2026 में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में भारी उछाल देखा गया है, जो मध्य पूर्व संकट, रूस-यूक्रेन युद्ध और OPEC+ उत्पादन कटौती से उपजा है। मार्च 2026 में ब्रेंट क्रूड $90 प्रति बैरल को पार कर चुका है, जबकि कुछ रिपोर्ट्स में 31-36% मासिक वृद्धि दर्ज हुई। भारत 85% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए पेट्रोल और डीजल की कीमतें 10-15% बढ़ गईं—पेट्रोल ₹110/लीटर और डीजल ₹100 से ऊपर पहुंच गया। यह महंगाई आम आदमी की जेब पर भारी पड़ रही है।
एलपीजी गैस पर कम असर: क्यों नहीं बढ़ी कीमतें उतनी?
*एलपीजी (LPG) पर कच्चे तेल उछाल का प्रभाव सीमित रहा क्योंकि यह मुख्य रूप से प्राकृतिक गैस और रिफाइनरी बाय-प्रोडक्ट से बनती है, न कि सीधे क्रूड पर निर्भर। इंडियन ऑयल, BPCL और HPCL जैसी कंपनियां घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतें स्थिर रखने की कोशिश कर रही हैं। हालांकि मार्च 2026 में ₹60 की बढ़ोतरी हुई, लेकिन सब्सिडी के कारण 14.2 किलो सिलेंडर दिल्ली में ₹913 पर उपलब्ध है, जो पहले ₹853 था। PMUY (प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना) से 10 करोड़ से अधिक परिवारों को सब्सिडी मिल रही है, जिससे एलपीजी सस्ती बनी हुई है।
एलपीजी के घरेलू उपयोग के प्रमुख फायदे
*एलपीजी घरेलू रसोई में सबसे सुरक्षित, कुशल और स्वच्छ ईंधन है। यह तुरंत जलती है, कोई धुआं नहीं छोड़ती और लीक-प्रूफ सिलेंडर से सुरक्षित। लकड़ी या कोयले की तुलना में 70% सस्ती और समय बचाती है। पर्यावरण के लिए बेहतर—CO2 उत्सर्जन 50% कम। ग्रामीण भारत में 90% घरों ने इसे अपना लिया है, जबकि शहरी क्षेत्रों में 95% उपयोग LPG का है।
सब्सिडी, उपलब्धता और सरकारी योजनाओं ने बढ़ाई वरीयता
सरकार की उज्ज्वला योजना ने 28 करोड़ से अधिक एलपीजी कनेक्शन दिए हैं।
DBT (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) से सब्सिडी सीधे बैंक खाते में आती है, जिससे कच्चे तेल की
अस्थिरता का असर कम पड़ता है। 2026 में दिल्ली में 14.2 किलो सिलेंडर ₹
913 (सब्सिडी के बाद सस्ता) पर मिल रहा है। ऑनलाइन बुकिंग,
इंडेन ऐप और तेज डिलीवरी ने इसे और सुगम बनाया।
पेट्रोल-डीजल की तुलना में एलपीजी पर सब्सिडी और प्राथमिकता से घरेलू उपयोग बढ़ा है।
भविष्य में क्या: एलपीजी बनी रहेगी पसंदीदा?
कच्चे तेल की अस्थिरता के बावजूद एलपीजी घरेलू उपयोग की पहली पसंद बनी हुई है।
सरकार घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दे रही है, रिफाइनरियों को अधिक उत्पादन के निर्देश दिए हैं। स्वच्छ ईंधन मिशन और
स्वास्थ्य लाभ से ग्रामीण-शहरी दोनों क्षेत्रों में अपनापन बढ़ रहा है। यह उछाल उपभोक्ताओं को
महंगे पेट्रोल-डीजल से दूर, सस्ते और पर्यावरण-अनुकूल एलपीजी की ओर धकेल रहा है।
