मार्च 2026 के पहले सप्ताह में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिला दिया। ईरान-इज़राइल-अमेरिका संघर्ष के बीच ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने होर्मुज जलसंधि को अमेरिका, इज़राइल, यूरोप और उनके सहयोगियों के जहाजों के लिए प्रभावी रूप से बंद कर दिया। लेकिन भारत के लिए राहत की खबर आई—ईरान ने स्पष्ट रूप से भारतीय जहाजों को छूट दी है। इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हुई, क्योंकि होर्मुज से गुजरने वाला 40-50% कच्चा तेल बिना रुकावट आ सकता है। साथ ही, अमेरिका ने भारतीय रिफाइनरियों को रूसी तेल खरीद पर 30 दिनों की अस्थायी छूट दी, जो ऊर्जा संकट में बड़ी मदद साबित हुई।
होर्मुज जलसंधि तनाव: ईरान की भारतीय जहाजों को विशेष छूट
होर्मुज जलसंधि दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण चोकपॉइंट है, जहां से वैश्विक 20% कच्चा तेल और LNG गुजरता है। IRGC ने 5 मार्च 2026 को घोषणा की कि अमेरिका, इज़राइल, यूरोप और उनके सहयोगियों के जहाजों को रोका जाएगा, लेकिन भारत जैसे मित्र या न्यूट्रल देशों के जहाजों को कोई समस्या नहीं। ईरान ने कहा कि केवल “दुश्मन” देशों के जहाज प्रभावित होंगे। इससे भारतीय टैंकर सुरक्षित गुजर सकते हैं, और 38 भारतीय जहाजों की फंसी स्थिति में राहत मिली। भारत-ईरान संबंधों की मजबूती इस छूट से साफ दिखती है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने इसे सकारात्मक बताया, जो ऊर्जा आयात चेन को स्थिर रखेगा।
भारत का तेल आयात: 85% निर्भरता और होर्मुज का महत्व
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है, जहां कुल जरूरत का 85% आयात होता है। होर्मुज से सऊदी अरब, इराक, UAE आदि से 40-50% तेल (25-27 लाख बैरल प्रतिदिन) आता है। यदि मार्ग पूरी तरह बंद होता, तो ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल पार कर सकता था, जो अर्थव्यवस्था पर भारी पड़ता। लेकिन ईरान की छूट से रिलायंस, IOCL जैसी रिफाइनरियां सुरक्षित हैं। सरकार की ‘ऊर्जा आत्मनिर्भरता’ नीति को बल मिला, और स्टॉक 25 दिनों के लिए पर्याप्त हैं।
अमेरिका की रूसी तेल छूट: 30 दिनों की राहत
संघर्ष के बीच अमेरिका ने 6 मार्च 2026 को भारतीय रिफाइनरियों को रूसी तेल पर 30 दिनों की छूट दी (5 मार्च तक लोडेड कार्गो, 4 अप्रैल तक वैध)। रूस से सस्ता तेल (डिस्काउंट पर) भारत की 20-25% जरूरत पूरी करता है।
G7 प्रतिबंधों के बावजूद यह छूट US ट्रेजरी से आई, ताकि वैश्विक सप्लाई स्थिर रहे।
ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा कि यह “ईरान के एनर्जी होस्टेज” से
दबाव कम करने का स्टॉप-गैप उपाय है। भारत की कूटनीति सफल रही, जो रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद भी जारी है।
वैश्विक ऊर्जा बाजार पर प्रभाव और भारत की रणनीति
होर्मुज संकट से ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर के ऊपर पहुंचा, लेकिन भारत ने विविधीकरण बढ़ाया—रूस, अमेरिका,
अफ्रीका से आयात। ग्रीन हाइड्रोजन, रिन्यूएबल और PLI स्कीम्स पर फोकस से लंबी रणनीति मजबूत हो रही।
सरकार ने कहा कि नॉन-होर्मुज रूट्स से आयात फुल फ्लो में है, और कोई कमी नहीं।
यह घटना भारत को सतर्क करती है कि जियोपॉलिटिकल रिस्क से ऊर्जा सुरक्षा कैसे सुनिश्चित करें।
ईरान की छूट और अमेरिका की रूसी तेल वैवर ने भारत को बड़ा संकट टाल दिया।
लेकिन लंबे समय में आत्मनिर्भरता और डाइवर्सिफिकेशन जरूरी है।
भारत की स्मार्ट डिप्लोमेसी ने ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत किया है।
