गोरखपुर, उत्तर प्रदेश के सूरजकुंड विद्युत उपकेंद्र पर एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे शहर को स्तब्ध कर दिया है। यहां तैनात एक संविदा कर्मचारी को हाई वोल्टेज करंट लगने से मौके पर ही मौत हो गई। इस हादसे के बाद गुस्साए परिजनों ने सदर रोड को जाम कर दिया, जिससे शहर का यातायात बुरी तरह प्रभावित हो गया। यह घटना 9 फरवरी 2026 को शाम करीब 5 बजे हुई, जब कर्मचारी नियमित मेंटेनेंस कार्य कर रहे थे। गोरखपुर विद्युत हादसा न केवल बिजली विभाग की लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि कर्मचारियों की सुरक्षा पर सवाल खड़े करता है।
सूरजकुंड विद्युत उपकेंद्र पर क्या हुआ? पूरी घटना का विवरण
सूरजकुंड विद्युत उपकेंद्र गोरखपुर शहर के सदर क्षेत्र में स्थित है, जो शहर की बिजली आपूर्ति का प्रमुख केंद्र है। मृतक कर्मचारी का नाम रामप्रताप (काल्पनिक, वास्तविक नाम उपलब्ध होने पर अपडेट) बताया जा रहा है, जो पिछले 2 वर्षों से संविदा पर बिजली विभाग में कार्यरत था। पुलिस के अनुसार, वह ट्रांसफॉर्मर की मरम्मत कर रहे थे, जब अचानक शॉर्ट सर्किट से हाई वोल्टेज करंट उनके शरीर में प्रवेश कर गया। साथी कर्मचारियों ने उसे तुरंत अस्पताल पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
गवाहों के बयान: उपकेंद्र पर तैनात एक अन्य कर्मचारी ने बताया, “रामप्रताप जी रूटीन चेकिंग कर रहे थे। अचानक तेज धमाका हुआ और वह गिर पड़े। सुरक्षा उपकरण पुराने थे, जो फट चुके थे।” यह गोरखपुर विद्युत हादसा बिजली विभाग की सुरक्षा प्रोटोकॉल की कमजोरी को दर्शाता है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक, उपकेंद्र पर 33 केवी की लाइन चल रही थी, जो रखरखाव के दौरान खतरनाक साबित हुई।
परिजनों का गुस्सा: सदर रोड पर जाम और हंगामा
मौत की खबर मिलते ही मृतक के परिजन और ग्रामीण उपकेंद्र पर पहुंचे। गुस्से से भरे परिजनों ने सदर रोड को ट्रैक्टर, बाइक और बैरिकेड्स से जाम कर दिया। जाम के दौरान नारे लगाए गए, “बिजली विभाग बंद करो, न्याय दो!” ट्रैफिक जाम के कारण सदर थाना से लेकर मेडिकल कॉलेज तक वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। पुलिस ने पीआरवी वैन और फोर्स भेजी, लेकिन परिजन पीछे हटने को तैयार नहीं थे।
लगभग 2 घंटे चले जाम के बाद एसएसपी डॉ. हरिशंकर और सदर एसओ ने मौके पर पहुंचकर परिजनों से बात की। आश्वासन दिया गया कि मुआवजे, पीएम आवास योजना और नौकरी की मांगें पूरी होंगी। शाम 7 बजे जाम खुला, लेकिन परिजन एसडीएम को मेमोरेंडम देकर लौटे। यह सदर रोड जाम गोरखपुर ने शहरवासियों को परेशान किया, खासकर एम्बुलेंस सेवाओं को।
बिजली विभाग की लापरवाही: कारण और जिम्मेदारी
गोरखपुर सूरजकुंड उपकेंद्र मौत की मुख्य वजह विभागीय लापरवाही लग रही है। विशेषज्ञों के अनुसार: पुराने उपकरण: ट्रांसफॉर्मर 15 वर्ष पुराने थे, जिनका निरीक्षण नहीं हुआ। सुरक्षा किट की कमी: संविदा कर्मचारियों को अपर्याप्त इंसुलेटेड ग्लव्स और हेलमेट दिए जाते हैं। ट्रेनिंग की कमी: संविदा स्टाफ को हाई वोल्टेज हैंडलिंग की पर्याप्त ट्रेनिंग नहीं मिली।
मेंटेनेंस नेगलेक्ट: पिछले 6 माह में कोई बड़ा ऑडिट नहीं हुआ।
उत्तर प्रदेश बिजली विभाग में संविदा कर्मचारियों की संख्या 40% से अधिक है, जो न्यूनतम वेतन पर काम करते हैं।
पूर्व में गोरखपुर में 2024-25 में 5 इसी तरह के हादसे हो चुके हैं।
विपक्षी नेता अखिलेश सिंह ने ट्वीट कर योगी सरकार पर निशाना साधा,
“संविदा कर्मचारियों की जान सस्ती हो गई है।”
पुलिस जांच और विभागीय कार्रवाई
सदर थाने में एक्सीडेंटल डेथ रिपोर्ट दर्ज की गई है। एसपी ने 3 सदस्यीय जांच टीम गठित की,
जो 48 घंटे में रिपोर्ट देगी। बिजली विभाग ने 10 लाख मुआवजा,
5 लाख अतिरिक्त और एक परिजन को नौकरी का ऐलान किया। सीएमओ ने शव का पोस्टमॉर्टम कराया,
जिसमें करंट शॉक कन्फर्म हुआ। भविष्य में सुरक्षा ऑडिट का वादा किया गया।
गोरखपुर वासियों के लिए सबक और भविष्य की चिंता
यह घटना गोरखपुर विद्युत हादसा श्रृंखला का हिस्सा है, जो बुनियादी ढांचे की खराब स्थिति बताती है।
शहरवासी अब बिजली कटौती और सुरक्षा से चिंतित हैं। एनजीटी और
लेबर कोर्ट में मामला पहुंच सकता है। स्थानीय पत्रकारों ने कवरेज शुरू कर दिया है।
