही नहीं किया, लेकिन उनके नाम पर फर्जी हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम दाखिल कर रकम हड़पने की कोशिश की गई।
फर्जी दस्तावेजों से क्लेम पास करने की साजिश
कंपनी की जांच रिपोर्ट के मुताबिक, क्लेम दस्तावेजों में इलाज करने वाले डॉक्टर के रूप में डॉ. अजय कुमार सिंह का नाम दर्ज था। लेकिन डॉ. सिंह ने लिखित बयान में स्पष्ट किया है कि वे अप्रैल 2025 से इस अस्पताल से जुड़े नहीं हैं। उन्होंने उन मरीजों का कोई इलाज नहीं किया जिनके नाम से क्लेम दाखिल किए गए। इसके अलावा, क्लेम के साथ लगाई गई कई लैब रिपोर्ट्स भी फर्जी पाई गई हैं। यह साफ संकेत है कि अस्पताल प्रबंधन ने जानबूझकर फर्जीवाड़ा किया ताकि इंश्योरेंस कंपनी से लाखों रुपये निकाले जा सकें।
पुलिस जांच में पता चला है कि मरीजों को अस्पताल में भर्ती दिखाकर इलाज के नाम पर क्लेम सबमिट किए गए, जबकि वास्तव में कोई इलाज नहीं हुआ। यह धोखाधड़ी स्वास्थ्य बीमा क्षेत्र में बढ़ते फ्रॉड का एक और उदाहरण है, जहां अस्पताल और एजेंट मिलकर कंपनियों को ठगते हैं।
अस्पताल पहले से सील, अब मैनेजर जेल में
डिसेंट हॉस्पिटल पहले से ही सील किया जा चुका है। पुलिस ने ताहिर खान को रामगढ़ताल इलाके से गिरफ्तार किया और पूछताछ के बाद जेल भेज दिया। रामगढ़ताल थाना प्रभारी की टीम ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई की।
कंपनी की ओर से दर्ज शिकायत में स्पष्ट आरोप लगाए गए हैं कि अस्पताल ने
फर्जी मरीजों की फाइलें तैयार कीं और क्लेम पास कराने के लिए दस्तावेजों में हेरफेर किया।
यह मामला गोरखपुर में पिछले कुछ समय से चल रहे इंश्योरेंस फ्रॉड के सिलसिले का हिस्सा लगता है।
पहले भी ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां अस्पतालों ने फर्जी भर्ती दिखाकर करोड़ों की ठगी की।
पुलिस अब अन्य संलिप्त लोगों की तलाश में जुटी है और जांच को आगे बढ़ा रही है।
इंश्योरेंस फ्रॉड से बचाव के महत्वपूर्ण टिप्स
- इंश्योरेंस क्लेम के लिए हमेशा आधिकारिक अस्पताल और डॉक्टर चुनें।
- क्लेम दस्तावेजों की जांच खुद करें और फर्जी रिपोर्ट्स से सावधान रहें।
- संदिग्ध अस्पताल या एजेंट से दूर रहें जो आसान क्लेम का वादा करें।
- किसी भी फ्रॉड की शिकायत तुरंत इंश्योरेंस कंपनी और पुलिस को करें।
